शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 253, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ेंएकादश पटल ] [ २५५ प्रागुक्तमन्त्रसम्प्रोक्तान्प्रयोगाःमनुनाऽमुना । तैरस्तिन्नथवा प्रोक्तात् कुर्यान्मन्त्री विधानवित् ।१०६ पञ्चांतको विदुयुतो यामकर्णविभूषितः । तारादिहृदयांतोऽयं हेरम्बमनुरीरितः ।१०७ चतुर्वर्णांतमकी नृणां चतुर्वर्गफलप्रदः । षड्दीर्घभाजा बीजेन षडंगानि ममाचरेत् ।१०८ मुक्ताकाञ्चननीलकुन्दघुसृणच्छायैस्त्रिनेत्रान्वितै- र्नानास्यैर्हरिवाहन शशिधर' हेरम्बमर्कप्रभम् । दृप्तं दानमभीतिमोदकदर टङ्क' शिरोक्षात्मिकां मालां मदनमङ्कुशं त्रिशिखकदोभिर्दधान भजे ।१०६ लक्षत्रय जपेन्मन्त्र दशांशं जुहुवात्तिलैः । तीव्रादिपूजिते पीठे देवं हेरम्बमर्चयेत ।११० प्रणवः कवचद्वन्द्व' महासिंहाय ग ततः । हेरम्बेति पद पश्चादासनाय हृदन्वितः ।१११ अयमासनमत्रः स्यातत्रदंद्यादमुनाऽऽसनम् । तारादिविघ्नबीजेन मूर्ति तस्य प्रकल्पयेत ।११२ विधान का ज्ञाता मन्त्रधारी पुरुष इस मन्त्र के द्वारा पूर्व में कहे हुये प्रयोगों को अथवा इसमें कहे हुओं को उसके द्वारा करे ।१०६। पञ्चान्तक-गकार, नाम नेत्र, ऊकार, जो बिन्दु से युत हो, प्रणव आदि में हो और हृदय अन्त में-ऐसा हेरम्ब का मन्त्र कहा गया है ।१०७। यह चार वर्णोंके स्वरूप वाला मन्त्र है जो चतुर्वर्गके फल को देने वाला होता है। षट् दीर्घक् बीज के द्वारा छं अङ्गों का समाचरण करना चाहिए ।१०८। ध्यान—मुक्ता, काञ्चन नील कुन्द घुसृण-कुंकुम के सदृश कान्ति वाले नाग के मुखों से युक्त-तीन नेत्रों से समन्वित- हरि के वाहन वाले-चन्द्र के धारी-सूर्य की प्रभा से मुक्त— दृप्त, दान-अभय-मोद करोंमें धारण करने वाले-अक्षमाला, मदन-अंकुज और त्रिलिश को धारण करने वाले हेरम्बका मैं भजन करता हूँ ।१०६।