रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४ रसतरङ्गिणी ...र कपड़मिट्टी करके अच्छी तरह सुखा लें। अब इस यन्त्र को चूल्हे पर रख कर नीचे अग्नि जलावें। ऊपर की हाँड़ी के थांले में जल भर दें। जब थांले का पानी गरम हो जाय उसे नली का डाट खोलकर निकाल दें और फिर डाट बन्द करके थांले में शीतल जल भर दें। इस विधि से अग्नि देने पर पारद धीरे-धीरे उड़कर ऊपर की हाँड़ी के भीतरी पेंदे में चिपक जाता है। जिसे ठण्डा होने पर खोलकर भीतरी प्रदेश को रगड़कर निकाला जाता है। पारद को इस विधि से ऊपर उड़ाने के लिए काम में आनेवाले यन्त्र को ऊर्ध्वपातन यन्त्र कहते हैं॥ ६-१०॥ वक्तव्य—ऊपर की हांड़ी में थांला (आलवाल) जलमृत्तिका से बनायें अथवा इस प्रकार बना बनाया पात्र ही ले लेना चाहिए। जलमृत्तिका का लक्षण इस प्रकार लिखा है—"लेहवत्कृतबब्बूलक्वाथेन परिमर्दितम्। जीर्णांकिट्ट- रजः सूक्ष्मं गुडचूर्णसमन्वितम्। इयं हि जलमृत्प्रोक्ता दुर्भेद्या सलिलैः खलु॥" ऊर्ध्वपातन यन्त्र