रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)
Ratnavali Natika of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्थोऽङ्कः 389 तैः विप्रैः देवप्रीणनकर्म्माचरणादिभिः त्रिदिविष्टपार्ज्जनं याच्यते। ततश्च आकल्पान्तं सुखकरसज्जनसङ्गमहारैश्च रसकपनज्ञानान्द प्राप्तिः प्रार्थ्यते। इत्याशयः ॥२१॥ इति ऐन्द्रजालिको नाम चतुर्थोऽङ्कः ॥ अवसिताय श्रीहर्षदेवस्य कृतिरियं रत्नावली नाम नाटिका ॥ Prose order. विक्रमबाहुः आत्मसमतां नीतः, तथाच उर्व्वीतले सारं भुवनप्राप्तेरेकहेतुः इयं प्रिया सागरिका प्राप्ता। देवी च भगिनीलाभात् प्रीतिम् उपागता, कोशलाः जिताः ; त्वयि अमात्यवृषभे सति किं तत् नास्ति यस्मै स्पृहां करोमि ? ॥२१॥ वासवः इष्टां वृष्टिं विसृजन् उर्व्वीम् उद्दामसस्यां जनयतु ; विप्रमुख्याः विधिवत् दत्तैः त्रैविष्टपानां प्रीणनं विदधतु। सज्जनानां समुपचितसुखः सङ्गमः आकल्पान्तं च भूयात् ; दुर्ज्जयाः वज्रलेपाः पिशुनवचगिरः निःशेषं शान्तिं यान्तु ॥२२॥ Beng. Trans. বসুম্ভূতি—রাজপুত্রি! বাসবদত্তাকে প্রণামের দ্বারা অর্চ্চিত কর। (রত্নাবলী তাহাই করিলেন) বাসব্বা—দেবি! যথার্থই আপনি ‘দেবী’ শব্দ গ্রহণ করিয়াছেন। (বাসবদত্তা রত্নাবলীকে আলিঙ্গন করিয়া ‘দেবী’শব্দের দ্বারা রত্নাবলীকে সম্মানিতা করিলেন) বাভ্রব্য—এখন পরিশ্রম সফল হইল। যৌগন্ধ—মহারাজ! বলুন আপনার আর কি প্রিয় কার্য্য সাধন করিব? রাজা—ইহার পর কি আরও প্রিয়কার্য্য করিবার আছে! যেহেতু— রাজ্য বিক্রমবাহুকে নিজের তুল্য (পদগৌরবে) করিয়া লইয়াছি। পৃথিবীর সারভূতা সকলভুবনপ্রাপ্তির (সার্ব্বভৌম-পদপ্রাপ্তির) একমাত্র কারণ এই সাগরিকাকে প্রিয়ারূপে পাইয়াছি। ভগিনীলাভে দেবী বাসবদত্তা প্রীতিলাভ করিয়াছেন। কোশল রাজ্য জয় করা হইয়াছে; আর আপনার মত অমাত্যশ্রেষ্ঠ থাকিতে এমন কি জিনিষ নাই যাহা আমি আকাঙ্ক্ষা করিতে পারি? ॥২১॥ তথাপি—ইহাই হউক,— (ভরতবাক্য) ইন্দ্র অভিমতরূপ বৃষ্টিপাত করিয়া পৃথিবীকে শস্যপূর্ণা করুন। বিপ্রশ্রেষ্ঠগণ যথাবিধি