भारतकोश
साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

साम्ब पुराण (श्री एस. एन. खण्डेलवाल हिन्दी व्याख्या सहित)

Samba Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास (व्याख्याकार: श्री एस. एन. खण्डेलवाल) द्वारा

स्रोत: Sri Samba Purana with Hindi Commentary by Sri S. N. Khandelwal (उद्गम)

DevanagariHindipublished424 पृष्ठ

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एकषष्टितमोऽध्यायः ३३७

‘भ’ आदि, ओकारान्त ‘व’, दादि भ, स्वरयुक्त ‘व’, शकार, रेफान्त ‘व’ तथा द्विरकारान्त ‘त’। ऊकार युक्त ‘स’ एवं रेफान्त ‘ष’, रेफ के पश्चात् दीर्घयुक्त। दीर्घान्त इस शुक्ल बिन्दु के द्वारा दीपित है॥४८-४९॥

क च ट त प य शा इतरेतरव्योम अयमुपरिष्टात्। भ ॐ थ अदव अर अस अरव उभ अत उस अश्व अपर अद अस आरव अस षोडशत्वं भवोद्भवसर्वभूत-सुखप्रदसर्वसाध्यसिद्धः। एकोनविंशतिः प्रधिः।

क च ट त प य श इतरेतर हैं। इसके ऊपर है—व्योम। ‘भ ॐ थ’ से लेकर ‘अस आरव अस’ पर्यन्त षोडशत्व है। समस्त प्राणीगण का उद्भव, सर्व सुखप्रद तथा सकल साध्य का सिद्ध है। यह है उन्नीस प्रधि।

चरेद्व्रतं सुसिद्ध्यर्थं यथा वक्ष्यामि तन्त्रजम्।
प्राणायामसहस्रं तु बीजतत्त्वेन धारयेत् ॥५०॥

सम्यक् सिद्धि-हेतु अन्य व्रत का आचरण करे, जैसे मैं तन्त्र से कहूँगा। सहस्र प्राणायाम बीजतत्त्व के द्वारा धारण करे॥५०॥

पञ्चाग्निभिः शिवैरङ्गैः स्याद्हुतोऽनिलभक्षणः।
त्र्यहं त्र्यहं त्रिकं प्यस्तं जपेत्तापे जले क्रमात् ॥५१॥

पञ्चाग्नि (चारो ओर प्रज्ज्वलित अग्निकुण्ड हो तथा माथा के ऊपर तप्त सूर्य हो) साधन रूप मंगलमय अंग द्वारा वृत होकर वायु-भक्षण करके तीन दिन पञ्चाग्नि साधन करे तथा तीन दिन जल में जप करे॥५१॥

गुर्वाज्ञया भस्मसुप्स्यान्तर्धर्माहं पदमस्तके।
भुञ्जीताथोचितं भक्ष्यं योगस्यास्य सदा विधिः ॥५२॥

गुरुदेव के आदेश को लेकर भस्म लगाकर भस्म तथा (जल में ?) अन्तर्धर्मा होकर अहं पद मस्तक में रखकर यथोचित भोजन करे। यह इस योग की सर्वदा की विधि है॥५२॥

चरित्वैतद्व्रतं पुण्यं मुच्यते सर्वपातकैः।
पूज्यते सर्वसिद्धैश्च ज्ञानं चास्य प्रवर्तते ॥५३॥
ये भवन्ति हि वै दोषाः साधने दिव्यमानुषाः।
शरीरजास्तथा रागा नश्यन्ति तेन वै ध्रुवम् ॥५४॥
भूतव्रतान्तसिद्ध्यर्थमेकान्ते तु मनोरमे।
आत्मतुल्यसहायः स्याद्बीजनिर्दग्धकल्मषः ॥५५॥

इस पुण्य व्रत का आचरण करके सब पापों से मुक्ति मिलती है और समस्त सिद्धि के साथ पूजा होती है तथा ज्ञान भी प्रवर्तित होता है। साधन में जो दैव, मनुष्य, शरीरजात

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