भारतकोश
सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary

भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा

DevanagariHindipublished837 पृष्ठ

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त्रयोदशः परिच्छेदः ३०९ ६. मुशल का ध्यान—जो मुशल उदर से कृश है तथा रश्मिज्वाला से चमकीला है । अङ्गार राशि के समान है और अत्यन्त लम्बा तथा महानिष्ठुर (निर्दयी) है ॥ १४ ॥ ७. इषु का ध्यान—जो इषु नीले कमल के समान श्यामवर्ण वाला है, जिसकी आकृति बाण के समान है, उसके अनेक रूप हैं । वह बड़ा तीक्ष्ण है, भुजायें विशाल हैं तथा जो प्रचण्ड पराक्रम से युक्त है ॥ १५ ॥ ८. धनुष का ध्यान—जो कार्मुक सुवर्ण के समान गोरा है, जिसमें अनेक किङ्किणियाँ जड़ी हुई हैं, जो महान् जलद के समान अपने हाथों को स्फोटित कर शब्द करता रहता है ॥ १६ ॥ ९. नन्दक का ध्यान—प्रकाश समूह के व्याप्त नृत्यमान भगवान् के नन्दक का ध्यान करे, जिसकी कान्ति शारदीय आकाश के समान अत्यन्त स्वच्छ है तथा जो क्रोध से उत्कृष्ट होकर अपने दाँतों को पीस रहे हैं ॥ १७ ॥ १०. खेटक का ध्यान—सूर्यमण्डल के समान अत्यन्त तेजस्वी सौम्य स्वरूप खेटक का ध्यान करे जो निरन्तर बलपूर्वक अपने मुख से अस्त्र समूहों को ग्रसते रहते हैं ॥ १८ ॥ ११. दण्ड का ध्यान—लाल वर्ण वाले रक्त एवं नेत्रों वाले मुट्ठी बाँधे हुए भगवान् के उस दण्ड का ध्यान करे जो क्रोध की साक्षात् मूर्ति हैं और अपने दाँतों से अपने ही अधर को चबाते रहते हैं ॥ १९ ॥ १२. परशु का ध्यान—इन्द्र के धनुष के समान वर्ण वाले एवं प्रचण्ड विक्रमयुक्त भगवान् के परशु का ध्यान करना चाहिये, जिनके कनकरूपी नेत्र सदा द्रवीभूत रहते हैं तथा जो जलती हुई ज्वालायुक्त जटा धारण किये हुए हैं ॥ २० ॥ १३. पाश का ध्यान—बिजली के समान देदीप्यमान जिह्वा वाला, महा- भयानक साँप के फणों से सर्वत्र व्याप्त, भगवान् के पाश का स्मरण करे, जो सर्प पङ्क्ति के समान पाण्डर (= पीत) वर्ण का है, जिसका मुख महाभयानक तथा नेत्र अत्यन्त रक्त है ॥ २१ ॥ १४. अङ्कुश का ध्यान—विशीर्ण कज्जल गिरि के समान खण्डित, महा- रौद्र, विकराल मुख वाले, कुशाङ्ग, दीर्घबाहु तथा पीले मुख वाले भगवान् के अङ्कुश का स्मरण करे ॥ २२ ॥ १५. मुद्गर का ध्यान—मोटे-मोटे कन्धों वाले, स्थूल शरीर से युक्त एवं शतधाम (सुवर्ण) के समान आभा वाले भगवान् के मुद्गर का स्मरण करे, जो जटा कलाप धारण किये हुए हैं, सौम्य है तथा जिनके नेत्र कमल के समान दीर्घ है ॥ २३ ॥