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सम्पूर्ण चिकित्सा

Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

फिर काटना पड़ता है, उतने हिस्से को शरीर से निकालना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में एक औषधि है, जो गैंग्रीन को भी ठीक करती है और अस्थिमज्जा का प्रदाह को भी ठीक करती है।

गैंग्रीन माने अंग का सड़ जाना, जहाँ पर नए कोशिका विकसित नहीं होते। ना तो मांस में और ना ही हड्डी में और सब पुराने कोशिका मरते चले जाते हैं। इसी को एक छोटा भाई हैं ओस्टोमएलइटिसइस (अस्थिमज्जा का प्रदाह) में भी कोशिका कभी पुनर्जीवित नहीं होते, जिस हिस्से में होता है वहाँ बहुत बड़ा घाव हो जाता है और वो ऐसा सड़ता है कि डॉक्टर कहता है कि इसको काट के ही निकालना है और कोई दूसरा उपाय नहीं है। ऐसे परिस्थिति में जहाँ शरीर का कोई अंग काटना पड़ जाता हो या पड़ने की संभावना हो, घाव बहुत हो गया हो उसके लिए आप एक औषधि अपने घर में तैयार कर सकते हैं।

औषधि है देशी गाय का मूत्र (सती के आठ परत कपड़ों में छान कर) , हल्दी और गेंदे का फूल। गेंदे के फूल की पीली या नारंगी पंखड़ियाँ निकालना है, फिर उसमें हल्दी डालकर गाय मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है। अब चोट कितना बड़ा है उसकी साइज के हिसाब से गेंदे के फूल की संख्या तय होगी, माने चोट छोटे भाग में है तो एक फूल, बड़े हैं तो दो, तीन, या चार अंदाजे से लेना है, इसकी चटनी बनाकर इस चटनी को लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल रहा है और ठीक नहीं हो रहा। कितनी भी दवा खा रहे हैं पर ठीक नहीं हो रहा, ठीक ना होने का एक कारण तो है डायबिटीज दूसरा कोई जिनगत कारण भी हो सकते हैं। इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है जैसे सुबह लगाकर उसके ऊपर रूई पट्टी बांध दीजिए ताकि उसका असर बाँड़ी पर रहे और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना पड़ेगा, इसको गोमूत्र से ही धोना है डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करें। धोने के बाद फिर से चटनी लगा दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिए।

यह इतना प्रभावशाली है कि आप सोच नहीं सकते, चमत्कार जैसा लगेगा। इस औषधि को हमेशा ताजा बनाकर लगाना है। किसी का भी जख्म किसी भी औषधि से ठीक नहीं हो रहा है तो ये लगाइए। जो

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सोराइसिस गिला हैं जिसमें खून भी निकलता है, पस भी निकलता है उसको यह औषधि पूर्णरूप से ठीक कर देता है। अक्सर यह एक्सीडेंट के केस में खूब प्रयोग होता है। क्योंकि ये लगाते ही खून बंद हो जाता है। आपरेशन का कोई भी घाव के लिए भी यह सबसे अच्छा औषधि है। गीला एक्जीमा में यह औषधि बहुत काम करता है, जले हुए जख्म में भी काम करता है।

चूना खाने के फायदे

भारत के जो लोग चूने से पान खाते हैं, बहुत होशियार लोग हैं, पर तंबाकू नहीं खाना, तम्बाकू जहर हैं और चूना अमृत हैं, तो चूना खाइए, तम्बाकू मत खाइए और पान खाइए चूने का उसमें कल्था मत लगाइए, कल्था कैसर करता है, पान में सुपारी मत डालिए सोंट डालिए, उसमें इलाइची, लौंग, केसर डालिए।

महिलाओं के लिए गर्भाशय की बीमारियों में यह बहुत अच्छा काम करता है जैसे कि सफेद पानी आना, लाल पानी आना, माहवारी आगे-पीछे होना, गर्भाशय में गांठ बन जाना तथा अन्य सभी गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों को चूना ठीक करता है। बाल टूटना, चेहरे के मुहांसे, हड्डी के टूटने पर, जोड़ों के दर्द में, हीमोग्लोबिन का प्रतिशत कम हो तो, हैपेटाईटिस A,B,C,D,E स्मरण शक्ति कम हो तो, हाथी पैर हो गया तो इन सब बीमारियों में चूना दही में अथवा पानी में मिला कर लेना चाहिए। पुरुषों में शुक्राणु बढ़ाने के लिए चूना गन्ने या संतरे या मौसमी के रस में लेना चाहिए। 14 साल से कम आयु के बच्चे जिनका कद छोटा हो, महिलाएं जिनमें वक्ष का कम विकास हो, दांतों की किसी भी तरह की समस्या, इन सबमें चूनेका सेवन करना लाभदायक है। मात्रा – एक गेहूँ के दाने बराबर दिन में एक बार जोड़ों का दर्द यदि बहुत पुराना हो भले 20 से 30 साल पुराना हो या जब डॉक्टर कहे कि घुटने बलदने पड़ेंगे उस समय चूना काम नहीं करेगा। उसको चूने की जगह हारश्रृंगार के पत्तों का काढ़ा देना पड़ेगा। इस पेड़ के 7-8 पत्तों को बारीक पीस कर चटनी जैसा बनाकर एक गिलास पानी में उबालें, आधा गिलास रह जाने

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पर सुबह खाली पेट पी लें। तीन महीने में यह समस्या बिल्कुल ठीक हो जायेगी। किसी तरह का बुखार होने की स्थिति में भी यह काढ़ा काम करता है। उस स्थिति में 7-8 दिन ही देना हैं।

बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अच्छी दवा है चूना। और हमारे घर में जो माताएं हैं जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी हैं और उनका मासिक धर्म बंद हुआ , उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना।

जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है और चूना कैल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है। गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिए तो चार फायदे होंगे -

पहला फायदा होगा की माँ को बच्चे के जन्म के समय कोई तकलीफ नहीं होगी और नॉर्मल डिलीवरी होगी, दूसरा यह है कि जब बच्चा पैदा होगा वो बहुत हस्ट-पुष्ट और तंदरूस्त होगा, तीसरा फायदा - वो बच्चा जिन्दगी में जल्दी से बीमार नहीं पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया है, चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत इंटेलीजेंट होता है, उसका IQ बहुत अच्छा होता है।

चूना घुटने का दर्द ठीक करता है, कमर का दर्द ठीक करता है, कंधे का दर्द ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis , वो चूने से ठीक होता है, कई बार हमारे रीढ़ की हड्डी में जो मनके होते है उसमें दूरी बढ़ जाती है, ये चूने से ठीक हो जाता है। अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है। चूना खाइए सुबह को खाली पेट।

यदि मुँह में ठंडा गर्म पानी लगता है तो चूना खाओ बिल्कुल ठीक हो जाता है, मुँह में अगर छाले हो गए हैं तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है। शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरूर लेना चाहिए, अनीमिया है खून की कमी है, उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना, चूना

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पीते रहो गन्ने के रस में, या संतरे के रस में, नहीं तो सबसे अच्छा है अनार के रस में – अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढ़ता है। एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट।

राजीव भाई कहते हैं कि चूना खाइए पर चूना लगाइए मत किसी को भी॥

हृदय ब्लॉक का आयुर्वेदिक इलाज

दोस्तो अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनियां जो दवाइयां भारत में बेच रही हैं। वो अमेरिका में 20-20 साल से बंद हैं। आपको जो अमेरिका की सबसे खतरनाक दवा दी जा रही है। वो आज कल दिल के रोगी को सबसे ज्यादा दी जा रही हैं। भगवान ना करे कि आपको कभी जिंदगी में दिल का दौरा आए। लेकिन अगर आ गया तो आप जाएंगे डाक्टर के पास।

आपको मालूम ही है एक एंजियोप्लास्टी आपरेशन होता है, एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन में डॉक्टर दिल की नली में एक स्प्रिंग डालते हैं। उसको स्टेंट कहते हैं, और ये स्टेंट अमेरिका से आता है और इसका Cost of Production सिर्फ 3 डालर का है, और यहाँ लाकर वो 3 से 5 लाख रुपये में बेचते हैं और ऐसे लूटते हैं आपको।

और एक बार अटैक में एक स्टेंट डालेंगे। दूसरी बार दूसरा डालेंगे, डॉक्टर को कमीशन भी है, इसलिए वे बार बार कहता है एंजियोप्लास्टी करवाओ। इस लिए कभी मत करवाए।

तो फिर आप बोलेंगे हम क्या करें???

आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करें, बहुत ही सरल है। पहले आप एक बात जान लीजिए। एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता। क्योंकि डॉक्टर जो स्प्रिंग दिल की नली में डालता है, वो स्प्रिंग बिल्कुल चमद के स्प्रिंग की तरह होता है और कुछ दिन उस स्प्रिंग की दोनो साइड आगे और पीछे फिर ब्लॉकिंग जमा होनी शुरू हो जाएगी। और फिर दूसरा अटैक आता है और डॉक्टर आपको फिर कहता है।

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एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन करवाओ, और इस तरह आपको लाखो रूपये लूटता है और आपकी जिन्दगी इसी में निकल जाती है।

हमारे देश भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुए थे उनका नाम था महाऋषि वागभट्ट जी।

वे कहते हैं कि कभी भी हृदय घात हो रहा है, मतलब दिल की नलियों में ब्लॉकिज होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त(ब्लाड) में एसिडिटी(अम्लता) बढ़ी हुई है।

अम्लता दो तरह की होती है, एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त की अम्लता।

आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है, तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही है, खट्टी-खट्टी डकार आ रही है। मुहँ से पानी निकल रहा है, और अगर ये अम्लता और बढ़ जाये तो हाइपर एसिडिटी होगी, और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता (ब्लाड एसिडिटी) होती है।

और जब ब्लाड में एसिडिटी बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियों में से निकल नहीं पाता, और नलियों में ब्लॉकिज कर देता है। तभी दिल का दौरा होता है। इसके बिना दिल का दौरा नहीं होता। और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डॉक्टर आपको बताता नहीं, क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है।

वागभट्ट जी लिखते हैं कि जब रक्त (ब्लाड) में अम्लता (एसिडिटी) बढ़ गई है। तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं। आप जानते है दो तरह की चीजे होती हैं।

अम्लीय और क्षारीय (एसिड और एल्काइन)

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो न्यूट्रल(उदासीन) होती है सब जानते हैं।

तो वागभट्ट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(एल्काइन) चीजे खाओ। तो रक्त की अम्लता (एसिडिटी) न्यूट्रल

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(उदासीन) हो जाएगी और रक्त में अम्लता न्यूट्रल(उदासीन) हो गई, तो दिल का दौरा की जिंदगी में कभी संभावना ही नहीं। ये है सारी कहानी।

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय है और हम खाये...

आपके रसोई घर में सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं, जिन्हें आप खाये तो कभी दिल का दौरा ना आए, और अगर आ गया हैं तो दुबारा ना आए।

सबसे ज्यादा आपके घर में क्षारीय चीज हैं वह हैं लोकी, जिसे दूदी भी कहते हैं। अंग्रेजी में Bottle gourd । जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं, इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है। तो आप रोज लोकी का रस निकाल-निकाल कर पियो, या कच्ची लोकी खाओ।

प्रतिदिन 200 से 300 मिलीग्राम पियो, सुबह खाली पेट (शौच जाने के बाद) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं। इस लोकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं, इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो, तुलसी बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं, पुदीना भी बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डालें, ये भी बहुत क्षारीय है। लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डालें, वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी ना डालें।

2 से 3 महीने आपकी सारी हार्ट की ब्लॉकेंज ठीक कर देगा। 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा।

लोकी परीक्षण – आप लोकी पर नाखून लगाकर देख लीजिए की नाखून पूरा अंदर जाता है या नहीं।

यदि नाखून पूरा अंदर जाता है तो लोकी असली है।

अगर नाखून पूरा अंदर नहीं जाता है और वह केवल निशान बन जाता है तो लोकी इंजेक्शन लगाई हुई है।

कोई ऑपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी, घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा। और आपका अनमोल शरीर और

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लाखों रुपय ऑपरेशन के बच जाएँगे, और पैसे बच जायेंगे। इन पैसे को आप किसी गौशाला में दान कर दे, डॉक्टर से अच्छा है किसी गौशाला में दान ने, हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा।।

होम्योपैथी चिकित्सा

आमजन के मस्तिष्क में यह बात बहुत गहराई तक बैठी हुई है कि गंभीर इमरजेन्सी से होम्योपैथिक दवा का कोई नाता नहीं है क्योंकि गंभीर इमरजेन्सी में यह नाकाम है लेकिन यह तथ्य पूर्णतः गलत है, कुछ विशिष्ट होम्योपैथिक दवाएं गंभीर इमरजेन्सी को फौरन नियंत्रित करने में सक्षम हैं।

हड्डी टूटना – हड्डी टूटने पर होम्योपैथी दवा अर्निका 1M देना है, जो दर्द को दूर करता है। अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।

अगर हड्डी टूट गई है तो टूटी हड्डी को पुनः जोड़ने के लिए अगले दिन एक दाना गेहूँ के बराबर चुना दही में मिलाकर दिन में एक बार 15 से 20 दिन तक देना है।

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❖ मोच

अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।

❖ सामान्य चोट

शरीर के किसी भी भाग में बिना रक्त निकले चोट लगने या मुड़ जाने पर या मार लगने, गिरने पर अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।

❖ खून बहने पर

शरीर पर चोट लगने से खून बहने पर होम्योपैथी दवा हाईपेरिकम 200 की 2-2 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार, यदि चोट ज्यादा है और खून बह रहा है तो हाईपेरिकम 1M 1-1 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार देना है।

❖ चोट लगने लेकिन खून ना बहने पर

अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।

❖ टिटनेस

लोहे की जंग लगी वस्तु से चोट लगने पर या वाहन से दुर्घटना होने पर टिटनेस का खतरा पैदा हो जाता है जो जानलेवा भी साबित हो सकता है, होम्योपैथी में टिटनेस के लिए दोनों विकल्प मौजूद हैं –

Hypericum 200 की 2-2 बूंद आधे घण्टे में तीन बार

❖ सांप के काटने पर चिकित्सा

सांप काटने पर नाजा 30 हर दस मिनट में 2-2 बूंद तीन बार देना है। अगर ठीक हो रहा है, तो इसी को चालू रखना है। अगर समय ज्यादा हो गया या फर्क नहीं है तो नाजा 200 की 2-2 बूंद हर दस मिनट में तीन बार देना है। ठीक होने पर कोई भी दवा नहीं देना है।

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यदि नाजा 200 से भी ठीक नहीं है तो नाजा 1M की 2 बूंद आधा कप पानी में डालकर एक चम्मच हर आधे घण्टे में तीन बार पिलाना है। अगर इससे भी ठीक ना हो तो नाजा 10M की आधा कप पानी में एक बूंद डाल कर एक चम्मच एक ही बार पिलाना है। जब नियंत्रण में आए तो गर्म पानी य मूंगदाल का उबला हुआ पानी देना है। खाना अगर देना है तो थोड़ी मूंगदाल की खिचड़ी दे सकते हैं।

❖ बिच्छू, मधुमक्खी के काटने पर, सूर्य या काटा लगने की चिकित्सा

बिच्छू के काटने पर Silicea 200 की एक बूंद 10-10 मिनट के अंतर पर तीन पर जीभ पर रखकर लेनी है। 10-10 मिनट पर एक – एक बूंद और आप देखेंगे कि वो डंक अपने आप निकल कर बाहर निकल कर आ जायेगा। सिर्फ तीन डोज में आधे घण्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते हैं।

यह दवाई और भी बहुत काम आती है। अगर आप सिलाई मशीन में काम करती हैं तो कभी-कभी सूर्य चुभ जाती है और अन्दर टूट जाती है उस समय भी आप ये दवाई ले लीजिए। ये सूर्य को भी बाहर निकाल देगी। आप इस दवाई को और भी कई परिस्थितियों में ले सकते हैं जैसे कांटा लग गया हो, कांच घुस गया हो, ततैया ने काट लिया हो, मधुमक्खी ने काट लिया हो तो ये सब जो काटने वाले अन्दर जो छोड़ देते हैं उन सब के लिए आप इसको ले सकते हैं। बंदूक की गोली लगने पर गोली को बाहर निकालने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बहुत तेज दर्द निवारक हैं और जो कुछ अन्दर छुटा हुआ है, उसको बाहर निकालने की दवाई हैं। बहुत सस्ती दवाई हैं। 5 मि.ली सिर्फ 10 रुपये की आती हैं। इससे कम से कम 50 से 100 लोगों का भला हो सकता है।

मकड़ी मलने पर – लीडम पाल 200 दिन में 3 बार

❖ पागल कुत्ता काटने पर

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कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंता मत करिए। दवा का नाम है Hydrophohinum 200 और इसको 10 – 10 मिनट पर जीभ में तीन ड्रॉप डालना है। कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दवा दे दीजिए और भूल जाइये कि कोई इंजेक्शन देना है। इस दवा को सूरज की धूप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है। रोबीज सिर्फ पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटने से रोबीज नहीं होता। आवारा कुत्तों ने अगर काट दिया है तो राजीव भाई के अनुसार आप अपना मन का बहम दूर करने के लिए ये दवा दे सकते हैं लेकिन उससे कुछ नहीं होता वो हमारा मन का बहम है जिससे हम परेशान रहते हैं, और कुछ डर डाक्टरों ने बिठा रखा है की इंजेक्शन तो लेना ही पड़ेगा। अपने शरीर में थोड़े, बहुत Resistance सबके पास हैं अगर कुत्ते के काटने से उनके लार-ग्रंथी के कुछ वायरस चले भी गये हैं तो उनको खत्म करने के लिए हमारे रक्त में काफी कुछ है और वो खत्म कर ही लेता है। लेकिन क्योंकि मन में भय बिठा दिया है शंका हो जाती है हमको यकीन नहीं होता जब तक 20000-50000 खर्च नहीं कर लेते ये उस समय के लिए राजीव भाई ने ये दवा लेने की बात कही है। और इसका एक-एक ड्रॉप 10-10 मिनट में जीभ पर तीन बार डाल के छोड़ दीजिए। 30 मिनट में ये दवा सब काम कर देगा।

कई बार कुत्ता घर के बच्चों के साथ खेल रहा होता है और गलती से उसका कोई दाँत लग गया तो आप उस जख्म में थोड़ा हल्दी लगा दीजिए पर साबुन से उस जख्म को बिल्कुल मत धोये नहीं तो वो पक जायेगा, हल्दी Antibiotic, Antipyretic, Antititanatic, Antiinflammatory है।

❖ हार्ट अटैक

हार्ट अटैक (हृदय घात) जैसी गंभीर इमरजेंसी में होम्योपैथिक दवा ACONITE 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है। अगर आपने इतना भी कर दिया तो रोगी की जान बच जायेगी, आगे रोगी को कहीं भी हॉस्पिटल में ले जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।

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❖ डायरिया, उल्टी या दस्त होने पर

NUX VOMICA 200 2-2 बूंद दिन में तीन बार सुबह, दोपहर व शाम को दो तीन दिन चालू रखना हैं।

हरिया के लिए NUX VOMICA 1M 1-1 बूंद दिन में तीन बार प्रत्येक एक-एक घण्टे से फिर वापिस 15 दिन या फिर 15 दिन बाद तीन महीने तक।

❖ घात जाने पर

NUX VOMICA 1M सुबह खाली पेट प्रत्येक 1-1 घण्टे में तीन बार देना है।

❖ अपेन्डेक्स(Appendix)

NUX VOMICA 200 रात के भोजन के एक घण्टे बाद 2 बूंद फिर तीन दिन बाद 2 बूंद (दस बार तक ले सकते हैं)

या

NUX VOMICA 30 – प्रतिदिन रात को एक बूंद

SULPHAR 200 – हफ्ते में एक दिन सुबह-दोपहर-शाम एक – एक बूंद दिन में तीन बार

नोट – अस्थमा के मरीज को कभी भी सल्फर नहीं देना

❖ स्वपन दोष

NUX VOMICA 200 रात को सोते समय 2 बूंद हर तीन दिन बाद फिर से ले सकते हैं। प्रतिदिन नहीं।

❖ पीलिया

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हेपेटाईटस A,B,C,D,E के ईलाज

गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस के साथ पान में लगाकर दिन में एक बार 10 से 12 न तक लेना हैं।

पीलिया होने पर NUX VOMICA 30 की 2-2 बूंद दिन में तीन बार 10 से 12 दिन तक लेना हैं।

यदि पीलिया रोग की शुरुआत में ही रोगी को ऐकोनाइट औषधि दी जाए तो इससे पीलिया को रोग पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

BERBERIS VULGARIS (Mother Tincher) की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/4) कप गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में चार बार (सुबह-दोपहर-शाम और रात) को लेना हैं।

❖ बवासीर, फिस्टला या भगन्दूर होने पर

एक केले के बीच से चीरा लगाकर चूना बीच में रख दें, फिर इसे खाए इससे बवासीर एकदम ठीक हो जाती है साथ में देशी गाय का मूत्र भी पीयें।

यदि रोग बढ़ गया है तो आपको साथ में ये होम्योपैथिक दवा भी खाना होगा

NUX VOMICA 30 – रोज रात को एक बूंद

SULPHAR 200 – हफ्ते में एक दिन सुबह – दोपहर-शाम एक-एक बूंद दिन में तीन बार

❖ गंभीर लकवा होने पर, रोगी को शरीर में सुन्नता, छूने पर कोई संवेदना नहीं होना, नसों में जकड़न

नसों में जकड़न और पक्षाघात या Paralysis में एक दवा का नाम है, RHUSTOX – 30 जिस दिन पक्षाघात आता है रोगी को 15-15 मिनट पर तीन बार दो-दो बूंद मुंह में दें और इसी RHUSTOX -30 को लगातार करते हुए रोज सुबह, दोपहर, शाम दें साथ में एक और दवा है।

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CAUSTICUM 1M जिस दिन RHUSTOX – 30 दिया दूसरे दिन CAUSTICUM 1M की दो-दो बूंद तीन बार दें। और CAUSTICUM – 1M को RHUSTOX – 30 के आधे घंटे बाद देना है। ये RHUSTOX – 30 रोज की दवाई है, पर CAUSTICUM – 1M को हफ्ते में एक दिन दो-दो बूंद तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) देनी है। ऐसे करके पक्षाघात के रोगी को दवा देंगे तो कोई एक महीने में ठीक हो जायेगा कोई 15-20 दिन में ठीक हो जायेगा, किसी को 45 दिन लगेगें और ज्यादातर दो महीने से ज्यादा नहीं लगेगे ठीक होने में। अगर किसी को Paralysis आने के 15 दिन या एक महीने बाद से दवा दिया जाये तो वो रोगी तीन महीने में ठीक हो जाते हैं, तीन महीने से ज्यादा समय नहीं लगता।

❖ मिरगी

RHUSTOX - 30 को लगातार करते हुए रोज सुबह, दोपहर, शाम दें साथ में एक और दवा है। CAUSTICUM 1M जिस दिन RHUSTOX – 30 दिया दूसरे दिन CAUSTICUM 1M की दो-दो बूंद तीन बार दें। और CAUSTICUM – 1M को RHUSTOX – 30 के आधे घंटे बाद देना है। ये RHUSTOX – 30 रोज की दवाई है, पर CAUSTICUM – 1M को हफ्ते में एक दिन दो-दो बूंद तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) देनी है।

एक दाना गेहूँ के बराबर चूना दही में मिलाकर दिन में एक बार 15 से 20 दिन तक देना है। CALCAREA PHOS 3X की 4 – 4 गोलियों को दिन में 3 बार रोगी को दे साथ में मिल सके तो नाक में सोते सम देशी गा का घी भी जरूर डालें।

❖ न्युमोनिया

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न्यूमोनिया में होम्योपैथिक दवा ACONITE 200 की 2 बूंद कप पानी में डालकर एक चम्मच में दिन में तीन बार पिलाना हैं, केवल 1 ही दिन देना हैं।

❖ आँखों के रोग

  • ➤ आँख की पलकों पर गुहेरी के लिए – स्टेसिफेगिरिया 30 या हिपर सल्फ 1M
  • ➤ निकट दृष्टि दोष के लिए – फाइसोस्टिगमा 3X या 6 दिन में 3 बार
  • ➤ रतौंधी – फाइसोस्टिगमा 3X या 6 दिन में 3 बार
  • ➤ मोतियाबिंद – फॉस्फोरस 200 सप्ताह में 1 बार तथा कल्केरिया फ्लोर 6 या 12X दिन में 3 बार
  • ➤ दिनोंधी (यानि दिन में ना देख पाना) - बोथरौप्स 30 , दिन में 3 बार और फॉस्फोरस 200 सप्ताह में 1 बार

❖ आवाज बैठना

  • ➤ पूरी तरह आवाज बैठने पर – अर्जेंमैट 30 , दिन में 3 बार
  • ➤ ठंडी चीज खाने पर आवाज बैठना – हिपर सल्फ 30 , दिन में 3 बार

❖ सौन्दर्य और होम्योपैथी

कई बार मस्से, त्वचा का ज्यादा खुरदरापन या चिकनाहट, अनचाहे बाल, बालों का असमय सफेद होना, त्वचा पर धब्बे, कील, मुँहासे, आँखों का अंदर को धंसे होना, आदि के कारण व्यक्ति कुरूप नजर आने लगता हैं।

  • ➤ खुशकी व खुरदरी त्वचा के लिए जब खारिश के बाद दर्द महसूस हो – सोराइनम 30 या 200
  • ➤ औरतों में आँखों के चारों ओर काले धब्बे जब किसी पुराने दुःख के कारण हो – स्टेफिसेगिरिया 30 या 200

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  • ➤ चेहरा पीला व साथ में चेहरे व सीने पर पीले या भूरे धब्बे – सीपिया 30 या 200
    • ➤ रक्त की कमी के कारण पीलापन- फेरम मैट 3X
    • ➤ त्वचा का रंग साफ करने के लिए – सरसापेरिला 30
    • ➤ चेहरे पर निशान जो फोड़े-फुंसियों या मुहासों, आदि के कारण हो- साइलीशिया 6X व काली फॉस 6X
    • ➤ चेहरे पर चेचक के दाग – वैरिओलिनम 200, सारासिनिया 30, थायोसिनैमिनम 2X

❖ भूख न लगना

खाना हजम न होना, कभी दस्त, कभी कब्ज, मुंह में पानी आना आदि।

  • ➤ जब कोई खास कारण पता न चले – लैसिथिन 3X , दिन में 3 बार
  • ➤ थोड़ा सा खाने से ही पेट भर जाए, गर्म खाना पीना अच्छा लगे, मीठा खाने की इच्छा, पेट में गैस भरी रहती हो- लाइकोपीडियम 30, दिन में 3 बार

❖ जीभ व मुंह के छाले

आमतौर पर कब्ज होने की वजह से मुँह व जीभ में छाले हो जाते हैं।

  • ➤ मुँह में छाले, जिनमे बहुत दर्द हो- हिपर सल्फ 30 , दिन में 3 बार या बोरेक्स की 2 बूंद

❖ छोटी माता

यह ज्वर तथा फैलने वाली छूत की बीमारी हैं, इसमें अनेक पारदर्शी साव भरे दाने होते हैं।

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  • ➤ रोग के शुरू होने पर तेज बुखार व बेचैनी – एकोनाइट 6 या 30 , दिन में 4 बार
    • ➤ दानों में जब बहुत खुजली हो – रस टाक्स 6X या 30 , दिन में 3 बार

❖ सर्दी जुकाम

  • ➤ जब सूखी ठंडी हवा लग कर रोग आया हो, ठंडक महसूस होना, सिर दर्द, आँखों से पानी, छीकें आना, सूखी खांसी, बार-बार बेचैनी तथा भय, खुली हवा में अच्छा लगता है – एकोनाइट 30 , 3-4 खुराक दिन भर में दे
  • ➤ चिड़चिड़ापन, तेज सर दर्द के साथ नजला जुकाम, नाक से बहुत पानी बहने के साथ होठ सुखा होना – ब्रायोनिा 30 , दिन में 3-4 बार

❖ कब्ज

  • ➤ साधारण कब्ज में – नक्स वोमिका 30 , रोज सोते समय 4 बूंद, एवं सल्फर 30 रोज सुबह 4 बूंद
  • ➤ मल बहुत कड़ा एवं आंव लिपटा हुआ हो – ग्रेफाइटिस 30 , दिन में 3 बार

❖ खांसी

  • ➤ नई सूखी खांसी, खासकर रात में बढ़ जाना, गले के भीतर खरखराहट, ठंडा पानी पीने की इच्छा – एकोनाइट 30 , 2-3 घंटे के अंतर पर
  • ➤ सुखी या बलगम वाली खांसी, सर्दी लगने से बढ़ने वाली, पुरानी खांसी, दिन में कफ अधिक निकलना – हिपर सल्फर 30 , दिन में 3 बार

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  • ➤ सीने में बलगम जमा होने पर भी न निकलना, साँस लेने में कष्ट, खाँसते खाँसते उल्टी जैसा होना, हाथ पाव अकड़ जाना, हाफने लगना – इपेकाक 30, ऍटीम टार्ट 30 दिन में 3-4 बार

❖ दमा

  • ➤ एकाएक तेज दमे का आक्रमण – एकोनाइट Q, इपिकैक Q , 10-10 बूंद पहले 1 घंटे के अंतर से अदल-बदल कर व आराम आने पर 3-3 घंटे के बाद दे।
  • ➤ दमा के प्रकोप को कम करने के लिए, जब दम घुटे, सांस ठीक से न ली जाए – ब्लैटा ओ Q, सेनेगा Q, गिंड़ीलिया Qकैशिया सोफोरा Q बराबर मात्रा में मिला कर दें।

❖ दस्त

  • नक्स वोमिका 30 , दिन में 3 बार

❖ दिमागी कमजोरी

बहुत जटिल व पुरानी बीमारिया, जिनमें रोगी की जीवनी शक्ति क्षीण हो जाती है, स्नायुमंडल कमजोर हो जाता है, बहुत ज्यादा मानसिक परिश्रम, हस्तमैथुन, वंश परंपरा से आये दोष, आदि की वजह से दिमागी कमजोरी उत्पन्न हो सकती है।

प्रमुख दवा – एसिड फॉस Q , 5-10 बूंद पानी के साथ दिन में 3 बार

❖ कान का दर्द

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  • ➤ जब अचानक ठण्ड लग जाने से कान दर्द शुरू हुआ हो – एकोनाइट 30, हर 2 घंटे में
    • ➤ असहनीय दर्द जो गर्म सेक से बढ़े – कैमोमिला 30, हर 2 घंटे पर
    • ➤ अचानक दर्द शुरू होने पर – बेलाइडोना 30, हर 2 घंटे पर

❖ एग्जीमा

  • ➤ त्वचा खुशक, व छिछड़ेदार रोगी के आँख की पलकें, कान, नाक के अगले हिस्से लाल हो – सल्फर 30, दिन में 2-3 बार
  • ➤ त्वचा पर दाने व फुंसियों के कारण अत्याधिक खुजली हो – रस टाक्स 30, दिन में 3 बार
  • ➤ एग्जीमा की बायोकेमिक दवा – कैल्केरिया सल्फ 6X, दिन में 4 बार

❖ अनिद्रा

  • ➤ कैल्केरिया कार्ब 30, दिन में तीन तीन घंटे के अंतराल में सेवन

❖ मुँह, दांत और गले के रोग

  • ➤ मसूढ़े सूजकर मुलायम हो गये हो, मुह से बदबू – मर्क सौल 6
  • ➤ मसूढ़े फूलना व उसमे पस निकलना – सिस्टस 30
  • ➤ मुँह में लार बनना बंद हो जाना, गला सूख जाना – नक्सवोमिका 6
  • ➤ किसी भी प्रकार दांतों का दर्द – प्लैण्टेगो 3X व प्लैण्टेगो के मदरटिचर को मसूढ़ो पर लगाने से लाभ मिलता है।
  • ➤ हलकापन दूर करने के लिए – स्टैमोनियम 30

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  • ➤ गले से संबंधित विभिन्न लक्षण जैसे- गला खुशक होना, गले में दर्द, लार को निगलने की इच्छा, टॉसिल का भीतर तथा बाहर से सूज जाना और दर्द होना – मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति का प्रयोजन करना चाहिए।
    • ➤ मोटापे के लिए – ऐमोन-ब्रोम की 3X मात्रा, कैल्केरिया-कार्ब की 3 से 6 शक्ति तथा कैल्के आर्स की प्रति 2 ग्रेन मात्रा प्रत्येक 8 घंटे में सेवन करें।

❖ पेट के रोग

  • ➤ पेट दर्द के लिए – ऐकोनाइट 30
  • ➤ पेट के कीड़ों के लिए – स्टैनम 6 या 30
  • ➤ पेट के सभी रोगों के लिए – नक्सवोमिका 30

❖ पुरुष रोग

  • ➤ शरीर और मन की सुस्ती, शरीर कमजोर होना, जननेन्द्रिया की कमजोरी, स्वप्रदोष पीडित के लिए – एग्रस कैक्टस 6 शक्ति
  • ➤ कामवासना पर नियंत्रण न रख पाना, हस्तमैथुन करने पर मजबूर होना – ओरिगैनम 3 शक्ति
  • ➤ संभोग क्रिया में सफल न होना, नपुंसकता आ जाने पर – फास्पोरस 30 या 200 शक्ति
  • ➤ नपुंसकता व वीर्यपात दूर करने के लिए – लाइकोपोडियम 30 या 200 या 1M

❖ चोट, मोच, फोड़ा तथा फुंसियां

  • ➤ दाद से पीड़ित रोगी को बैसीलीनम औषधि की 30 शक्ति पहले एक सप्ताह तक सेवन करना चाहिए, इसके बाद इस औषधि की 200 शक्ति का प्रयोग सप्ताह में एक बार 4 सप्ताह तक करना चाहिए और फिर महीने में एक बार इस औषधि की 1M मात्रा का प्रयोग 5-6 महीने तक करना चाहिए। इस औषधि से

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दाद ठीक होने का साथ सिर में रूसी समाप्त हो जाती हैं एवं बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।

  • ➤ चेहरे के मुहासों को दूर करने के लिए – कैलि-ब्रोम 30
  • ➤ चेहरे पर फुंसियां होने पर, नाक, ठोड़ी पर फुंसियां होने पर – ऐस्टोरियास-रूबेन्स 6 शक्ति
  • ➤ यदि रोगी के चेहरे पर होने वाली फुंसियों की काफी चिकित्सा करवाने के बाद भी कोई लाभ नहीं – आर्स-आयोडाइड 3X
  • ➤ गर्म प्रकृति के रोगियों के बाल झड़ने पर – फ्लोरिक ऐसिड 6 या 30 शक्ति
  • ➤ उम्र से पहले बाल सफेद होने पर – ऐसिड फास
  • ➤ बालों में रूसी, खुशकी, पपड़िया जम जाना, खुजली होना – मेजेरियम 6 या 30 शक्ति
  • ➤ सिर में रूसी के साथ, बालों का बहुत अधिक मात्रा में झड़ना – फॉस्फोरस 30 शक्ति

❖ अर्थराइटिस

  • ➤ गठिया रोग की शुरुआत में – ऐकोनाइट 30
  • ➤ रोगी में अचानक ही गठिया दर्द होने पर, उसके जोड़ों में तेज दर्द होता है - 2 चम्मच गर्म पानी में 5 बूंद अटिका यूरेन्स , हर 4 घंटे के अन्तर पर। इसके साथ गर्म पट्टी पर कोलचिकम औषधि के मूलार्क को 20-25 बूंद की मात्रा डालकर दर्द वाले स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

❖ पित्त रोग

  • ➤ त्वचा पर लाल, पीले रंग के चकत्तेदार दाने होना, खुजली होना – एपिस औषधि की 1x, 3x या 6 शक्ति का उपयोग करें। 2 दिन बाद लाभ न मिले तो क्लोरेलम औषधि की 3x मात्रा का सेवन करें। औषधि का सेवन 8 घंटे के अंतर में करें।

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