भारतकोश
संग्रह पर लौटें

सम्पूर्ण चिकित्सा

Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

(उदासीन) हो जाएगी और रक्त में अम्लता न्यूट्रल(उदासीन) हो गई, तो दिल का दौरा की जिंदगी में कभी संभावना ही नहीं। ये है सारी कहानी।

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय है और हम खाये...

आपके रसोई घर में सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं, जिन्हें आप खाये तो कभी दिल का दौरा ना आए, और अगर आ गया हैं तो दुबारा ना आए।

सबसे ज्यादा आपके घर में क्षारीय चीज हैं वह हैं लोकी, जिसे दूदी भी कहते हैं। अंग्रेजी में Bottle gourd । जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं, इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है। तो आप रोज लोकी का रस निकाल-निकाल कर पियो, या कच्ची लोकी खाओ।

प्रतिदिन 200 से 300 मिलीग्राम पियो, सुबह खाली पेट (शौच जाने के बाद) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं। इस लोकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं, इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो, तुलसी बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं, पुदीना भी बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डालें, ये भी बहुत क्षारीय है। लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डालें, वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी ना डालें।

2 से 3 महीने आपकी सारी हार्ट की ब्लॉकेंज ठीक कर देगा। 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा।

लोकी परीक्षण – आप लोकी पर नाखून लगाकर देख लीजिए की नाखून पूरा अंदर जाता है या नहीं।

यदि नाखून पूरा अंदर जाता है तो लोकी असली है।

अगर नाखून पूरा अंदर नहीं जाता है और वह केवल निशान बन जाता है तो लोकी इंजेक्शन लगाई हुई है।

कोई ऑपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी, घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा। और आपका अनमोल शरीर और

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लाखों रुपय ऑपरेशन के बच जाएँगे, और पैसे बच जायेंगे। इन पैसे को आप किसी गौशाला में दान कर दे, डॉक्टर से अच्छा है किसी गौशाला में दान ने, हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा।।

होम्योपैथी चिकित्सा

आमजन के मस्तिष्क में यह बात बहुत गहराई तक बैठी हुई है कि गंभीर इमरजेन्सी से होम्योपैथिक दवा का कोई नाता नहीं है क्योंकि गंभीर इमरजेन्सी में यह नाकाम है लेकिन यह तथ्य पूर्णतः गलत है, कुछ विशिष्ट होम्योपैथिक दवाएं गंभीर इमरजेन्सी को फौरन नियंत्रित करने में सक्षम हैं।

हड्डी टूटना – हड्डी टूटने पर होम्योपैथी दवा अर्निका 1M देना है, जो दर्द को दूर करता है। अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।

अगर हड्डी टूट गई है तो टूटी हड्डी को पुनः जोड़ने के लिए अगले दिन एक दाना गेहूँ के बराबर चुना दही में मिलाकर दिन में एक बार 15 से 20 दिन तक देना है।

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❖ मोच

अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।

❖ सामान्य चोट

शरीर के किसी भी भाग में बिना रक्त निकले चोट लगने या मुड़ जाने पर या मार लगने, गिरने पर अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।

❖ खून बहने पर

शरीर पर चोट लगने से खून बहने पर होम्योपैथी दवा हाईपेरिकम 200 की 2-2 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार, यदि चोट ज्यादा है और खून बह रहा है तो हाईपेरिकम 1M 1-1 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार देना है।

❖ चोट लगने लेकिन खून ना बहने पर

अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।

❖ टिटनेस

लोहे की जंग लगी वस्तु से चोट लगने पर या वाहन से दुर्घटना होने पर टिटनेस का खतरा पैदा हो जाता है जो जानलेवा भी साबित हो सकता है, होम्योपैथी में टिटनेस के लिए दोनों विकल्प मौजूद हैं –

Hypericum 200 की 2-2 बूंद आधे घण्टे में तीन बार

❖ सांप के काटने पर चिकित्सा

सांप काटने पर नाजा 30 हर दस मिनट में 2-2 बूंद तीन बार देना है। अगर ठीक हो रहा है, तो इसी को चालू रखना है। अगर समय ज्यादा हो गया या फर्क नहीं है तो नाजा 200 की 2-2 बूंद हर दस मिनट में तीन बार देना है। ठीक होने पर कोई भी दवा नहीं देना है।

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यदि नाजा 200 से भी ठीक नहीं है तो नाजा 1M की 2 बूंद आधा कप पानी में डालकर एक चम्मच हर आधे घण्टे में तीन बार पिलाना है। अगर इससे भी ठीक ना हो तो नाजा 10M की आधा कप पानी में एक बूंद डाल कर एक चम्मच एक ही बार पिलाना है। जब नियंत्रण में आए तो गर्म पानी य मूंगदाल का उबला हुआ पानी देना है। खाना अगर देना है तो थोड़ी मूंगदाल की खिचड़ी दे सकते हैं।

❖ बिच्छू, मधुमक्खी के काटने पर, सूर्य या काटा लगने की चिकित्सा

बिच्छू के काटने पर Silicea 200 की एक बूंद 10-10 मिनट के अंतर पर तीन पर जीभ पर रखकर लेनी है। 10-10 मिनट पर एक – एक बूंद और आप देखेंगे कि वो डंक अपने आप निकल कर बाहर निकल कर आ जायेगा। सिर्फ तीन डोज में आधे घण्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते हैं।

यह दवाई और भी बहुत काम आती है। अगर आप सिलाई मशीन में काम करती हैं तो कभी-कभी सूर्य चुभ जाती है और अन्दर टूट जाती है उस समय भी आप ये दवाई ले लीजिए। ये सूर्य को भी बाहर निकाल देगी। आप इस दवाई को और भी कई परिस्थितियों में ले सकते हैं जैसे कांटा लग गया हो, कांच घुस गया हो, ततैया ने काट लिया हो, मधुमक्खी ने काट लिया हो तो ये सब जो काटने वाले अन्दर जो छोड़ देते हैं उन सब के लिए आप इसको ले सकते हैं। बंदूक की गोली लगने पर गोली को बाहर निकालने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बहुत तेज दर्द निवारक हैं और जो कुछ अन्दर छुटा हुआ है, उसको बाहर निकालने की दवाई हैं। बहुत सस्ती दवाई हैं। 5 मि.ली सिर्फ 10 रुपये की आती हैं। इससे कम से कम 50 से 100 लोगों का भला हो सकता है।

मकड़ी मलने पर – लीडम पाल 200 दिन में 3 बार

❖ पागल कुत्ता काटने पर

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कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंता मत करिए। दवा का नाम है Hydrophohinum 200 और इसको 10 – 10 मिनट पर जीभ में तीन ड्रॉप डालना है। कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दवा दे दीजिए और भूल जाइये कि कोई इंजेक्शन देना है। इस दवा को सूरज की धूप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है। रोबीज सिर्फ पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटने से रोबीज नहीं होता। आवारा कुत्तों ने अगर काट दिया है तो राजीव भाई के अनुसार आप अपना मन का बहम दूर करने के लिए ये दवा दे सकते हैं लेकिन उससे कुछ नहीं होता वो हमारा मन का बहम है जिससे हम परेशान रहते हैं, और कुछ डर डाक्टरों ने बिठा रखा है की इंजेक्शन तो लेना ही पड़ेगा। अपने शरीर में थोड़े, बहुत Resistance सबके पास हैं अगर कुत्ते के काटने से उनके लार-ग्रंथी के कुछ वायरस चले भी गये हैं तो उनको खत्म करने के लिए हमारे रक्त में काफी कुछ है और वो खत्म कर ही लेता है। लेकिन क्योंकि मन में भय बिठा दिया है शंका हो जाती है हमको यकीन नहीं होता जब तक 20000-50000 खर्च नहीं कर लेते ये उस समय के लिए राजीव भाई ने ये दवा लेने की बात कही है। और इसका एक-एक ड्रॉप 10-10 मिनट में जीभ पर तीन बार डाल के छोड़ दीजिए। 30 मिनट में ये दवा सब काम कर देगा।

कई बार कुत्ता घर के बच्चों के साथ खेल रहा होता है और गलती से उसका कोई दाँत लग गया तो आप उस जख्म में थोड़ा हल्दी लगा दीजिए पर साबुन से उस जख्म को बिल्कुल मत धोये नहीं तो वो पक जायेगा, हल्दी Antibiotic, Antipyretic, Antititanatic, Antiinflammatory है।

❖ हार्ट अटैक

हार्ट अटैक (हृदय घात) जैसी गंभीर इमरजेंसी में होम्योपैथिक दवा ACONITE 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है। अगर आपने इतना भी कर दिया तो रोगी की जान बच जायेगी, आगे रोगी को कहीं भी हॉस्पिटल में ले जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।

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❖ डायरिया, उल्टी या दस्त होने पर

NUX VOMICA 200 2-2 बूंद दिन में तीन बार सुबह, दोपहर व शाम को दो तीन दिन चालू रखना हैं।

हरिया के लिए NUX VOMICA 1M 1-1 बूंद दिन में तीन बार प्रत्येक एक-एक घण्टे से फिर वापिस 15 दिन या फिर 15 दिन बाद तीन महीने तक।

❖ घात जाने पर

NUX VOMICA 1M सुबह खाली पेट प्रत्येक 1-1 घण्टे में तीन बार देना है।

❖ अपेन्डेक्स(Appendix)

NUX VOMICA 200 रात के भोजन के एक घण्टे बाद 2 बूंद फिर तीन दिन बाद 2 बूंद (दस बार तक ले सकते हैं)

या

NUX VOMICA 30 – प्रतिदिन रात को एक बूंद

SULPHAR 200 – हफ्ते में एक दिन सुबह-दोपहर-शाम एक – एक बूंद दिन में तीन बार

नोट – अस्थमा के मरीज को कभी भी सल्फर नहीं देना

❖ स्वपन दोष

NUX VOMICA 200 रात को सोते समय 2 बूंद हर तीन दिन बाद फिर से ले सकते हैं। प्रतिदिन नहीं।

❖ पीलिया

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हेपेटाईटस A,B,C,D,E के ईलाज

गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस के साथ पान में लगाकर दिन में एक बार 10 से 12 न तक लेना हैं।

पीलिया होने पर NUX VOMICA 30 की 2-2 बूंद दिन में तीन बार 10 से 12 दिन तक लेना हैं।

यदि पीलिया रोग की शुरुआत में ही रोगी को ऐकोनाइट औषधि दी जाए तो इससे पीलिया को रोग पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

BERBERIS VULGARIS (Mother Tincher) की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/4) कप गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में चार बार (सुबह-दोपहर-शाम और रात) को लेना हैं।

❖ बवासीर, फिस्टला या भगन्दूर होने पर

एक केले के बीच से चीरा लगाकर चूना बीच में रख दें, फिर इसे खाए इससे बवासीर एकदम ठीक हो जाती है साथ में देशी गाय का मूत्र भी पीयें।

यदि रोग बढ़ गया है तो आपको साथ में ये होम्योपैथिक दवा भी खाना होगा

NUX VOMICA 30 – रोज रात को एक बूंद

SULPHAR 200 – हफ्ते में एक दिन सुबह – दोपहर-शाम एक-एक बूंद दिन में तीन बार

❖ गंभीर लकवा होने पर, रोगी को शरीर में सुन्नता, छूने पर कोई संवेदना नहीं होना, नसों में जकड़न

नसों में जकड़न और पक्षाघात या Paralysis में एक दवा का नाम है, RHUSTOX – 30 जिस दिन पक्षाघात आता है रोगी को 15-15 मिनट पर तीन बार दो-दो बूंद मुंह में दें और इसी RHUSTOX -30 को लगातार करते हुए रोज सुबह, दोपहर, शाम दें साथ में एक और दवा है।

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CAUSTICUM 1M जिस दिन RHUSTOX – 30 दिया दूसरे दिन CAUSTICUM 1M की दो-दो बूंद तीन बार दें। और CAUSTICUM – 1M को RHUSTOX – 30 के आधे घंटे बाद देना है। ये RHUSTOX – 30 रोज की दवाई है, पर CAUSTICUM – 1M को हफ्ते में एक दिन दो-दो बूंद तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) देनी है। ऐसे करके पक्षाघात के रोगी को दवा देंगे तो कोई एक महीने में ठीक हो जायेगा कोई 15-20 दिन में ठीक हो जायेगा, किसी को 45 दिन लगेगें और ज्यादातर दो महीने से ज्यादा नहीं लगेगे ठीक होने में। अगर किसी को Paralysis आने के 15 दिन या एक महीने बाद से दवा दिया जाये तो वो रोगी तीन महीने में ठीक हो जाते हैं, तीन महीने से ज्यादा समय नहीं लगता।

❖ मिरगी

RHUSTOX - 30 को लगातार करते हुए रोज सुबह, दोपहर, शाम दें साथ में एक और दवा है। CAUSTICUM 1M जिस दिन RHUSTOX – 30 दिया दूसरे दिन CAUSTICUM 1M की दो-दो बूंद तीन बार दें। और CAUSTICUM – 1M को RHUSTOX – 30 के आधे घंटे बाद देना है। ये RHUSTOX – 30 रोज की दवाई है, पर CAUSTICUM – 1M को हफ्ते में एक दिन दो-दो बूंद तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) देनी है।

एक दाना गेहूँ के बराबर चूना दही में मिलाकर दिन में एक बार 15 से 20 दिन तक देना है। CALCAREA PHOS 3X की 4 – 4 गोलियों को दिन में 3 बार रोगी को दे साथ में मिल सके तो नाक में सोते सम देशी गा का घी भी जरूर डालें।

❖ न्युमोनिया

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न्यूमोनिया में होम्योपैथिक दवा ACONITE 200 की 2 बूंद कप पानी में डालकर एक चम्मच में दिन में तीन बार पिलाना हैं, केवल 1 ही दिन देना हैं।

❖ आँखों के रोग

  • ➤ आँख की पलकों पर गुहेरी के लिए – स्टेसिफेगिरिया 30 या हिपर सल्फ 1M
  • ➤ निकट दृष्टि दोष के लिए – फाइसोस्टिगमा 3X या 6 दिन में 3 बार
  • ➤ रतौंधी – फाइसोस्टिगमा 3X या 6 दिन में 3 बार
  • ➤ मोतियाबिंद – फॉस्फोरस 200 सप्ताह में 1 बार तथा कल्केरिया फ्लोर 6 या 12X दिन में 3 बार
  • ➤ दिनोंधी (यानि दिन में ना देख पाना) - बोथरौप्स 30 , दिन में 3 बार और फॉस्फोरस 200 सप्ताह में 1 बार

❖ आवाज बैठना

  • ➤ पूरी तरह आवाज बैठने पर – अर्जेंमैट 30 , दिन में 3 बार
  • ➤ ठंडी चीज खाने पर आवाज बैठना – हिपर सल्फ 30 , दिन में 3 बार

❖ सौन्दर्य और होम्योपैथी

कई बार मस्से, त्वचा का ज्यादा खुरदरापन या चिकनाहट, अनचाहे बाल, बालों का असमय सफेद होना, त्वचा पर धब्बे, कील, मुँहासे, आँखों का अंदर को धंसे होना, आदि के कारण व्यक्ति कुरूप नजर आने लगता हैं।

  • ➤ खुशकी व खुरदरी त्वचा के लिए जब खारिश के बाद दर्द महसूस हो – सोराइनम 30 या 200
  • ➤ औरतों में आँखों के चारों ओर काले धब्बे जब किसी पुराने दुःख के कारण हो – स्टेफिसेगिरिया 30 या 200

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  • ➤ चेहरा पीला व साथ में चेहरे व सीने पर पीले या भूरे धब्बे – सीपिया 30 या 200
    • ➤ रक्त की कमी के कारण पीलापन- फेरम मैट 3X
    • ➤ त्वचा का रंग साफ करने के लिए – सरसापेरिला 30
    • ➤ चेहरे पर निशान जो फोड़े-फुंसियों या मुहासों, आदि के कारण हो- साइलीशिया 6X व काली फॉस 6X
    • ➤ चेहरे पर चेचक के दाग – वैरिओलिनम 200, सारासिनिया 30, थायोसिनैमिनम 2X

❖ भूख न लगना

खाना हजम न होना, कभी दस्त, कभी कब्ज, मुंह में पानी आना आदि।

  • ➤ जब कोई खास कारण पता न चले – लैसिथिन 3X , दिन में 3 बार
  • ➤ थोड़ा सा खाने से ही पेट भर जाए, गर्म खाना पीना अच्छा लगे, मीठा खाने की इच्छा, पेट में गैस भरी रहती हो- लाइकोपीडियम 30, दिन में 3 बार

❖ जीभ व मुंह के छाले

आमतौर पर कब्ज होने की वजह से मुँह व जीभ में छाले हो जाते हैं।

  • ➤ मुँह में छाले, जिनमे बहुत दर्द हो- हिपर सल्फ 30 , दिन में 3 बार या बोरेक्स की 2 बूंद

❖ छोटी माता

यह ज्वर तथा फैलने वाली छूत की बीमारी हैं, इसमें अनेक पारदर्शी साव भरे दाने होते हैं।

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  • ➤ रोग के शुरू होने पर तेज बुखार व बेचैनी – एकोनाइट 6 या 30 , दिन में 4 बार
    • ➤ दानों में जब बहुत खुजली हो – रस टाक्स 6X या 30 , दिन में 3 बार

❖ सर्दी जुकाम

  • ➤ जब सूखी ठंडी हवा लग कर रोग आया हो, ठंडक महसूस होना, सिर दर्द, आँखों से पानी, छीकें आना, सूखी खांसी, बार-बार बेचैनी तथा भय, खुली हवा में अच्छा लगता है – एकोनाइट 30 , 3-4 खुराक दिन भर में दे
  • ➤ चिड़चिड़ापन, तेज सर दर्द के साथ नजला जुकाम, नाक से बहुत पानी बहने के साथ होठ सुखा होना – ब्रायोनिा 30 , दिन में 3-4 बार

❖ कब्ज

  • ➤ साधारण कब्ज में – नक्स वोमिका 30 , रोज सोते समय 4 बूंद, एवं सल्फर 30 रोज सुबह 4 बूंद
  • ➤ मल बहुत कड़ा एवं आंव लिपटा हुआ हो – ग्रेफाइटिस 30 , दिन में 3 बार

❖ खांसी

  • ➤ नई सूखी खांसी, खासकर रात में बढ़ जाना, गले के भीतर खरखराहट, ठंडा पानी पीने की इच्छा – एकोनाइट 30 , 2-3 घंटे के अंतर पर
  • ➤ सुखी या बलगम वाली खांसी, सर्दी लगने से बढ़ने वाली, पुरानी खांसी, दिन में कफ अधिक निकलना – हिपर सल्फर 30 , दिन में 3 बार

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  • ➤ सीने में बलगम जमा होने पर भी न निकलना, साँस लेने में कष्ट, खाँसते खाँसते उल्टी जैसा होना, हाथ पाव अकड़ जाना, हाफने लगना – इपेकाक 30, ऍटीम टार्ट 30 दिन में 3-4 बार

❖ दमा

  • ➤ एकाएक तेज दमे का आक्रमण – एकोनाइट Q, इपिकैक Q , 10-10 बूंद पहले 1 घंटे के अंतर से अदल-बदल कर व आराम आने पर 3-3 घंटे के बाद दे।
  • ➤ दमा के प्रकोप को कम करने के लिए, जब दम घुटे, सांस ठीक से न ली जाए – ब्लैटा ओ Q, सेनेगा Q, गिंड़ीलिया Qकैशिया सोफोरा Q बराबर मात्रा में मिला कर दें।

❖ दस्त

  • नक्स वोमिका 30 , दिन में 3 बार

❖ दिमागी कमजोरी

बहुत जटिल व पुरानी बीमारिया, जिनमें रोगी की जीवनी शक्ति क्षीण हो जाती है, स्नायुमंडल कमजोर हो जाता है, बहुत ज्यादा मानसिक परिश्रम, हस्तमैथुन, वंश परंपरा से आये दोष, आदि की वजह से दिमागी कमजोरी उत्पन्न हो सकती है।

प्रमुख दवा – एसिड फॉस Q , 5-10 बूंद पानी के साथ दिन में 3 बार

❖ कान का दर्द

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  • ➤ जब अचानक ठण्ड लग जाने से कान दर्द शुरू हुआ हो – एकोनाइट 30, हर 2 घंटे में
    • ➤ असहनीय दर्द जो गर्म सेक से बढ़े – कैमोमिला 30, हर 2 घंटे पर
    • ➤ अचानक दर्द शुरू होने पर – बेलाइडोना 30, हर 2 घंटे पर

❖ एग्जीमा

  • ➤ त्वचा खुशक, व छिछड़ेदार रोगी के आँख की पलकें, कान, नाक के अगले हिस्से लाल हो – सल्फर 30, दिन में 2-3 बार
  • ➤ त्वचा पर दाने व फुंसियों के कारण अत्याधिक खुजली हो – रस टाक्स 30, दिन में 3 बार
  • ➤ एग्जीमा की बायोकेमिक दवा – कैल्केरिया सल्फ 6X, दिन में 4 बार

❖ अनिद्रा

  • ➤ कैल्केरिया कार्ब 30, दिन में तीन तीन घंटे के अंतराल में सेवन

❖ मुँह, दांत और गले के रोग

  • ➤ मसूढ़े सूजकर मुलायम हो गये हो, मुह से बदबू – मर्क सौल 6
  • ➤ मसूढ़े फूलना व उसमे पस निकलना – सिस्टस 30
  • ➤ मुँह में लार बनना बंद हो जाना, गला सूख जाना – नक्सवोमिका 6
  • ➤ किसी भी प्रकार दांतों का दर्द – प्लैण्टेगो 3X व प्लैण्टेगो के मदरटिचर को मसूढ़ो पर लगाने से लाभ मिलता है।
  • ➤ हलकापन दूर करने के लिए – स्टैमोनियम 30

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  • ➤ गले से संबंधित विभिन्न लक्षण जैसे- गला खुशक होना, गले में दर्द, लार को निगलने की इच्छा, टॉसिल का भीतर तथा बाहर से सूज जाना और दर्द होना – मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति का प्रयोजन करना चाहिए।
    • ➤ मोटापे के लिए – ऐमोन-ब्रोम की 3X मात्रा, कैल्केरिया-कार्ब की 3 से 6 शक्ति तथा कैल्के आर्स की प्रति 2 ग्रेन मात्रा प्रत्येक 8 घंटे में सेवन करें।

❖ पेट के रोग

  • ➤ पेट दर्द के लिए – ऐकोनाइट 30
  • ➤ पेट के कीड़ों के लिए – स्टैनम 6 या 30
  • ➤ पेट के सभी रोगों के लिए – नक्सवोमिका 30

❖ पुरुष रोग

  • ➤ शरीर और मन की सुस्ती, शरीर कमजोर होना, जननेन्द्रिया की कमजोरी, स्वप्रदोष पीडित के लिए – एग्रस कैक्टस 6 शक्ति
  • ➤ कामवासना पर नियंत्रण न रख पाना, हस्तमैथुन करने पर मजबूर होना – ओरिगैनम 3 शक्ति
  • ➤ संभोग क्रिया में सफल न होना, नपुंसकता आ जाने पर – फास्पोरस 30 या 200 शक्ति
  • ➤ नपुंसकता व वीर्यपात दूर करने के लिए – लाइकोपोडियम 30 या 200 या 1M

❖ चोट, मोच, फोड़ा तथा फुंसियां

  • ➤ दाद से पीड़ित रोगी को बैसीलीनम औषधि की 30 शक्ति पहले एक सप्ताह तक सेवन करना चाहिए, इसके बाद इस औषधि की 200 शक्ति का प्रयोग सप्ताह में एक बार 4 सप्ताह तक करना चाहिए और फिर महीने में एक बार इस औषधि की 1M मात्रा का प्रयोग 5-6 महीने तक करना चाहिए। इस औषधि से

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दाद ठीक होने का साथ सिर में रूसी समाप्त हो जाती हैं एवं बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।

  • ➤ चेहरे के मुहासों को दूर करने के लिए – कैलि-ब्रोम 30
  • ➤ चेहरे पर फुंसियां होने पर, नाक, ठोड़ी पर फुंसियां होने पर – ऐस्टोरियास-रूबेन्स 6 शक्ति
  • ➤ यदि रोगी के चेहरे पर होने वाली फुंसियों की काफी चिकित्सा करवाने के बाद भी कोई लाभ नहीं – आर्स-आयोडाइड 3X
  • ➤ गर्म प्रकृति के रोगियों के बाल झड़ने पर – फ्लोरिक ऐसिड 6 या 30 शक्ति
  • ➤ उम्र से पहले बाल सफेद होने पर – ऐसिड फास
  • ➤ बालों में रूसी, खुशकी, पपड़िया जम जाना, खुजली होना – मेजेरियम 6 या 30 शक्ति
  • ➤ सिर में रूसी के साथ, बालों का बहुत अधिक मात्रा में झड़ना – फॉस्फोरस 30 शक्ति

❖ अर्थराइटिस

  • ➤ गठिया रोग की शुरुआत में – ऐकोनाइट 30
  • ➤ रोगी में अचानक ही गठिया दर्द होने पर, उसके जोड़ों में तेज दर्द होता है - 2 चम्मच गर्म पानी में 5 बूंद अटिका यूरेन्स , हर 4 घंटे के अन्तर पर। इसके साथ गर्म पट्टी पर कोलचिकम औषधि के मूलार्क को 20-25 बूंद की मात्रा डालकर दर्द वाले स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

❖ पित्त रोग

  • ➤ त्वचा पर लाल, पीले रंग के चकत्तेदार दाने होना, खुजली होना – एपिस औषधि की 1x, 3x या 6 शक्ति का उपयोग करें। 2 दिन बाद लाभ न मिले तो क्लोरेलम औषधि की 3x मात्रा का सेवन करें। औषधि का सेवन 8 घंटे के अंतर में करें।

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  • ➤ त्वचा पर चकत्तेदार दाने व डंक मारने जैसा दर्द – अर्टिका 3X हर चार घंटे में सेवन
    • ➤ पित्त पथरी में दर्द होने के साथ जिगर में भी दर्द होना – कार्डीयस-मेरियेनम मदर टिचर औषधि की 5 से 10 बूंद की मात्रा दिन में 3 – 3 घंटे के अंतराल पर ले।
    • ➤ पित्त की पथरी के किसी भी लक्षणों के लिए एवं दर्द कम करने के लिए – अर्निका 3X या 6 शक्ति

❖ अन्य होम्योपैथिक दवाइयां

  • ➤ चाय छोड़ने के लिए – ARSENIC 200
  • ➤ गुटखा, तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी छोड़ने के लिए – PHOSPHORUS 200
  • ➤ बुखार के लिए – OCIMUM 200
  • ➤ पथरी के लिए – BERBERIS VULGARIS
  • ➤ बिस्तर पर पेशाब करना – पल्साटिला 30
  • ➤ मूत्रनली में जलन व दर्द होने पर – अर्निका 3X
  • ➤ मूत्र अवरोध के लिए – CANTHRIS – 200 की 2-2 बूंद दिन में 3 बार
  • ➤ डायरिया व फूड़ प्वायजनिंग होने पर – NUX VOMICA – 200 , 2-2 बूंद, 3 बार

❖ सौन्दर्यवर्धक नुस्खे

सौन्दर्य प्रसाधनों के दिन-दूने रात चौगुने बढ़ते बाजार को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग सुन्दरता के लिए कितने परेशान हैं। स्त्री पुरुष यहाँ तक कि नई पीढ़ी के बच्चे तक सुन्दर दिखने के लिए मेकअप के नए-नए तरीके आजमाने में लगे हैं। सुन्दरता के प्रति इतनी जागरूकता शायद पहले कभी नहीं रही। यदि इतनी ही जागरूकता

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समूचे स्वास्थ्य को लेकर लोगों में होती तो चिन्ता की विशेष बात नहीं थी। लेकिन दुर्भाग्य से लोग स्वास्थ्य के प्रति पूरी मनमानी करते हुए भी कृत्रिम प्रसाधनों के सहारे अपना सौन्दर्य निखारना चाहते हैं। अब कौन समझाय कि हँसना और गाल फुलाना, दोनों एक साथ नहीं हो सकते हैं। यदि कुछ लोग यह सोचते हैं कि वे स्वास्थ्य के प्रति पूरे लापरवाह रहकर भी अपने सौन्दर्य की हिफाजत कर लेंगे तो निरा भ्रम के ही शिकार हैं। बाजारू सौन्दर्य प्रसाधनों का नकली आवरण असलियत को कितनी देर छुपाएगा? वास्तव में सच्चे सौन्दर्य का रहस्य तो अच्छे स्वास्थ्य में ही छुपा हैं। स्वास्थ्य निखरेगा तो सौन्दर्य में अपने आप निखार आ जायेगा, यह तय हैं।

कहने का सीधा सा अर्थ यह है कि अगर सौन्दर्य चाहिए तो स्वास्थ्य को सही-सलामत रखने का इन्तजाम भी अनिवार्यता करना ही पड़ेगा। अब सवाल यह हो सकता है कि स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए किया क्या जाए? तो इसका सीधा सा उत्तर है कि दिनचर्या सुधार ली जाए, तो बहुत कुछ ठीक हो जाएगा।

दिनचर्या में आहार, निद्रा और व्यायाम पर ध्यान देना सबसे महत्वपूर्ण बातें हैं। जिन्हें अपने सौन्दर्य – रक्षा की चिन्ता है उन्हें शुद्ध सात्विक शाकाहार अपनाना चाहिए। दाल, चावल, गेहूँ, जौ, बाजरा आदि विविध अन्नों के साथ हरी साग,-सब्जी, फल व सलाद की समुचित मात्रा अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। यह जरूरी नहीं है कि स्वास्थ्य सुधारने के लिए आप महींगे फल-मेवे की तरफ ही भागें। मौसम के अनुसार मिलने वाले ढेरों सस्ते फल, सब्जियाँ आदि हैं जिनका उपयोग अपनी शारीरिक प्रकृति को देखते हुए किया जाए तो स्वास्थ्य-रक्षा का काम बखूबी हो सकता है।

आहार के विषय में यह ध्यान देने वाली बात है कि वर्तमान में जो लोगों की दिन भर कुछ न कुछ खाते रहने की आदत बढ़ रही है, यह गलत है। इसके अलावा 'फास्ट फूड' संस्कृति ने आहार के मामले में और भी ज्यादा भ्रष्टाचार फैला दिया है। अगर अपने स्वास्थ्य व सौन्दर्य की हिफाजत करनी है तो इन आदतों को भी सुधारना ही पड़ेगा। दिन भर में मुख्य भोजन सिर्फ दो बार करना ही सेहत की दृष्टि से उचित है।

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यदि दोपहर 12 बजे तथा शाम 8 बजे के आस-पास भोजन करने की आदत हो तो सबेरे 8 बजे और तीसरे पहर 4 बजे के आस-पास हल्का सुपाच्य नाश्ता लिया जा सकता है। वैसे शाम का भोजन सूर्यास्त तक कर लेना श्रेयस्कर है। जो लोग दोपहर का भोजन जल्दी करते हैं, वे सबेरे नाश्ते की आदत न बनायें तो अच्छा है। भोजन के साथ ढेर सारा पानी पीने की भी लोगों की अक्सर गलत आदत देखने को मिलती है। यह आदत एक न एक दिन पाचन संबंधी विकारों का कारण अवश्य बनती है। भोजन में यदि रोटी आदि सूखी चीजें ज्यादा मात्रा में हों, तो ही बीच-बीच में यदा-कदा एकाध घूंट पानी लिया जा सकता है, अन्यथा भोजन के कम से कम डेढ़ दो घंटे बाद ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना उचित है। स्वास्थ्य की दृष्टि से दिन भर में कम से कम 7-8 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए। दोपहर के भोजन के बाद आधा घंटा विश्राम तथा रात के भोजन के बाद लगभग आधा घंटा टहलने की आदत स्वस्थ के लिए लाभप्रद है।

आहार के बाद निद्रा पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। रात देर तक जागने तथा सवेरे देर तक सोने की आदत आजकल आम बात हो गई है। यदि कोई विशेष विवशता न हो तो रात 10 बजे तक सो जाना तथा सवेरे 4-5 बजे तक जाग जाना आदर्श स्थिति है। अलबत्ता, कुछ लोगों की शारीरिक प्रकृति ऐसी भी हो सकती है, जिन्हें नींद का समय कुछ कम या ज्यादा भी करना पड़ सकता है। सामान्य नियम यह है कि जितनी नींद से मन और शरीर में प्रफुल्लता और ताजगी बनी रहे, उतनी नींद पर्याप्त है।

आहार और निद्रा के बाद व्यायाम अथवा शारीरिक श्रम सबसे जरूरी चीज है। शरीर को सुडौल तथा कार्यश्रम बनाए रखने के लिए व्यायाम वास्तव में अनिवार्य है। जो लोग व्यायाम या शरीर श्रम पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते वे पौष्टिक आहार का भी उचित लाभ नहीं ले सकते। खाया पिया शरीर में अच्छी तरह हो, इसके लिए व्यायाम या श्रम जरूरी है। स्वास्थ्य और सौन्दर्य रक्षा के लिए प्रतिदिन एकाध घंटे का समय व्यायाम के लिए अवश्य दिया जाना चाहिए। योगासन-व्यायाम की किसी अच्छी पुस्तक से इस विषय में जानकारी ली जा सकती है। बेहतर

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हैं कि किसी योगासन- व्यायाम केन्द्र या विशेषज्ञ व्यक्ति से उचित विधि से प्रशिक्षण लेने के बाद ही इसे दिनचर्या में शामिल किया जाए।

अन्त में स्वास्थ्य और सौन्दर्य की दृष्टि से ब्रह्मचर्य पालन पर भी किंचित संकेत कर देना आवश्यक है। वैसे ब्रह्मचर्य के व्यापक अर्थों में आहार, निद्रा, व्यायाम जैसी चीजें भी शामिल हैं, परन्तु यहाँ ब्रह्मचर्य का उल्लेख वीर्य-रक्षा के विशेष अर्थ में किया जा रहा है। विवाहित लोगों के लिए सिर्फ इतना संकेत पर्याप्त है कि अगर उन्हें स्वास्थ्य और सौन्दर्य को बरकरार रखना है तो वे स्त्री-संसार के मामले में ऋतुगामी बनें, अर्थात् अति करने से बचें और संयम से काम लें। सांस्कृतिक मूल्यों के अनुसार जो ऋतुगामी हैं वह समझिए कि ब्रह्मचारी ही हैं। अविवाहित युवाओं के लिए तो खैर हर प्रकार से ब्रह्मचर्य पालन अनिवार्य है। भारतीय संस्कृति में यदि 25 वर्ष की आयु तक ब्रह्मचर्यपूर्वक विद्या प्राप्ति का संदेश दिया गया है तो इसका वास्तव में बहुत व्यापक उद्देश्य है। जिसने युवावस्था में ब्रह्मचर्य का मन, वचन, कर्म से समुचित पालन किया, उसका पूरा जीवन ही सौन्दर्यता से परिपूर्ण, आनन्दमय और तेजस्वी हो जाता है। महापुरुषों के जीवन-चरित्र पढ़ने से इसके ढेरों प्रमाण मिल जाते हैं। आज अगर उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रवाह के चलते ब्रह्मचर्य विनाश की परिस्थितियाँ दिख रही हैं तो यह हम सबके लिए ही चिन्ता का विषय होना चाहिए। यहाँ पृष्ठ सीमा के नाते ब्रह्मचर्य पालन की विस्तार से चर्चा न करके सिर्फ कुछ संकेतिक बातें ही कही गई हैं। वैसे जिनको ब्रह्मचर्य पालन का वैज्ञानिक तरीके से महत्व जानना हो, उन्हें डॉ. सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार लिखित 'ब्रह्मचर्य-संदेश' नामक पुस्तक एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए।

चेहरे को सुन्दर बनाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे

दरअसल चेहरे के सौन्दर्य का असली अर्थ यह है कि चेहरा स्वस्थ हो तथा ओज और ताजगी से परिपूर्ण रहे। चेहरे के स्वास्थ्य और सौन्दर्य सुधारने का यह भी अर्थ नहीं है कि यह कोई एकदम से अलग विषय है। सही बात यह है कि अगर आपका शरीर स्वस्थ है तो स्वास्थ्य की झलक चेहरे पर भी दिखाई ही देगी। हाँ, थोड़ी अतिरिक्त देखभाल करके चेहरे की चमक, दमक और रौनक अवश्य बढ़ायी जा सकती हैं।

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  • ➤ चेहरे पर काली मिट्टी का लेप लगाएं, यह ऊपरी चिकनाहट दूरकर मृत त्वचा को हटाती है।
    • ➤ नीम की जड़ को महीन पीसकर लेप करने से मुहोंसे जल्दी ठीक होते हैं।
    • ➤ एक छोटा चम्मच जौ का आटा, आधा चम्मच चंदन पाउडर, चुटकी भर हल्दी लेकर नींबू के रस में घोल बनाएं तथा चेहरे पर लगाकर आधे घण्टे बाद धो लें।
    • ➤ पहले चेहरा ठण्डे पानी से धो ले और फिर गर्म पानी में तौलिय गीला करके चेहरे पर रखकर भाप सेंक करें। इसके तुरंत बाद ठण्डे पानी में भीगा तौलिया चेहरे पर रखें। चेहरे को तैलीय न होने दें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुहोंसों से आसानी से छुटकारा मिल जाएगा।
    • ➤ त्वचा का स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आँवला, कच्चा नारियल, मक्खन-मिश्री, सलाद, संतरें जैसी चीजें विशेष लाभप्रद हैं। चूने के पानी का शर्बत त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसको बनाने का तरीका यह है कि खाने का चूना पानी में भिगोकर 4-5 दिन तक रख दें। इसे दिन में 2-3 बार साफ लकड़ी से हिलाकर चला दिया करें। पाँचवें दिन ऊपर का निथरा हुआ पानी अलग कर लें। इसमें शक्कर मिलाकर शर्बत योग्य चाशनी बनाकर ठण्डा करके बोटल में भर लें। इस शर्बत को भोजन के बाद दोनों समय एक-एक चम्मच की मात्रा में 40 दिनों तक सेवन करना चाहिए।
    • ➤ जिन महिलाओं के चेहरे व होंठों के ऊपर घने रोएं हों। उन्हें बेसन, मैदा, शहद और नींबू का रस 1-1 चम्मच लेकर एक में मिलाकर चेहरे पर लेप करना चाहिए। लेप सूखने लगे तो मसलकर छुड़ा दें। इस प्रयोग से धीरे-धीरे अनावश्यक बालों की समस्या से निजात मिल जाएगी। इसके अलावा चेहरे की त्वचा भी मुलायम, चिकनी और चमकीली बन जाएगी।
    • ➤ नींबू का रस और तुलसी के पत्तों का रस समान मात्रा में मिलाकर झाँइयों पर लगाने से झाँइयों से मुक्ति मिल जाती है। इससे मुहोंसों भी समाप्त होते हैं।

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