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सम्पूर्ण चिकित्सा

Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ
  • • जामुन मधुमेह के रोगी के लिए सर्वोत्तम दवाई हैं। सीधे जामुन खाना लाभदायक तो है ही, लेकिन जामुन की गुठली का चूर्ण ताजे पानी के साथ दिन में 2-3 बार लेने पर मधुमेह में बहुत लाभकारी होता है। इसके साथ जामुन के हरे पत्तों की चटनी बनाकर 1 ग्लास पानी में प्रतिदिन पीने से लाभ होता है।
    • • पान के साथ चार पत्ती बंग भस्म लेने से मधुमेह दूर होता है।
    • • प्रातःकाल 20 ग्राम गिलोय का रस बराबर मात्रा में शहद के साथ मिलाकर लेने से बीमारी में लाभ मिलता है।
    • • प्रतिदिन रात्रि विश्राम से पहले शहद के साथ त्रिफला चूर्ण लेने से लाभ होता है।
    • • इन्द्र जौ, बादाम और चने का चूर्ण बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन सुबह और शाम फीके दूध से लें।
    • • त्रिफला चूर्ण में मैथी के दानों का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाये और प्रतिदिन प्रातः काल 2 चम्मच चूर्ण गुनगुने जल के साथ सेवन करें।

❖ बहुमूत्र (बार-बार पेशाब आना)

बहुमूत्र रोग में बार-बार पेशाब आता है। और थोड़ा-थोड़ा पेशाब आता है। यह रोग बच्चों तथा युवाओं को अधिक होता है और अधिकांशतः अनुवांशिक है। इस रोग में कब्ज, अपच, अधिक मूत्र आना, और नींद न आना इस तरह की शिकायतें रहती हैं। रोगी प्रतिदिन कमजोर होता जाता है कमर और कमर के नीचे के हिस्सों में दर्द रहता है।

  • • आँवले का सूखा चूर्ण या आँवले का रस गुड़ के साथ मिलाकर लेने से बीमारी में लाभ होता है।
  • • 20 ग्राम काले तिल और 10 ग्राम अजवायन को मिलाकर पाउडर बना लें फिर इस पाउडर को 50 ग्राम गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम 1-1 चम्मच सेवन करें।

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  • • प्रातःकाल खाली पेट अदरक का रस १ चम्मच लेने से बहुमूत्र की शिकायत दूर होती है।
    • • रात्रि विश्राम से पहले गाय के दूध में पकाये हुए ४ छुआरे खाने से बहुमूत्र के रोग में आराम मिलता है।

❖ मूत्राशय प्रदाह (जलन)

इस रोग में मूत्राशय में दर्द होता है। और बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती है और पेशाब करते समय मूत्राशय में जलन और दर्द रहता है कष्ट के साथ पेशाब आती है।

  • • प्रतिदिन गाजर का रस पीने से जलन में आराम मिलता है।
  • • चावल के मांड में मिश्री मिलाकर पीने से बीमारी में लाभ होता है।
  • • त्रिफला चूर्ण का काढ़ा गुड़ मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
  • • ३ चम्मच मूली का रस जरा सी सेंधा नमक डालकर पीयें।

❖ गुर्दे की पथरी

जिन लोगों के मूत्र में कैल्शियम अधिक मात्रा में बनता है उनको पथरी जल्दी होती है। यह भिन्न भिन्न प्रकार के छोटे-छोटे क्षारीय तत्व होते हैं। जो किन्हीं कारणों से मूत्राशय तथा मूत्रनली से नहीं निकल पाते और धीरे-धीरे एकत्र होकर पथरी का रूप ले लेते हैं। पथरी होने के बाद जब व्यक्ति मूत्र त्याग करता है तब उसे दर्द का अनुभव होता है। ऐसे में मूत्र धीरे-धीरे और रूककर बाहर आता है।

  • • चौलाई अथवा बथुआ के साग को अच्छी तरह धोकर पानी में उबालें और यह उबला हुआ पानी कपड़े से छान लें तथा इसमें कालीमिर्च, जीरा, तथा जरा सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में कई बार पियें कुछ ही सप्ताह में लाभ अवश्य मिलेगा।

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  • • जीरे के पाउडर को शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है।
    • • सफेद प्याज को कूटकर कपड़े से उसका रस निकालें। सुबह खाली पेट पीयें। इससे पथरी जल्दी टूट- टूटकर खत्म हो जायेगी।
    • • सूखे आँवले का पाउडर बनायें और प्रातः काल खाली पेट मूली पर लगाकर चबा-चबाकर खायें।
    • • मूली के बीजों का चूर्ण १ चम्मच शहद में मिलाकर चाटें।

गुप्त रोग

❖ शीघ्र पतन

शीघ्र पतन प्रायः उन लोगों को होता है जो प्रकृति के विरुद्ध सहवास की प्रक्रिया अपनाते हैं। हस्त मैथून, मुख मैथून करते हैं, या अत्याधिक अश्लील साहित्य पढ़ते हैं अथवा अत्यधिक सम्भोग में रत रहते हैं। इस बीमारी का प्रमुख लक्षण यह है कि संभोग के समय पुरुष स्त्री को संतुष्ट करने से पूर्व ही स्खलित हो जाता है। और इसी को शीघ्रपतन कहते हैं। कई बार तो स्त्री का आलिंगन करने या चूम्बन लेने मात्रा से ही पुरुष स्खलित हो जाता है। लेकिन घरेलू चिकित्सा करने और अच्छा साहित्य पढ़ने से यह बीमारी आसानी से दूर हो सकती है।

प्रातः काल खाली पेट एक पका हुआ केला एक चम्मच गाय के घी के साथ लगाकर एक महीने खाने से यह बीमारी दूर होती है।

  • • 10 ग्राम घी + 5 ग्राम शहद + 10 ग्राम मुलहठी मिलाकर चाटें तथा गर्म दूध भी पीयें यह सहवास के पश्चात ही लें तो शीघ्रपतन धीरे-धीरे दूर होगी तथा कमजोरी भी नहीं होगी।
  • • सूखा धनियाँ + मिश्री बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बनायें प्रतिदिन सुबह ठंडे पानी में लेने पर काफी लाभ मिलेगा।

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  • • तुलसी के बीज+ मिश्री को बराबर की मात्रा में मिलाकर पाउडर बनायें तथा प्रातः दूध के साथ सेवन करें।
    • • लौंग का तेल लिंग पर लगाकर सहवास करने से शीघ्रपतन दूर होता है।

❖ स्वप्नदोष

रात में सोते समय या दिन में कभी भी कामेच्छा मात्रा से ही जब वीर्य स्थलित हो जाये तो उसे स्वप्न दोष कहते हैं। कामुक दृश्यों, सिनेमा देखने या अश्लील किताबों को पढ़ने से कामुक भावनाएं मन में बैठ जाती हैं। जो स्वप्न में आती हैं। इसी कारण वीर्य स्थलित हो जाता है।

  • • प्रातः काल उठकर ताम्रपत्र में रखा हुआ ठंड पानी पीने से यह बीमारी दूर होती है। गर्म प्रकृति वाले लोगों को यह नुस्खा अवश्य अपनाना चाहिए।
  • • प्रातःकाल शहद के साथ केला खाने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।
  • • सूखा धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में पीसकर ठंडे पानी के साथ लें। स्वप्नदोष की शिकायत दूर होगी।
  • • गुलकंद को गाय के दूध में मिलाकर पीने से स्वप्न दोष दूर होता है।
  • • प्रातःकाल आँवले का चूर्ण और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से स्वप्नदोष ठीक होता है।
  • • विषय वासना, व हस्तमैथून से दूर रहें, सदा प्रसन्ना रहें तथा अच्छी संगत में रहें। योग और व्यायाम करें। अवश्य लाभ होगा।

❖ नपुंसकता

यह बीमारी अत्याधिक स्त्री सम्भोग, मोटापा बढ़ने या चर्बी बढ़ने, या किसी प्रकार की अण्डकोष संबंधी दुर्घटना या हार्निंग, बहुमूल आदि के

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होने से होता है। अधिक शराब पीने या नशा करने वालों में भी नपुंसकता आती है। इस बीमारी में मैथुन शक्ति कमजोर होती जाती है। पुरुष में उत्तेजना खत्म होती जाती है। और लिंग में तनाव नहीं आता यदि आता भी हो तो वह शीघ्र ही खत्म हो जात है इस बीमारी के कारण कई अन्य मानसिक बीमारियाँ भी हो सकती हैं।

  • • लहसुन की 6-8 कलियों को छीलकर घी में तलकर पीसकर खायें यह बीमारी दूर करती है। कच्ची कलियाँ शहद के साथ भी ले सकता है।
  • • प्रातः काल गाय के गर्म दूध के साथ तुलसी से बीज और गुड़ बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से नपुंसकता दूर होती है। दूध में दो छुआरे और किशमिश डालकर पीयें।
  • • शहद + गाय का घी + सफेद प्याज का रस बराबर मात्रा में मिलाकर दूध के साथ लें।
  • • जमीकंद और तुलसी की जड़ दोनों को पान के साथ खाने से वीर्य जल्दी स्खलित नहीं होगा।
  • • प्यास के रस में शहद मिलाकर चाटने से वीर्य बढ़ता है।

मुख के रोग

❖ आँखों के रोग

अधिक ठंड, अधिक गर्मी, या आँखों में धूल जाने से या आँखों में किसी संक्रमक बीमारी के कारण दर्द होना शुरू हो जाता है और आँखें आ जाती हैं। इस कारण आँखों से पानी निकलता है और आँखें लाल हो जाती हैं। आँखों में से कीचड़ निकलना शुरू हो जाता है।

  • • सफेद प्याज का रस आँखों में लगाने से दर्द में कमी होती है।
  • • सुबह उठकर बासी मुँह की लार आँखों में लगाने से आँखों के प्रत्येक रोग दूर होते हैं।

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  • • त्रिफला चूर्ण, घी और शहद मिलाकर खाने से आँखों की बीमारी दूर होती है।
    • • देशी गाय का घी आँख में लगाने से जलन दूर होती है।
    • • गुलाब जल में फूली फिटकरी डालकर आँखों को धोने से जलन एवं सूजन समाप्त होती है। केवल गुलाबजल डालने से भी आँखों में राहत मिलती है।
    • • बथुए के रस को 1-1 बूंद करके आँखों में डालें।
    • • गुलाब जल, ताजे खीरे का रस और थोड़ा सा ठंडा दूध मिलाकर इसमें रूई के फोहो को भिगोकर पलकों के ऊपर रखें। आँखों में अनार का रस डालने से भी काफी लाभ होता है।

❖ गुहेरी

आँख की पलकों के ऊपर कोने में फुन्सी निकल आने को गुहेरी कहते हैं। यह एक गांठ की तरह होती है और हल्का –हल्का दर्द भी होता है।

  • • लौंग को पानी में घिसकर लगाने से गुहेरी बैठ जाती है।
  • • रात में भिगाये हुए त्रिफला चूर्ण के पानी से आँखों को छप्पे मार मार कर धोयें। बीमारी में काफी लाभ होगा।
  • • गुलाब जल में छोटी हरड को घिसकर लेप करने से लाभ मिलता है।
  • • गुलाब जल में थोड़ा फिटकरी का पानी मिलाकर डालने से गुहेरी बैठ जाती है।

❖ रतौंधी

अत्याधिक धूल, तीव्र प्रकाश, और दूषित पर्यावरण के कारण रतौंधी होती है। इसमें रोगी को रात्रि में बिल्कुल नहीं दिखाई देता तथा दिन में ठीक दिखाई देता है।

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  • • तुलसी के पत्तों का रस दिन में 3-4 बार आँखों में डालें।
    • • सफेद प्याज का रस आँखों में डालने से काफी लाभ होता है।
    • • देशी गाय का मूत्र आँखों में डालने से काफी लाभ होता है।
    • • आँखों में शुद्ध शहद लगाने से भी काफी आराम मिलता है।

❖ मोतियाबिंद

इस बीमारी में आँखों की पुतली पर सफेदी आती है और रोगी की दृष्टि धुंधली पड़ जाती है। कोई भी चीज स्पष्ट नहीं दिखाई देती। यह रोग प्रायः वृद्धा अवस्था में होता है।

  • • सुबह शाम 1 गिलास गाजर का रस पीने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।
  • • रात में पानी में भिगोई हुई लहसुन की कालियों को प्रातः काल उठकर खायें और पानी पीयें। मोतियाबिंद में लाभ होगा।
  • • शुद्ध शहद आँखों में लगाने से भई मोतियाबिंद में लाभ होता है।
  • • सूखा धनियाँ और सौंफ और देशी शक्कर बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बनायें सुबह शाम जल से सेवन करें।

❖ कान के रोग

कान में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। कान का बहना, फोड़े-फुन्सी, कर्ण शूल, बहरापन आदि हैं।

  • • सरसों का तेल कान में डालने से फोड़े – फुन्सी ठीक होते हैं।
  • • दर्द होने पर प्याज का रस गर्म करके कान में डालने पर आराम मिलेगा।
  • • तुलसी के पत्तों के रस में थोड़ा सा कपूर मिलाकर गर्म करें और कान में डालें।
  • • कान में गौमूत्र डालने से फोड़े फुन्सी ठीक होते हैं।

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  • • कान से स्वमूत्र डालने से कान का दर्द रूक जाता है।
    • • लहसुन, मूली और अदरक तीनों का रस मिलाकर कान में डालने से आराम होता है।

❖ नाक के रोग

नाक में चोट लग जाने से या किसी प्रकार के संक्रामक रोग से अथवा सिर की गर्मी से अक्सर नाक से खन निकलने लगता है। बच्चों में यह बीमारी अधिकांश देखी जाती है।

  • • सबसे पहले रोगी को सीधा लिटाकर ठंडे पानी से सिर धोयें। उससे खून निकलना बंद होगा।
  • • धनिये के पत्तों का रस या प्याज का रस नाक में डालने से खून निकलना बंद हो जाता है।
  • • आंवला पीसकर घी में भूने और नाक पर लेप करें।
  • • मुल्लानी मिट्टी का लेप नाक पर लगाने से नकसीर बंद होती है।
  • • नाक के किसी भी रोग के लिए देशी गाय का घी नाक में डालें।

❖ दाँतों के रोग

दाँतों की सही ढंग से सफाई न करने से दाँतों के रोग होते हैं। अत्याधिक कब्ज रहने से तथा खाना न पचने से भी दाँतों में सड़न होती है। दाँतों की सड़न या दाँतों में कीड़े लगना दाँतों को साफ न रखने से और भोजन के बाद कुल्ला न करने से दाँतों में कीड़े लग जाते हैं।

  • • 1 चम्मच शहद में लहसुन का रस मिलाकर चाटने से दाँतों की सड़न एवं बदबू दूर होती है।
  • • थोड़ा सा अदरक का रस और नमक 1 गिलास पानी में मिलाकर गर्म करें और उस पानी से कुल्ला करें।
  • • पीपल व नीम की दातून से दाँतों के कीड़े नष्ट होते हैं।
  • • सेंधा नमक, काली मिर्च, त्रिफला, हल्दी और सरसों के तेल को लेकर पेस्ट बनाये और सुबह शाम करें।

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❖ दांतों का दर्द

दांतों को नियमित रूप से साफ न करने से, पेट में कब्ज एवं वायु के रहने से, भोजन के पश्चात दाँतों में अन्न कण फँसे रहने से, तथा अत्याधिक आईस्क्रीम खाने से दाँतों में दर्द रहता है। दांत हिलने शुरू हो जाते हैं।

  • • अदरक और तुलसी के पत्तों का रस दांतों पर लगायें।
  • • हींग को पानी में घोलकर उस पानी से कुल्ला करें।
  • • रूई द्वारा लौंग का तेल दर्द होने वाले दाँत पर लगायें।
  • • सरसों के तेल में 1 चूटकी नमक मिलाकर दाँतों में मलें तथा 25 मिनट बाद गर्म पानी में कुल्ला करें।
  • • दाढ़ में दर्द होने पर नमक लगे अदरक के टुकड़े चूसने से आराम मिलता है।

❖ पायरिया

पायरिया रोग काफी हानिकारक है। प्रतिदिन दाँतों की सफाई न होने से अन्न के कण दांतों में सड़न पैदा करते हैं। मसूड़ों को जरा सा दबाने से या ब्रश करने पर या मंजन करने पर खून निकलता है। यदि ध्यान न दें तो यह रोग काफी बढ़ जाता है तथा दांत निकालने भी पड़ सकते हैं।

  • • सेंधा नमक, लौंग का तेल, हल्दी, और काली मिर्च को समान मात्रा में लेकर बारीक पाउडर बना लें। और प्रतिदिन सुबह शाम करें।
  • • फिटकरी+खिला सुहागा+सेंधा नमक बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें तथा मंजन की तरह उपयोग करें।

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  • • नीम की कोमल पत्तियाँ, काली मिर्च और काला नमक का पाउडर बनाकर प्रतिदिन प्रातः काल सेवन करने से लाभ होता है।
    • • आँवला जलाकर उसमें थोड़ सेंधा नमक मिलाकर सरसों के तेल में रगड़ने से पायरिया दूर होता है।

❖ मुँह के छाले

मुँह के छाले प्रायः पेट की गड़बड़ी से होते हैं। ज्यादा गर्म चीजों को खाने से, अमाशय की गड़बड़ी, रक्त की अशुद्धि आदि से भी होते हैं। ये छाले कभी जीभ की नोक पर तो कभी पूरी जीभ पर निकलते हैं। छाले होने के कारण मुँह में बार-बार पानी आने लगता है। इन छालों में जलन तथा दर्द हो जाता है। होठों पर भी छाले आ जाते हैं।

  • • भोजन के बाद सौफ के पानी से कुल्ला करें। आराम मिलेगा।
  • • सुहागे को थोड़ा सा तवे पर गर्म करके, पानी के साथ ले, तुरन्त लाभ होगा।
  • • दो चम्मच हल्दी का चूर्ण पानी में उबालकर उससे कुल्ला करें।
  • • गाय के दूध में एक चम्मच घी डालकर पीयें।
  • • मेहदी की पत्तियों को चबाने से छाले ठीक होते हैं।

वात रोग

❖ अर्थराइटिस/गठिया/जोड़ों का दर्द

जब हम खड़े होकर पानी पीते हैं, तो पानी के साथ वायु हमारे घुटनों तक पहुँच जाती है, जिससे गठिया बाय का रोग हो जाता है। जब भोजन नहीं पचता तो कच्चा रस इकट्ठा होने लगता है जिस कारण गठिया होने लगती है। ये रोग ज्यादातर आरामदायक जीवन बिताने वालों को होता है,

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मोटापा, धूम्रपान, अनियमित या जल्दी में भोजन करना, कब्ज रहना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।

  • ● 1 दिन में 2 ग्राम (गोहूँ के दाने के बराबर) चूना छाछ या दही के साथ खाने से 3 महीने में पुरानी से पुरानी गठिया ठीक हो जाती है।
  • ● मेथी दाना रात को पानी में भिगोकर रख दे, सुबह उठकर मेथी दाने को चबाचबा कर खायें और पानी को पी लें।

❖ थाइराइड

  • ● हाइपरथाइराडिज्म, हाइपोथायराडिज्म दोनों प्रकार के थाइराइड का उपचार धनिया से पूरी तरह से इलाज किया जा सकता है।
  • ● थाइराइड के लिए धनिया चटनी बनाकर दिन में 2 बार इस्तेमाल करें और जिन लोगों का थाइराइड के कारण वजन या मोटापा बहुत बढ़ा हुआ है उन लोगों को मोटापा भी इसी से कम होगा।
  • ● थाइराइड के सभी मरीजों के लिए आयोडीन युक्त नमक जहर के समान होता है थाइराइड के सभी मरीजों को सबसे पहले आयोडीन नमक छोड़कर उसकी जगह पर सेंधा या काला नमक का ही प्रयोग करना चाहिए क्योंकि भारत में आज जितने भी लोगों को हैं उनका प्रमुख कारण आयोडीन युक्त नमक, भारत में आज आयोडीन की कमी किसी को भी नहीं है, लेकिन सरकार जबरदस्ती ये नमक भारत के सभी लोगों को खिला रही है।
    • ○ खाने में हमेशा सेंधा नमक का ही प्रयोग करना चाहिए, ना की आयोडिन युक्त नमक का। चीनी की जगह गुड़, शक्कर, देसी खाण्ड या धाने वाली मिश्री का प्रयोग कर सकते हैं।

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❖ एड्स

एड्स एक सिंड्रोम है और बीमारी नहीं है, जब हमारे शरीर का कोई अंग सही से काम नहीं करता है और उसके लक्षण दिखने लगते हैं उसे हम बीमारी कहते हैं ! जबकि सिंड्रोम का मतलब होता है कि आप का वह अंग नहीं रहा और उसके ज्यादा लक्षण आपको नहीं दिख रहा है ! एचआईवी ( ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस) वायरस के संक्रमण से मनुष्य में एड्स होता है ! एचआईवी मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून) को खत्म देता है ! जिससे मनुष्य अन्य बीमारियों से लड़ने की ताकत को खो देता है ! इसीलिए एड्स को सिंड्रोम कहते हैं !

एड्स से बीमार आदमी को कोई अन्य बीमारी हो जाए तो ज्यादातर चांस होता है कि उस बीमारी का इलाज नहीं हो पाएगा ! इसलिए आप कह सकते हैं कि एड्स का मरीज एड्स के कारण नहीं मरता है, वह तो किसी अन्य बीमारियों या संक्रमण या दोनों से मरता है !

आधा कप गौमूत्र रोज सुबह खाली पेट खाने से 1 घण्टे पहले पीयें।

❖ सोराइसिस

  • • सोरायसिस त्वचा की ऊपरी सतह पर होने वाला चर्म रोग है। सोरायसिस एक वंशानुगत बीमारी है, जिसमें त्वचा पर एक मोटी परत जम जाती है। अलग शब्दों में कहें तो चमड़ी की सतही परत का अधिक बनना ही सोरायसिस है। त्वचा पर सोरायसिस की बीमारी सामान्यतः हमारी त्वचा पर लाल रंग की सतह के रूप में उभरकर आती है और स्केल्प (सिर के बालों के पीछे) हाथ-पांव अथवा हाथ की हथेलियों, पांव के तलवों, कोहनी, घुटनों और पीठ पर अधिक होती है। हालांकि यह रोग केवल 1-2 प्रतिशत लोगों में ही पाया जाता है। यह रोग अनुवंशिक भी हो सकता है।

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  • • त्वचा पर सुबह की लार लगाये। 1 साल में ठीक हो जायेगी।

❖ कैंसर

कैंसर बहुत तेजी से बढ़ रहा है इस देश में, हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे हैं और हर साल नए केस आ रहे हैं और सभी डॉक्टर हाथ-पैर डाल चुके हैं।

राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना कि ..... कैंसर के मरीज को कैंसर से मृत्यु नहीं होती है बल्कि जो इलाज कैंसर के लिए दिया जाता है उससे मृत्यु होती है। मतलब कैंसर से ज्यादा खतरनाक कैंसर का इलाज है। इलाज कैसा है आप सभी जानते हैं... कैम्पोथैरेपी, रोडियोथैरेपी, कोबाल्ट थेरेपी।

इसमें क्या होता है कि शरीर की जो प्रतिरक्षक शक्ति है वो बिल्कुल खत्म हो जाती है। जब कैम्पोथैरेपी दी जाती है ये बोल कर कि हम कैंसर के सेल को मारना चाहते हैं तो अच्छे सेल भी उसकी के साथ मर जाते हैं। राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो कैम्पोथैरेपी लेने के बाद आता है वे उनको बचा नहीं पाए। लेकिन इसका उल्टा भी रिकार्ड है ... राजीव भाई के पास बिना कैम्पोथैरेपी लिए हुए कोई भी रोगी आया दूसरी या तीसरी स्टेज तक वो एक भी नहीं मर पाया।

मतलब क्या है इलाज लेने के बाद जो खर्च आपने कर दिया वो तो मर ही गया और रोगी भी आपके हाथ से गया। डॉक्टर आपको भूल भूलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा। लेकिन अंत में वो जाता ही है। आपके घर परिवार में यदि किसी

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को कैसर हो जाये तो ज्यादा खर्चा मत करिए क्योंकि जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नहीं होगा बल्कि उसको इतना कष्ट होता है कि आप कल्पना नहीं कर सकते।

उसको जो इंजेक्शन दिए जाते हैं जो गोली खिलाई जाती है उसको जो कैम्प्योथेरीपी दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते हैं, भौहों के बाल उड़ जाते हैं, चेहरा इतना डरावना लगता है कि पहचान में नहीं आता ये अपना ही आदमी हैं। इतना कष्ट क्यों दे रहे हो उसको? सिर्फ इसलिए कि आपको एक अहंकार है कि आपके पास बहुत पैसा है तो इलाज करा के ही मानेगा। आप अपनी आस पड़ोस की बातें ज्यादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे रिश्तेदार बहुत भावनात्मक शोषण करते हैं। घर में किसी को गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार हैं वो पहले आ कर कहते हैं “अरे आल इंडिया नहीं ले जा रहे हो? पी.जी.आई. नहीं ले जा रहे हो? टाटा इंस्टीटियट मुंबई नहीं ले जा रहे हो? आप कहोगे नहीं ले जा रहा हूँ, अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नहीं कर सकते, माँ के लिए इतना नहीं कर सकते। ये बहुत खतरनाक लोग होते हैं। हो सकता है कई बार व मासूमियत के साथ कहते हो, उनका मकसद खराब नहीं होता है लेकिन उनक जानकारी कुछ भी नहीं है, बिना जानकारी के वो सलाह पर सलाह देते जाते हैं और कई बार अच्छा खासा पढ़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में, रोगी क भी गंवाता और पैसा भी जाता है।

कैसर के लिए क्या करें? हमारे घर में कैसर के लिए एक बहुत अच्छी दवा है, अब डॉक्टरों ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नहीं थे उसका नाम है – “हल्दी”। हल्दी कैसर ठीक करने की ताकत रखती है, हल्दी में एक कैमिकल है सका नाम है कर्कुमिन और ये ही कैसर सेलों को मार सकता है, बाकि कोई कैमिकल बना नहीं दुनिया में और ये भी आदमी ने नहीं भगवान ने बनाया है। हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीज में हैं वो हैं देशी गाय के मूत्र में। गोमूत्र माने देशी गाय के शरीर से निकला हुआ सीधा साधा मूत्र जिसे सती के आठ परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो। तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे।

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अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी तथा आधा चम्मच पुनर्नवा चूर्ण तीनों को मिला के गर्म करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना। कमरे के तापमान में आने के बाद रोगी को चाय की तरह पिलाना हैं.... चुस्कियां ले ले कर सिप कर करके पीयें, इससे अच्छा नतीजा आयेगा।

इस दवामें सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता हैं, जर्सी का मूत्र कुछ काम नहीं आता। और देशी गाय काले रंग का हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता हैं इन सब में। इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा) सही अनुपात में मिला के उबाल के ठंडा करके कांच के पात्र में स्टोर करके रखिए पर बोटल को कभी फ्रिज में मत रखिये, ये दवा कैसर के सेकंड स्टेज में और कभी-कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अच्छे परिणाम देती हैं। जब स्टेज थर्ड क्रास करके चौथी स्टेज में पहुँच जाये तब परिणाम में सफलता की प्रतिशतता थोड़ी कम हो जाती हैं और अगर आपने किसी रोगी को कैम्पोथेरेपी दे दिया तो फिर इसका कोई असर नहीं आता। कितना भी पिला दो कोई परिणाम नहीं आता। आप यदि किसी रोगी को ये दवा दे रहे हैं तो उससे पूछ लीजिए, जान लीजिए कहीं कैम्पोथेरेपी शुरू तो नहीं हो गयी? अगर शुरू हो गयी हैं तो आप उसमें हाथ मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता हैं करने दीजिए, आप भगवान से प्रार्थना कीजिए उसके लिए, इतना ही करे। और अगर कैम्पोथेरेपी शुरू नहीं हुई हैं और उसने कई ऐलपैथी ईलाज शुरू नहीं किया तो आप देखेंगे इसके चमत्कारिक परिणाम आते हैं। ये सारी दवाई काम करती हैं शरीर प्रतिकारक शक्ति पर। हमारी जो जीवनी शक्ति हैं उसका सुधार करती हैं। हल्दी को छोड़कर गोमूत्र और पुनर्नवा शरीर की जीवनी शक्ति को ताकतवर बनाती हैं और जीवनी शक्ति के ताकतवर होने के बाद कैसर के सेलों को खत्म करती हैं।

ये त बात हुई कैसर की चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैसर आए ही ना ये और भी अच्छा हैं। तो जिन्दगी में आपको कभी कैसर ना हो उसके लिए एक बात याद रखिए आप खाना बनाने में जो तेल इस्तेमाल करते हैं वो रिफाईड तेल या डालड़ा ना हो, ये देख लीजिए दूसरा जो भी खाना खा रहे हैं, उसमें रेशेदार भोजन का हिस्सा ज्यादा हो जैसे –छिलके

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वाली दालें, छिलके वाली सब्जियाँ, चावल भी छिलके वाला, अनाज भी छिलके वाला तो आप निश्चित रहें आपक कभी कैसर नहीं होगा।

और कैसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तीन कारण हैं रासयनिक खाद और कीटनाशक दवाओं वाला अनाज, तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट, गुटका आदि जैसी चीजों का प्रयोग।

कैसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती हैं चाहे वो डॉक्टर हो विशेषज्ञ हो या वैज्ञानिक हो कि इससे बचाव इसका उपाय है। महिलाओं में आजकल बहुत कैसर हो रहे हैं गर्भाशय के, स्तन के और ये काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले गांठ (ट्यूमर) होती है फिर वो कैसर में बदल जाता है। माता और बहनों को क्या करना है कि जिंदगी में कभी (ट्यूमर) ही ना आए। आप के लिए सबसे अच्छा बचाव का काम है जैसी ही आपके शरीर के किसी भी हिस्से में किसी रसौली या गांठ का पता चले तो सावधान हो जाइये। हालांकि सभी गांठ या रसौली कैसर नहीं होती है। 2 या 3 प्रतिशत ही कैसर में बदलती है। लेकिन आप के पास इस रसौली या गांठ को ठीक करने की दुनिया की सबसे अच्छी दवा है – “चूना”। चूना वही जो पान में खाया जाता है। पान वाले की दुकान से चूना ले आइये , यह चूना एक गेहूँ के दाने के बराबर प्रतिदिन खाइये, दही में मिला कर, लस्सी में मिला कर, छाछ या मट्टा में मिला कर, दाल में मिलाकर , सब्जी में मिलाकर या पानी में मिलाकर खा लीजिए। अधिक से अधिक तीन महीने तक।

ध्यान रहे पथरी के रोगी चूना नहीं खा सकते।

प्रमुख स्त्री रोग

महिलाओं के शरीर की आंतरिक रचना पुरुषों से एकदम अलग होती है और काफी जटिल होती है। इसलिए महिलाओं में कुछ विशेष रोग होते हैं जो पुरुषों में नहीं होते। क्योंकि महिलाओं को इन सब रोगों के बारे में चर्चा करने में संकोच होता है।

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❖ श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया)

महिलाओं की योनि से सफेद रंग का तरल पदार्थ निकलना 'श्वेत प्रदर' कहलाता है। यह कभी भी निकलता रहता है तथा काफी दुर्गंध पूर्ण रहता है। इसकी वजह से शरीर में दर्द रहता है और शरीर दुर्बल भी होता जाता है।

  • ● प्रातः काल पके केलों का सेवन करें और दूध में 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से काफी आराम मिलता है।
  • ● बड़ के पतों का दूध, मिश्री के साथ लेने पर तथा उसके बाद गाय का दूध लेने से यह रोग ठीक हो जाता है।
  • ● आँवले के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है।
  • ● सूखा आँवला+मुलहठी समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें और सुबह शाम शहद के साथ चाटें उसके बाद गाय का दूध पीयें।

❖ रक्त प्रदर

  • ● लौकी के बीजों को छीलकर घी में भूनें और मिश्री डालकर हलवा बनायें। प्रातः काल खाली पेट खायें लाभ होगा।
  • ● ½ चम्मच अशोक की जड़ का चूर्ण शहद के साथ चाटने से रक्त प्रदर में आराम मिलता है।
  • ● अशोक की छाल 100 ग्राम तथा सफेद चंदन, कमल का फूल, आतिस, आँवला, नागरमोथा, जीरा, चिते की छाल 50-50 ग्राम लेकर बारीक पावडर बनायें अब 10 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चाटें।
  • ● अरहर के पतों का रस पानी में घोलकर पीयें।

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❖ मासिक धर्म की अनियमितता

  • ● मैथी, गाजर और मूली के बीजों को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसें तथा 1 चम्मच चूर्ण को अशोकारिष्ट, के साथ नियमित पीयें, अनियमितता ठीक हो जायेगी।
  • ● लाल गुड़हल के फलों को कांजी के साथ पीसकर पीयें।
  • ● आम की सुखी पत्तियाँ आग में जलाकर पावडर बनायें और पानी में घोलकर पीयें बीमारी में लाभ मिलेगा।
  • ● तेजपात का काढ़ा पीने से काफी लाभ होता है।

❖ मासिक धर्म की अधिकता

  • ● धनिये का काढ़ा बनायें और छानकर पिलायें।
  • ● जामुन की हरी ताजी छाल को सूखाकर पावडर बनालें सुबह-शाम गाय के दूध में एक चम्मच मिलाकर पीयें।
  • ● असंगंध के चूर्ण को मिश्री मिलाकर पानी के साथ लेने से मासिक धर्म में आने वाले खून में कमी आयेगी।

❖ बांझपन

  • ● ढाक के पत्तों का रस गाय के दूध में मिलाकर पीने से लाभ मिलेगा। गर्भ ठहरने के बाद भी ढाक के पत्ते दूध में पीसकर पीने से ओजस्वी संतान की प्राप्ति होती है।
  • ● गाय के दूध में नागकेसर चूर्ण मिलाकर पीने से स्त्रियां जल्दी गर्भवती होती हैं।
  • ● नागकेसर और सुपारीपाक चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर नित्य सेवन करें।

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❖ गर्भावस्था

जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चुना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है और चूना कैल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है। गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए अनार के रस में – अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाकर रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिए तो चार फायदे होंगे – पहला फायदा होगा के माँ को बच्चे के जन्म के समय कोई तकलीफ नहीं होगी और नार्मल डिलीवरी होगा, दूसरा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हस्त-पुष्ट और तंदुरुस्त होगा, तीसरा फायदा वो बच्चा जिंदगी में जल्दी बीमार नहीं पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया, और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत इंटेलीजेंट होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है।

❖ बच्चे का पेट में उल्टा होना

यह एक बहुत ही गंभीर स्थिति है जिससे अधिकांश महिलाएं प्रसव के दौरान गुजरती हैं, अपने विकास काल के दौरान कभी-कभी शिशु गर्भाशय में आड़ा या उल्टा हो जाता है, यह स्थिति माता और शिशु दोनों के ही जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है। होम्योपैथी में पुनः सही कर देती हैं जिसका नाम है PULSATILA 200

❖ प्रसव में समस्या

प्रसव में देरी होने पर या गर्भ में पल रहे हैं बच्चे का आड़ा या उल्टा होने की सबसे अच्छी दवाई है जब डॉक्टर कितना भी चिल्लाये ऑपरेशन करवाओ तब आप अपने मरीज को घर ले आओ या ऐसे किसी डॉक्टर के पास मरीज को लेकर ही मत जाइए।

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गाय के गोबर और गोमूत्र एक ऐसी विशिष्ट दवा हैं जो इस प्रकार के आपात अवस्था में देने पर फौरेन अपना प्रभाव उत्पन्न करती है चाहे डॉक्टर कितना ही चिल्लाये आप किसी देशी बछड़ी का गोमूत्र और गोबर लेकर आपस में मिलाइये और उसका रस निकाल कर माँ को चार चार घंटे के अंतर में 3 बार पिला दीजिए पेट में उल्टा बच्चा भी सीधा हो जाता है और बिना किसी दर्द बच्चा बाहर आ जाता है लेकिन ये दवा 9 महीना पूरा होने के बाद होने वाले प्रसव में ही काम आती है उससे पहले ये अगर बच्चा 7-8 महीने में होता है तो ये दवा इतना काम नहीं करती है।

ये रुकी हुई प्रसव पीड़ा को पुनः प्रारंभ करती है, शिशु जन्म को सरल बनाती है, तथा गर्भ में शिशु की स्थिति को भी पुनः सही कर देती है।

❖ दमा, अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा

  • ● आधा कप देशी गाय का गोमूत्र सुबह पीने से दमा अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा सब ठीक होता है, और गोमूत्र पीने से टीबी भी ठीक हो जाता है, लगातार पांच छह महीने पीना पड़ता है।
  • ● दमा अस्थमा की और एक अच्छी दवा है दालचीनी, इसका पाउडर प्रतिदिन सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड़ या शहद मिलाकर गर्म पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है।

❖ शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट

कुछ चोट लग जाती है, और कुछ छोटे बहुत गंभीर हो जाती है। जैसे कोई डार्बिटिक पेशेंट है चोट लग गयी तो उसका सारा दुनिया जहाँ एक ही जगह है, क्योंकि जल्दी ठीक ही नहीं होता है, और उसके लिए कितना भी चेष्टा करे डॉक्टर हर बार उसको सफलता नहीं मिलता है, और अंत में वो चोट धीरे-धीरे गँभीर (अंग का सड़ जाना) में बदल जाता है और

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