भारतकोश
रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

Ratnavali Natika of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished520 पृष्ठ

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पृष्ठ 318

! That explains why it is printed with 'धौ'! It is literally printed as (अवधौरयित्वा) or (अवधौर्यित्वा).

Look at : आगच्छन्त्या मया अतिनिष्ठुरं कृतम् । तदिदानीं स्वयमेव गत्वा आर्यपुत्रम्

Look at : अनुनेष्यामि ।

Look at : (ग) का अन्या देवीं वर्जयित्वा एवं भणितुं जानाति ? वरं स एवं ( एव ) देवो Wait, is it "देवो" or "देवी"? In : "देवो" - it has an 'ो' on 'व'.

Look at : दुर्जनो भवतु, न पुनर्देवी ! तदेतु एतु देवी । Wait, "पुनर्देवी" has a space or not? "पुनर्देवी !" (or "पुनर् देवी !"). In image: "पुनर्देवी !".

Look at (Commentary): अयि जीवितेशे प्राणानामधीश्वरि, अधुना पाशबन्धनरूपेण ते साहसेन बलात्कारकृत-

Look at : कार्येण फलं न प्रयोजनम् । त्वम एतं लतापाशं मुञ्च परित्यज । मम चलितं गमनी- Wait, "त्वम" or "त्वम्"? Look at [