भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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आयुर्दाय विचार : २१७

अल्पायु ३३-शनि ३ पाप ग्रहों से युक्त हो और शुक्र गुरु के योग से रहित हो तो आयु

और पुण्य क्षीण हो ( जा० सं० )।

३४-अष्टमेश पाप ग्रह होकर लाभ स्थान में हो ( जा० लं० )।

३५-अष्टमेश पाप ग्रह होकर अष्टम में हो ( जा० लं० ) ।

३६-कुंडली में लग्न, लग्नेश, सूर्य व चन्द्र निर्वेल हो पाप ग्रह से पीडित हो तो

आयु क्षीण होती है ( वाल बोध ज्यो० ) ।

३७-अष्टमेश लग्न से सप्तम में हो ।

३८-लग्नेश व्यय में हो, तृतीय भाव, तृतीयेश, अष्टम भाव या अष्टमेश पाप ग्रह

से दुष्ट हो ।

३९-लग्न से चन्द्र ६-८-१२ भाव में हो पाप ग्रह ८-१२ घर में हो ।

४०-६-८-१२ भाव में गुरु युक्त चन्द्र हो ।

४१-पफ्रेन्द्र त्रिकोण में पाप ग्रह वलवान्‌ हो लग्नेश बलहीन हो ।

४२-पाप ग्रह युक्त चतुर्थेश और पंचमेश दशम में हो ।

४३-अष्टमेश केतु युक्त लग्न में हो ।

४४-अष्टमेश सप्तमेश युक्त पंचम घर में हो राहु से दृष्ट हो ।

४५-कुंडली में किसी की पूर्णायु या मध्यायु योग हो तो अल्पायु योग नष्ट हो

जाता है ( ज्यो० रहस्य ) ।

४६-शुक्र गुरु दोनों धन स्थान में, पंचम में मंगल और शनि हो चन्द्रमा वल

हीन हो तो अल्पायु हो। मतांतर--गुरु शुक्र लग्न में, पापग्रह युक्त

मंगल पंचम में हो ।

४७-लगन में लग्नेश और सूयं चन्द्र हो किसी शुभाशुभ गूह से युक्त या दुष्ट हो।

४८-लग्न में पाप ग्रह हो किसी राशि का चन्द्र पाप युक्त सप्तम में शुभ ग्रह

की दृष्टि रहित हो ।

४९-लग्न से व्यय भाव में क्षीण चन्द्र हो, लग्न पापग्रह युक्त हो, लग्न व

अष्टम स्थान में कोई शुभ ग्रह न हो ।

५०-लग्न से चन्द्र ६-८ घर में पाप ग्रह से दृष्ट, शुभ ग्रह से अदुष्ट हो ।

५१-लग्न में क्षीण चन्द्र हो अष्टम घर व केन्र में पाप ग्रह हो ।

५२-चन्द्र ४, ७, ८ स्थान में कहीं हो पाप ग्रह उसके आगे पीछे हो ।

५३-चंद्र कोई राशि में कहीं हो पर अंत नवांश में हो शुभ ग्रह की दृष्टि न

हो, पाप ग्रह नवम पंचम स्थान में हो ।

५४-ऊग्न में चंद्र व सप्तम में पाप ग्रह हो ।

५५-लग्न रों सूर्यं और चंद्र हो पाप ग्रह ९-५ या ८ घर में हो शुभ ग्रह की

उस पर दृष्टि न हो ।

५६-रूग्न से बारहवें घर में शनि, चवम में सूर्य, लग्न में चन्द्र, अष्टम में

मंगल बलवान्‌ हो उस पर गुरु की दृष्टि न हो ।