भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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२२४ श्रीसाम्बपुराणम्

मुनिगण कहते हैं—हे महातेजस्वी! यदि आप प्रसन्न हैं और वर देना चाहते हैं तब हे देवेश! आपकी कृपा से हम इस जगत् के सृष्टिकर्त्ता हो जायें॥२४॥

वशिष्ठ उवाच तत्प्रसन्नो महातेजाः पुनर्वचनमब्रवीत्। एवं भवतु भूयोऽपि प्रजासर्गं प्रकल्प्यथ॥२५॥ अन्यच्छृणुत वक्ष्यामि कीर्त्तिकारणहेतुना। इदं तपोवनं रम्यं यदा स्थानमनुत्तमम्॥२६॥

वशिष्ठदेव कहते हैं—उनके प्रति सन्तुष्ट होकर महातेजस्वी सूर्यदेव पुनः कहते हैं—ऐसा ही हो। तुम प्रजासृष्टि करो। और भी सुनो, यह कीर्ति का हेतु होगा। यह स्थान अतुलनीय रम्य तपोवन होगा॥२५-२६॥

श्रुत्वा तु निर्मलं वाक्यं ते वै प्राहुर्दिवाकरम्। त्वत्प्रसादेन चास्माकं देव यत्प्रीतिकारकम्॥२७॥ कीर्त्यर्थं प्रतिलप्स्यामो रोचयस्व दिवाकर। इदं स्थानं समासाद्य वयं तीर्णाः सुरप्रभो॥२८॥ प्रजानां च हितार्थाय ममैवानुग्रहाय च। अत्र कीर्तिं करिष्यामः प्रसादात्तव भास्करः॥२९॥

यह सुनिर्मल बात सुनकर मुनिगण पुनः दिवाकर देव से कहते हैं—हे देव! आपकी कृपा से हमारे लिये जो कीर्तिकर है, उसे हमने प्राप्त किया। हे दिवाकर! आप प्रकाशित हो जायें। हे देवताओं के स्वामी! इस स्थान को प्राप्त करके हम उत्तीर्ण होंगे। प्रजागण के कल्याण के लिये यह हम पर अनुग्रह का निमित्त है। हे भास्कर! आपकी कृपा से हम कीर्त्ति प्राप्त करेंगे॥२७-२९॥

देव उवाच दत्वा यूयं मम स्थानं सप्तद्वीपेषु दुर्लभम्। मन्वन्तरमथैकं च कीर्त्तिमन्तो भविष्यथ॥३०॥ मन्त्रसिद्धास्तु ये चान्ये मुनयश्च सुरोत्तमाः। मम स्थानरताः सर्वे तेनोर्ध्वं नैव भाषितम्॥३१॥

सूर्यदेव कहते हैं—सप्त द्वीपों के मध्य मेरे इस दुर्लभ स्थान को दान करके तुम एक मन्वन्तर-पर्यन्त कीर्तिमान रहोगे। अन्य जो मन्त्रसिद्ध मुनिगण तथा देवश्रेष्ठ लोग हैं, वे मेरे इस स्थान की सेवा करके ऊर्ध्वलोकों में गमन करेंगे। इस विषय में और कुछ नहीं कहना है॥३०-३१॥