सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१६२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
८--स्त्री द्वारा या मृत्युलेख से लाभ, किसी ८--अविचारी काम में प्रवृत्त ओर उससे का ट्रस्टी होकर लाभ, स्त्रीनिधन प्राप्त । लाभ विषैले जीवों से भय विशेष पीड़ा । भाग्य अनुकूल, अनेक प्रकार के सुख ९--भाग्योदय में अड्चन, महत्वाकांक्षा में धर्माचरण में प्रेम, बड़ों की कृपा । कठिनाई, परदेश में भाग्योदय १ १०-सत्कर्मा, सत्याग्रही, उद्योग व्यापार में १०-पितृक्लेश, अहितकारी कार्य में प्रवेश मान, कुलकोति का विस्तार, समाज में कीति। उच्च स्थित से नीची स्थिति, समाज
विरोधी कार्ये । ११-साम्पत्तिक भोग, प्रबल उद्योग व्यापार ११-अकतंव्यों से भी लाभ उठाने वाले या नोकरी में सफलता, साहसी,
मित्रों में सफलता ।
१२-सत्कार में व्यय, परमार्थ की ओर ध्यान, शत्रु वृद्धि, अधिकार में
विघ्नं । संक्षिप्त गोचर फल का चक्र स्थान सूयं चंद्र १--यात्रा, रोग भाग्योदय, सुख, थकावट लाभ, श्रेष्ठ
अन्न प्राप्त २--भय दुःख धोखा घन हानि थोड़, धन हानि लाभ संतोष
सुख ३--धन प्राप्ति सफलता, धन
स्थान प्राप्ति लाभ सुख, सुख यात्रा ४---रोग, विध्न, कुक्षि में रोग,
व्यशन, खचं, कलह,
चिता भय
५-दीनता, क्षोभ, शोक, विध्न, बुरा स्वास्थ्य, वृद्धि मान यश
संतान कष्ट, खर्च
दन शत्रु नाश, सुख लाभ, शत्रु नाश, दुःख और रोग दूर, उत्तम चिता दूर सम्पत्ति छ-यात्रा, स्त्रीपीड़ा, घन लाभ,सुख, पेट व गुदा में रोग, राज-मान्यता
अधिकारियों की कृपा, वड़े भाई को
अनिष्ट, बंधु कलह ।
१२-द्रव्य सम्वन्धी हानि, अपमान, दुष्कीति, ऋणग्रस्त स्थिति,अधिकारी
प्रतिकूल,राजदण्ड |
मंगल बुध
रोग भय, कष्ट बन्धनकष्ट
वियोग धनहानि
चोर भय धन- धन लाभ,
हानि, नेत्र- सुख
पीड़ा, चिता
घन लाभ,कायं शत्रु भय सफल सुख पराक्रम
शत्रु वृद्धि, स्थान- धन वृद्धि
हानि, उदर रोग, सुख लाभ
भय, मातृ कष्ट
ज्ञान धन हानि, पीड़ा, कलह चिता, झगड़ा, बुद्धि वृद्धि ज्वर, भय
घन लाभ, सफलता शोक, शत्रु व शत्रुनाश सुख रोग शत्रु रोगसे पीड़ा भय व झगड़ा अन्त
धननाश, रोग, कष्ट पीड़ा, भय, हानि, मनो-मालिन्य विरोध,छाभ