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भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 392, कुल 454 में से

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३८२ : सचि ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

दशमेश के योग

४६४--दशमेश नवम में नवमेश दशम में हो तो राजा हो अपने जनों से मान

पावे (फल०) ।

४६५--दशमेश केन्द्र त्रिकोण या धन भाव में हो तो राज सिंहासन में बैठने

वाळा विख्यात कीति हाथियों से परिपूर्ण हो (जा० स०) ।

४६६--दशमेश केन्द्र में हो शुभ ग्रहों से युक्त दृष्ट हो शुभ षष्ठ्यंश में होवे तो

वह सौम्य आज्ञां देने वाला अधिकारी हो (स० चिं०) ।

४६७- केन्द्र में दशमेश शुभ युक्त या दृष्ट हो और क्रूर षष्ठ्यांश में हो तो

कठोर आज्ञा देने वाला हो (स०'चिं०) ।

४६८--दशमेश शुभ हो शुभ युक्त या दृष्ट होकर शुभ नवांश में हो तो दूसरों

को हुक्म देने वाला हो (स० चिं०) ।

४६९--दशमेश अष्टम में उच्च स्व राशि व मित्र नवांश का या पारावतांश में

होवे तो राज योग होता है (स० चिं०) ।

४७०--दशमेश उच्च या मित्र नवांश में होकर नवम घर में हो और पाराव-

'तांश में हो तो राजाओं के बीच मुखिया हो (स. चिं.) ।

४७१--दशमेश उच्च का होकर लग्न. को देखता हो तो राज योग होता है

(वृ० पा०) । ४७२--दशमेश पाप युक्त हो ओर लग्न से-६ भाव तक क्रम से ग्रह हों तो

राजेश्वर हो (स० चि०) ।

४७३--दशमेश से पहिले ६ घर में सब ग्रह हों ये लग्न से ६ घर में हों तो

राजाओं का राजा हो ( स० चि० ) अर्थात्‌ लग्न से ६ घर के भीतर दशमेश कहीं हो

और उससे ६ घर के भीतर से ग्रह हो तब यह योग होगा । लग्न में दशमेश हो और

सब ग्रह उससे ६ घर के भीतर हों तभी यह वनता है।

लाभेश के योग

४७४ छाभेश लाभ में हो पाप ग्रह से अदृष्ट हो या आत्म कारक केवल शुभ

ग्रह से युक्त हो तो राजा से घन प्राप्त हो ( वृ० पा० ) ।

४७५ छाभेशे की दृष्टि लाभ पर हो दशम भाव में पाप ग्रह का योग दृष्टि न

हो तो राजमंत्री हो ( वृ० पा० ) ।

लग्न के योग

४७६-छग्न उत्तमांश में हो और चन्द्र को छोड़कर अन्य ४ या अधिक ग्रहों से

दृष्ट हो तो राजा हो ( वु० पा० ) ।

४७७--लग्न पर सब ग्रहों की दृष्टि हो जो सब प्रकार शुद्ध हों तो बड़े-बड़े

राजा कोश रत्नों की भेंट करे, निर्भय हो, राजाओं का मुकुटमणि हो ( मान० ) ।

४७८--छर्न को सब बली ग्रह देखते हों तो भय रहित दीर्घायु सुखी घनयुक्त

राजा हो ( वू० पा० )।