भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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चतुर्थस्तरङ्गः ४१ अथ यन्त्रविज्ञानीयश्चतुर्थस्तरंगः यन्त्रलक्षणम् रसोपरसलोहाद्य। मारणाद्यर्थसिद्धये । यन्त्र्यन्तेऽनेन यस्मात्तु तस्माद् यन्त्रं प्रकीर्तितम् ॥१॥ अथादौ यन्त्रलक्षणम्—मारणशोधनादौ रसादिनियमनप्रयोजनं यन्त्र- मिति निष्कर्षः । तदुक्तं रसवाग्भटे-“स्वेदादि कर्म निर्मातुं वर्तिकेन्द्रैः प्रयत्नतः । यन्त्र्यते पारदो यस्मात्तस्माद्यन्त्रमिति स्मृतम्” ॥ १ ॥ भा.टी.—पारद, उपरस, धातु आदि के मारण, शोधन, स्वेदन आदि क्रियाओं को करते हुए मारण आदि क्रियाओं की सफलता के लिए अर्थात् रस आदि को गिरने, उड़ने या जलने आदि से बचाने के लिए जिन उपायों और उपकरणों का प्रयोग किया जाता है उसे यन्त्र कहते हैं ॥ १ ॥ वक्तव्य-रसवाग्भट में यन्त्र का लक्षण इस प्रकार लिखा है कि “स्वेदा- दिकर्म निर्मातुं वर्तिकेन्द्रैः प्रयत्नतः । यन्त्र्यते पारदो यस्मात्तस्माद्यन्त्रमिति स्मृतम् ॥” यन्त्र की यन्त्र्यते, नियम्यते, बध्यते, रक्ष्यते वा पारदादिरनेनोपायेन तद्यन्त्रम्”—यह व्युत्पत्ति कही जाती है ॥ दोला यन्त्र