भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२९० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

खोटे आचरण को स्त्री से भोग करने वाला, बडा बकवादी, अनेक व्यसनो में आसक्त,

गाने बजाने के समय और पाप युक्त होता है । झूठ बोलने वाला (जा० qo) (मान०) ।

वृष के बुध सदृश फल (qo जा०) 1

८-बुध वृश्चिका का--कृपण स्त्रियों के साथ भोग में आसक्त, श्रेष्ठ कर्म और सुख

से होन, हानि और आलस्य युक्त, गुणों में दोष देने वाला, कृपण (जा० wo) (मान०)।

मेष के बुघ सदृश फल (qo जा०) ।

९-बुघ घनु का--दानो, धनी, कला कुशल, कुछ पालक, कमाई हुई श्रेष्ठ लक्ष्मी

युक्त, भाग्यशाली, योग्य स्त्रियों के साथ रमण करने वाला (जा० भ०) (मान०) । राज

पूजित, या राज बल्लभ, विद्वान्‌, व्यवहार जानने वाला, समय के अनुकूल बोलने घाला

० जा०) । 31 मकर का- शत्रु के भय से युक्त, दृष्ट बुद्धि, काम कला रहित, दूसरों का

काम करने वाला अर्थात्‌ नोकर, व्यसनी, नम्र स्वभाव (मान०) (जा० भ०) शनि क्षेत्री

(१०-११ राशि का)--पराया काम करने वाला, दरिद्री, शिल्प कर्म करने वाला, कुणी,

पराई आशा पर रहने बाला (वु० जा०) ।

११-वुध कुम्भ का--घर में कलह हो, दीनता, हल्कापन, घन, पराक्रम सर घम से

होन, दुष्ट बुद्धि, शत्रु दारा ताप ( मान० ) ( जा० भ० ) । मकर के बुध समान फल

(बु? जा०) ।

१२-बुघ मीन का--दूसरे के घन आदि का रक्षक, देव ब्राह्मण का गनुझर, श्रेष्ठ

स्त्रियों के सुख का दर्शक ( मान० ) ( जा० भ० ) । पराई सेवा में तत्पर, उसके सेवक

जीते हुए रहें, पराया अभिप्राय जानने बाला, नीच, शिल्यी (या सेवक से पराजित )

(qo जा०) ।

गुरु का राशि फल

१-गुरु मेष का--अति उदार, उत्तम कर्म करने वाला, अघिक्र शत्रुओं वाला, अति

वैभव युक्त, मति पूर्वक काम करने वाला, प्रारब्धवान्‌, बडो बुद्धि (जा० wo) (मान०)

भौम क्षेत्री (६-८ राशि का)--सेनापति, घनाढय, बहुत स्त्री युक्त, दाता, अच्छे भूत्य,

क्षमावान्‌, तेजस्वी, गुणवतो स्तरा से युक्त, प्राख्यात कोति (qo जा०) ।

« २-गुरु वृष का--देव ब्राह्मण पुजक, ऐश्वयंवान्‌, घन वाहून ओर गौरव युक्त,

“अधिक शत्रु हों, पराक्रम से शत्रुओं को हराने वाला ( मान० ) (जा० भ०) गुक्र क्षेत्री

(२-७ राशि का)--स्वस्थ देह, सुखो, घन,१मित्रों से युक्त, सत्पुत्र वाला, उदार, सबका

प्यारा (व्‌० जा०) ।

३-गुरु मिथुन का--क्रषि, प्रिय बोलने वाला, पवित्र, निर्मळ स्वभाव में रुचि,निपुण,

अनेक मित्र (मान०) (जा० qo) । बुध क्षेत्रो (३-६ राशि का)--घर परिवार बहुत,

पुत्र और मित्र बहुत, सुख युक्त, मन्त्री हो (बु० जा०) ।

४-गुरु कक का--अनेक घन युक्त, कामदेव के मद से मत्त, अनेक शास्त्र ब कलाओं