भारतकोश
ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)

ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)

Ribhu Gita of Shiva Rahasya Hindi

महर्षि ऋभु / महर्षि निदाघ द्वारा

स्रोत: Ribhu Gita Sanskrit Shlokas with Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished249 पृष्ठ

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करसुकुरङ्ग जटधृतगङ्ग यमिहृदिसङ्ग भजशिवलिङ्ग भवभयभङ्ग ॥ ३.८॥

शम्बरकरशर दम्बरवरचर डम्बरघोषण दुम्बरफलजग निकुरुम्बभरहर जम्बितहृदिचिर लम्बितपदयुग लम्बोदरजनकान्तकहर शिव बिन्दुवरासन बिन्दुगहन शरदिन्दुवदनवर कुन्दधवल गणवृन्दविनुत भवभयहर परवर करुणाकर फणिवरभूषण स्मर हर गरधर परिपाहि ॥ ३.९॥

रासभवृषभेभ शरभाननगणगुणनन्दित- त्रिगुणपधातीग शरवणभवनुत तरणिस्थित वरुणालय कृतपारण मुनिशरणायित पदपद्मारुण पिङ्गजटाधर कुरु करुणां शंकर शं कुरु मे ॥ ३.१०॥

जम्भप्रहरण कुम्भोद्भवनुत कुम्भप्रमथ निशुम्भद्युतिहर खण्डद्रणगण डिम्भायितसुर तारकहरसुत कुम्भ्युद्यतपद विन्ध्यस्थितिदितिमान्ध्यप्रहर मुदान्धद्विपवर कृतिप्रवर सुधान्थोनुतपद बुद्ध्यागमशिव मेध्यातिथिवरद ममावन्ध्यं कुरु दिवसं तव पूजनतः परिपाहि शम्भो ॥ ३.११॥

कुन्दसदृश मकरन्दनिभसुरवृन्दविनुत कुरुविन्दमणिगण वृन्दनिभांघ्रिजमन्दर वसदिन्दुमकुट शरदमम्बुजक्यश गरनिन्दनगल सुन्दरगीरितनयाकृति देहवराङ्गबिन्दुकलित शिवलिङ्गगहन सुतसिन्दूरवरमुख बन्धुरवरसिन्धुनदीतट लिङ्गनिवाहवरदिग्वस पाहि शम्भो ॥ ३.१२॥

पन्नगाभरण मारमारण विभूतिभूषण शैलजारमण । आपदुद्धरण यामिनीरमणशेखर सुखद पाहि शम्भो ॥ ३.१३॥

दक्षाध्वरवरशिक्ष प्रभुवर त्र्यक्ष प्रबलमहोक्षस्थित सितवक्षस्स्थ लकुलचक्षुःश्रवस वराक्षस्रज हर । वीक्षानिपाताधोक्षजात्मज वरकक्षाश्रय पुरपक्षविदारण लीक्षायितसुर भिक्षाशन हर पद्माक्षार्चनतुष्ट भगाक्षिहराम्यय शंकर मोक्षप्रद परिपाहि महेश्वर ॥ ३.१४॥

अक्षयफलद शुभाक्ष हराक्षततक्षककर गरभक्ष परिस्फुरदक्ष क्षितिरथ सुरपक्षाव्यय ।