सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय १०
आकाशीय कल्पित रेखाओं का स्पष्टीकरण
जिस प्रकार अक्षांश और देशान्तर से पृथ्वी के किसी स्थान को ठीक स्थिति प्रकट की जाती है उसी प्रकार आकाशीय तारागण आदि की स्थिति ठीक प्रकार से प्रकट करने के लिए आकाशीय अक्षांश और विषुवांश या रेखांश भी होते हैं। आगे इन्हीं को समझाते हैं। आकाशीय अक्षांश को शर और रेखांश को भोग या भोगांश कहते हैं।
आकाशीय विषुव वृत्त Celestial equator
जिस प्रकार पृथ्वी के बीचों-बीच पूर्व-पश्चिम विषुववृत्त (भूमध्यरेखा) गई है उसी प्रकार आकाशीय विषुववृत्त भी है।
पृथ्वी की विषुव रेखा के सीध में प्रत्येक बिन्दु से यदि सीधे आकाश तक रेखा बढ़ाई जावे तो आकाश में भी उसी की सीध में एक कल्पित रेखा बन जायगी। इसी आकाशीय कल्पित रेखा को विषुववृत्त या नाड़ीवृत्त भी कहते हैं। इसे निरक्ष भी कहते हैं अर्थात् यहाँ पर अक्षांश शून्य रहता है।
विषुववृत्त (नाड़ीवृत्त) आकाश के २ समान विभाग करता है। इसका १ भाग उत्तर में और दूसरा भाग दक्षिण में हो जाता है। उत्तर में जो है वह उत्तर गोल और दक्षिण का दक्षिण गोल कहलाता है। ध्यान रहे कि सूर्य इस नाड़ीवृत्त पर से नहीं घूमता, वह क्रांतिवृत्त पर से घूमते दिखता है।
क्रांतिवृत्त Ecliptic
आकाश में जिस मार्ग से सूर्य घूमते हुए दिखता है वही क्रांतिवृत्त है। वास्तव में यही पृथ्वी की कक्षा Orbit है जिस पर से होकर पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। यह मार्ग अण्डाकार है। देखें चित्र संख्या ७।
क्रांति प्रदेश Zodiac
क्रांतिवृत्त के दोनों ओर ९°-९° का एक कल्पित चौड़ा पट्टा है जिसके भीतर सब ही ग्रह घूमते हैं। इस प्रकार १८° के चौड़े पट्टे को क्रांतिप्रदेश कहते हैं। इसके भीतर १२ राशियां और २७ नक्षत्र हैं।
क्रांतिवृत्त का धरातल Plane of ecliptic
क्रांतिवृत्त के जिस धरातल में ग्रह परिक्रमा करते हैं उसे क्रांतिवृत्त का धरातल कहते हैं।
आकाशीय ध्रुव Celestial pole
जिस प्रकार पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुव हैं उसी प्रकार ठीक इन्हीं के सीध में आकाश में आकाशीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव हैं। ये भी कल्पित स्थान हैं।