भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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२६६ ] [ श्रीशारदा तिलक वामोरुन्यस्ततद्धस्तस्तदधस्तो दक्षिणेन धृताऽभयाः । अम्बुजाड्यकरोभानुर्दंष्ट्राभीममुख शनिः ।११ राहुविकृतवक्त्रः स्यात्केतुः स्याद्विहिताञ्जलिः । लोकपालास्ततः पूज्या वज्राद्यस्रैः सह क्रमात् ।१२ एवं सिद्धमनुर्मंत्री सम्पदां वसतिर्भवेत् । हृत्पुण्डरीकमध्यस्थं तारविभूषितम् ।१३ तारापतिं स्मरन्मंत्री त्रिसहस्रं मनु जपेत् । राज्यैश्वर्यं दरिद्रोऽपि प्राप्नुयाद्वत्सरान्तरे ।१४ पूर्वोक्तसंख्यं प्रजपेत् शशिनं मूर्ध्नि चिन्तयन् । रोगापमृत्युदुःखानि जित्वा वर्षशतं वसेत् ।१५ ब्रह्मचर्यरतः शुद्धश्चतुलंक्षमिमं जपेत् । निधानंभुगतं सद्यः प्राप्नुयाद्यत्नवर्जित ।१६ अपने प्रियतम में समासक्त मन वाली ओर मदके विभ्रर्मों से मन्थर जरोजाक्षी ओर चन्द्र विम्व के समान मुखों वालियों का भली भाँति अभ्यर्चन करना चाहिए ।८। रवि, मङ्गल, बुध, शनि, गुरु, राहु, शुक्र, केतु ये ग्रह दलों के अग्र भागों में पूजने चाहिए ।६। ये स्वर्णवर्णों वाले वस्त्रों से संजित हैं और अपने नाम के आद्य वर्ण के बीजों वाले हैं। इनका वर्ण रक्त, पीत, अरुण, श्वेत, नील, धूम्र, सित और असित है ।१०। ये अपने वाम हस्त को वामोरु पर रखे हुए हैं और दाहिने हाथ में अभय दान धारण करने वाले हैं। भानु के करमें अम्बुज है-दाढ़ों से भयानक मुख वाला शनि है । विकृत मुख वाला राहु होता है । केतु अञ्जलिको विहित करने वाला है-इसके अनन्तर क्रम से वज्र आदि अस्त्रों के सहित पूजने चाहिए ।११२। इस रीति से मन्त्र सिद्ध करने वाला मन्त्रधारी सम्पदाओं का निवास स्थान हो जाता है। हृदय कमल के मध्य में स्थित, मुक्तहार से अलंकृत तारापति का स्मरण करता हुआ दो हजार मन्त्र का जप करे । तो दरिद्र पुरुष भी एक ही वर्ष के बीच में राज्य और ऐश्वर्य को प्राप्त कर लियाँ करता है ।१३।