भारतकोश
ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)

ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)

Ribhu Gita of Shiva Rahasya Hindi

महर्षि ऋभु / महर्षि निदाघ द्वारा

स्रोत: Ribhu Gita Sanskrit Shlokas with Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished249 पृष्ठ

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॥ तृतीयोऽध्यायः ॥

सूतः –

ततो महेशात् संश्रुत्य सूत्राणि ऋभुरेव हि ।
कैलासेशं महादेवं तुष्टाव विनयाञ्जलिः ॥ ३.१॥

लब्धज्ञानो महादेवान् मुनिभ्योऽकथयच्च तत् ।
तत् स्तुतिं च शृणुष्वेति जगाद गिरिजासुतः ॥ ३.२॥

जैगीषव्यं महात्मानं जितषड्वर्गमुत्तमम् ।

स्कन्दः –

संस्तुत्य साम्बमीशानमृभुर्ज्ञानमविन्दत ।
शांभवः स महायोगी तुष्टावाष्टतनुं हरम् ॥ ३.३॥

ऋभुः –

गन्धद्विपवरवृन्दत्वचिरुचिबन्धोद्यतपट
गन्धप्रमुख मदान्धव्रजदलि हरिमुखनखरोद्यत्
स्कन्धोद्यन्मुख बन्धुरनिभ निर्यद्रसदस्यखन्दन्नगधर
विन्ध्यप्रभशिव मेध्यप्रभुवर ।
मेध्योत्तमशिव भेद्याखिलजगदुद्यद्भवगत
वेद्यागमशिव गद्यस्तुतपद पद्यप्रकटहृ-
दुद्यद्भवगद वैद्योत्तम पाहि शम्भो ॥ ३.४॥

चण्डद्विपकर काण्डप्रभभुज दण्डोद्यतनग
खण्डत्रिपुर महोण्डस्फुटदुडुपशिखण्ड ।
द्युतिवर गण्डद्वय कोदण्डान्तक दण्डितपाद पाहि शम्भो ॥ ३.५॥

किञ्चिज्जललव सिञ्चद्द्विजकुल मुञ्चद्द्वजिन
कुलुञ्चद्द्विजपति चञ्चच्छविजट कुञ्चत्पदनख
मुञ्चन्नतवर करुणा पाहि शम्भो ॥ ३.६॥

देव शंकर हरमहेश्वर पापतस्कर अमरमयस्कर ।
शिवदशंकर पुरमहेश्वर भवहरेश्वर पाहि शम्भो ॥ ३.७॥

अंगजभंग तुरंगरथांग जलधिनिषंग
धृतभुजंगांग दृशि सुपतंग