सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंफिर काटना पड़ता है, उतने हिस्से को शरीर से निकालना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में एक औषधि है, जो गैंग्रीन को भी ठीक करती है और अस्थिमज्जा का प्रदाह को भी ठीक करती है।
गैंग्रीन माने अंग का सड़ जाना, जहाँ पर नए कोशिका विकसित नहीं होते। ना तो मांस में और ना ही हड्डी में और सब पुराने कोशिका मरते चले जाते हैं। इसी को एक छोटा भाई हैं ओस्टोमएलइटिसइस (अस्थिमज्जा का प्रदाह) में भी कोशिका कभी पुनर्जीवित नहीं होते, जिस हिस्से में होता है वहाँ बहुत बड़ा घाव हो जाता है और वो ऐसा सड़ता है कि डॉक्टर कहता है कि इसको काट के ही निकालना है और कोई दूसरा उपाय नहीं है। ऐसे परिस्थिति में जहाँ शरीर का कोई अंग काटना पड़ जाता हो या पड़ने की संभावना हो, घाव बहुत हो गया हो उसके लिए आप एक औषधि अपने घर में तैयार कर सकते हैं।
औषधि है देशी गाय का मूत्र (सती के आठ परत कपड़ों में छान कर) , हल्दी और गेंदे का फूल। गेंदे के फूल की पीली या नारंगी पंखड़ियाँ निकालना है, फिर उसमें हल्दी डालकर गाय मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है। अब चोट कितना बड़ा है उसकी साइज के हिसाब से गेंदे के फूल की संख्या तय होगी, माने चोट छोटे भाग में है तो एक फूल, बड़े हैं तो दो, तीन, या चार अंदाजे से लेना है, इसकी चटनी बनाकर इस चटनी को लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल रहा है और ठीक नहीं हो रहा। कितनी भी दवा खा रहे हैं पर ठीक नहीं हो रहा, ठीक ना होने का एक कारण तो है डायबिटीज दूसरा कोई जिनगत कारण भी हो सकते हैं। इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है जैसे सुबह लगाकर उसके ऊपर रूई पट्टी बांध दीजिए ताकि उसका असर बाँड़ी पर रहे और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना पड़ेगा, इसको गोमूत्र से ही धोना है डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करें। धोने के बाद फिर से चटनी लगा दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिए।
यह इतना प्रभावशाली है कि आप सोच नहीं सकते, चमत्कार जैसा लगेगा। इस औषधि को हमेशा ताजा बनाकर लगाना है। किसी का भी जख्म किसी भी औषधि से ठीक नहीं हो रहा है तो ये लगाइए। जो
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