रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)

रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)
Ratnavali Natika of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished520 पृष्ठ
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38 रत्नावली मदनिका—एहि तरह्मा । (ग) उभे—(उपसृत्य) जेदु जेदु भट्ठा । भट्ठा देवी आणवेदि (इत्यर्धोक्ते लज्जां नाटयन्त्यौ) णहि णहि विण्णवेदि । [घ] राजा—(सहर्षं विहस्य सादरम् ) नन्वाज्ञापयतीत्येव रमणीयम् । विशेषतोऽद्य मदनमहोत्सवे । तत् कथय किमाज्ञापयति देवी । विदूषकः—आः दासीए धीए ! किं देवी आणवेदि ? (ङ) चेट्यौ—एव्वं देवी विण्णवेदि—अज्ज क्खु मए मअरंदुज्जाणं गदुअ रत्तासोअपायवदलसंठाविदस्स भगवदो कुसुमाउहस्स पूजा णिव्वत्तइदव्वा । तहिं अत्ताउत्तेण संणिहिदेण होदव्वम् । (च) राजा—(सानन्दम्) वयस्य, ननु वक्तव्यमुत्सवादुत्सवा- न्तरमापतितम् । [L1