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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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सम्पात : ५७

यह २१ जून के लगभग होता है जब सूर्य सायन मेघ से चल कर उत्तर गोलयात्रा में वह इस क्रांतिसीमा पर २१ जून के लगभग पहुँच जाता है, उस समय सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर समकोण बनाती हैं। इस समय सूर्य सबसे दूर रहता है और सूर्य के उदय अस्त का घेरा बहुत बड़ा होता है अर्थात् उस दिन, दिन मान सबसे बड़ा होता है। इसी को सायन कर्क संक्रमण कहते हैं। इसके उपरांत सूर्य लौट कर २१ जून के लगभग उत्तर गोलार्द्ध की यात्रा समाप्त कर सायन तुला पर आता है। इस बिन्दु पर पहुँच कर सूर्य दक्षिण की ओर मुड़ता है और सूर्य दक्षिणायन हो जाता है इस कारण ग्रीष्म क्रांति को दक्षिणायन बिन्दु भी कहते हैं।

४. शरदक्रांति—उत्तरायण बिन्दु winlet solstice—यह २१ दिसम्बर को होता है, जब सूर्य विषुवरेखा से बहुत दूरी पर बहुत दक्षिण की ओर रहता है। यह क्रांति वृत्त की दक्षिण सीमा है। लगभग २२ दिसम्बर को जब सूर्य की किरणें मकर रेखा पर समकोण बनाती हैं उस समय सायन मकर संक्रांति होती है। इस समय सूर्य की दक्षिण क्रांति २३°-२८' होती है। उसी दिन सूर्य पूर्व बिन्दु के दक्षिण में प्रायः २५° पर उगता है। उस दिन से सूर्य उत्तर की ओर आने लगता है। उस दिन, रात्रि (रात्रि मान) सबसे बड़ी होती है। इस बिन्दु पर पहुँच कर सूर्य उत्तर की ओर आने लगता है तब उत्तरायण का आरम्भ होता है। इसी कारण इसे उत्तरायण बिन्दु कहते हैं।

अयनबिन्दु आकाश में सदा एक ही जगह नहीं रहते, ये पश्चिम की ओर खिसकते रहते हैं। जिस नक्षत्र के पास आजकल उत्तरायण या दक्षिणायन होता है पुराने समय में उस स्थान में नहीं होता था। आजकल उत्तरायण का आरम्भ मूल के आधे भाग पर और दक्षिणायन का आरम्भ आर्द्रा के आरम्भ में होता है। सूर्य की उत्तर-दक्षिण गति का स्पष्टीकरण

सूर्य जब २१ मार्च को उत्तर सम्पात पर आता है तो दिन रात बराबर होते हैं अर्थात् ६ बजे प्रातः काल ठीक पूर्व में उदय होता है और ठीक पश्चिम दिशा में अस्त होता है। इसके उपरान्त अवलोकन करने तो प्रकट होगा कि सूर्य ठीक पूर्व बिन्दु पर उदय नहीं हो रहा है। वह कुछ उत्तर की ओर बढ़ रहा है। सूर्य इस प्रकार ३ मास तक उत्तर की ओर बढ़ता ही जाता है और २१ जून को विषुव रेखा से सबसे अधिक दूरी पर चला जाता है। उस समय सबसे बड़ा दिन होगा। क्योंकि सूर्य इस समय सबसे दूर हो जाता है और पूर्व में बहुत दूर हट कर उत्तर की उदय होगा। पूर्व और उत्तर के बीच का जो अन्तर है उस अन्तर का लगभग ३ भाग सूर्य उत्तर को चला जाता है। यही क्रांतिसीमा है। उस समय सूर्य पश्चिम में क्रांतिसीमा पर ही दृढ़ता दिखाएगा।

इसके उपरान्त सूर्य विषुवरेखा की ओर आने लगता है और २१ सितम्बर को फिर विषुववृत्त पर आ जाता है और उसी प्रकार उदय अस्त होगा जैसे २१ मार्च को होता है। उस समय दिन रात बराबर होती है। क्रांति सीमा से विषुववृत्त में