भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

DevanagariHindipublished316 पृष्ठ

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कारेणोक्तं 'तल्लब्धिर्विवेकविमोकाभ्यासक्रियाकल्याणानवसादा- नुद्धर्षेभ्यः सम्भवान्निर्वचनाच्च' इति । तत्र विवेको नामादुष्टान्नात् सत्त्वशुद्धिः, अत्र निर्वचनम्-आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः सत्त्वशुद्धौ ध्रुवा स्मृति" इति । विमोकः कामानभिष्वङ्ग शान्त उपासी- तेति निर्वचनम् । पुनः पुनः संशीलनमभ्यासः । निर्वचनञ्च स्मार्त्तमुदाहृतं भाष्यकारेण-'सदा तद्भावभावितः' इति । श्रौत- स्मार्त्तकर्मानुष्ठानं शक्तितः क्रिया क्रियावानेष ब्रह्मविदां वरिष्ठ इति निर्वचनम् । सत्यार्जवदयादानादीनि कल्याणानि सत्येन लभ्य इत्यादि निर्वचनम् दैन्यविपर्ययोऽनवसाद नायमात्मा बलहीनेन लभ्यत इति निर्वचनम् । तद्विपर्ययजा तुष्टिरनुद्धर्षः शान्तो दान्त इति निर्वचनम् । तदेवमेवंविध नियमविशेषसमा- सादितपुरुषोत्तमप्रसादविध्वस्ततमःस्वान्तस्य अनन्यप्रयोजनान- वरतनिरतिशयप्रियवदात्मप्रत्ययावभासतापन्नध्यानरूपया भ- क्त्या पुरुषोत्तमपदं लभ्यत इति सिद्धम् ॥ ४७ ॥ (भक्तिस्तु इति) निरतिशय आनन्द प्रिय और अनन्यप्रयोजन तथा इतर समस्त विषयोंसे वैराग्यरूप ज्ञानविशेषा भक्ति है तादृश ध्रुवानुस्मृतिरूप भक्तिकी सिद्धि विवेकादिसे होती है विवेक, विमोक, अभ्यास, क्रिया, कल्याण, अनवसाद, अनुद्धर्ष, यही विवेकादिक हैं जातिदुष्ट कलञ्जादि और आश्रयदुष्ट गणिकान्नादिमें ओर उच्छिष्ट या केशादिनिमित्तदुष्ट इन तीनों प्रकारके अन्नोंको छोडकर शुद्ध अन्नसे शरीरकी शुद्धिको विवेक कहते हैं क्योंकि आहारशुद्धिसे चित्तकी शुद्धि होती है ओर चित्तकी शुद्धिसे ध्रुव स्मृति होती है । कामादिमें आसक्तिके त्यागको विमोक कहते हैं क्योंकि शान्त अर्थात् रागद्वेषरहित होकर उपासना करें ऐसी श्रुति कहती है बारबार परिशीलनका नाम अभ्यास है । सदा परमात्मानुसन्धान करें इस प्रकार स्मृति कहती हे शक्तिके अनुसार पञ्चमहायज्ञादिका अनुष्ठान क्रिया है क्योंकि जो क्रियावान् है वह ब्रह्मज्ञानियोंमें श्रेष्ठ हे ऐसे श्रुति कहती है सत्य आर्जव दया ओर दानका नाम कल्याण हे सत्यसे ब्रह्मप्राप्ति होती है ऐसी श्रुति हे चित्तके अदेन्यको अनवसाद कहते हैं (नायमात्मेत्यादि) श्रुति इसका निर्वचन है चित्तके जो दैन्य है