भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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दिन प्रवेश का संक्षिप्त फल : २१५

अष्टम भाव का नवांशेश अष्टम भावस्थ ग्रह से युबत या दृष्ट हो तो युद्ध में

मरण हो । यदि पाप और शुभ दोनों से युक्त या दृष्ट हो तो मिश्रफल होगा । यदि

पाप ग्रहों से युक्त हो तो सुख हो, शेष वर्ष लर्न के अनुसार समझना ।

दुसरे और बारहवें स्थान में पाप ग्रह हो तो हानि होती है। धन स्थान में शुभ

ग्रह हो तो घन लाभ, व्यय स्थान में शुभ ग्रह हो तो शुभ काम में व्यय होता है ।

यदि लग्न में पाप ग्रहों की कतंरी हो तो रोगादि दुःख हो । शुभ ग्रहों की कर्तरी हो

तो शुभ फल होता है ।

पापग्रह से युक्त दृष्ट क्षीण चन्द्रमा लग्न या अष्टम स्थान में हो तो मरण हो ।

यदि अन्य उत्तम योग हो और आयु हो तो रोग व शत्रु से शस्त्र भय या बन्धन हो।

चन्द्रमा मंगल युक्त ६ या ८ स्थान में हो तो शस्त्र से या पशु व्याघ्रादि से भय

हो । यदि चतुथं स्थान में पाप ग्रह हो तो वाहन से पतन होवे और शरीर में बहुत

पीड़ा हो ।

शुभ ग्रह सप्तम में हो तो जय जुआ में धन लाभ और सुख हो । नवम स्थान

में शुभ ग्रह हो तो धन, ऐश्वयं राज सम्मान और कीति प्राप्त हो, इसके अतिरिक्‍त

भास कुंडली फर देखने की बातें दिन प्रवेश फल में भी विचारना। `

६-०-१२ भाव के स्वामी के सम्बन्ध से भी विचारना कि ये जिस भाव में होंगे

उसकी हानि करेंगे । दिनेश का भावेश से सम्बन्ध और दिन लग्नेश की स्थिति और

दिन लग्नेश का कार्येश से सम्बन्ध पर भी विचारना ।

दिन प्रवेश काल में चन्द्र अवस्था का फल

दिन प्रवेश में चन्द्र जिस प्रकार की अवस्था में होवे उसी अवस्था के तुल्य फल

देता है।

मास प्रवेश में भी इसका विचार करना ।

चन्द्र की अवस्था जानना

चन्द्र स्पष्ट लेकर राशि को छोड़कर केवल अंशादि लेकर २ से गुणा कर ५ का

भाग देना, लब्धि अवस्था गत हुई उसके आगे की वर्तमान अवस्था हुई। उदाहरण￾चन्द्र ४ रा०-८०-५/-६” । यहाँ राशि के ४ छोड़कर शेष अंश ८९-४/-६” 2८ २=१६-

१०-११-४५ लब्धि ३ गत अवस्था हुई चोथी वर्तमान अवस्था हुई। ३०० में १२

अवस्थो तो इष्ट अंश में=१२-+ ३०=६्‌=% २-+ ५ अवस्था के नाम और फल ये हैं ।

नाम फल

(१) प्रवास प्रवास (यात्रा) (७) क्रीड़ित-सुख लाभ

(२) नाश= घन नाश (८) सुप्त-निद्रा, कलह, पीड़ा,

(३) मरण= मृत्यु भय (९) भुक्ति=भय

(४) जय= विजय (१०) ज्वराख्य-संताप

(५) हास्यः स्त्रियों से विलास (११) कंपिता=धनहानि

(६) रति= . प्रसन्नता, स्त्री संग (१२) सुस्िरता=सुख