भारतकोश
रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

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चतुर्थस्तरङ्गः ५५ औषधियों का काथ या स्वरस भरकर इस अर्ध जल-पूरित पात्र में टिकाकर बड़े जलवाले पात्र को चूल्हे पर रखें और अग्नि जलायें। जब अग्नि ताप से काथ आदि द्रव्य चूर्ण रूप में रह जाय तो पात्र को नीचे उतार लें। क्योंकि इस विधि से जल वाष्प द्वारा औषधि का स्वेदन किया जाता है। अतः इसे बाष्प- स्वेदन यन्त्र कहते हैं। इस यन्त्र के द्वारा वनौषधियों के सत्त्वनिर्माण कार्य में बड़ी सुविधा होती है ॥ ३५-३८ ॥ बाष्पस्वेदनयन्त्र का दूसरा प्रकार स्वेद्य द्रव्य तृण का जाली जल