भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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अष्टादश पटल ] [ ४२७ ध्यायेन्नीलाद्रिकान्तं शशिशकलधरं मुण्डमालं महेश दिग्वस्त्रं पिङ्गकेशं डमरुमथशृणि खङ्गपाश शूलाऽभयानि नाग घण्टाङ्कपालं करसरसिरुहैर्बिभ्रतं भीमदंष्ट्रम् । सर्वाकल्पं त्रिनेत्रं मणिमयविलसत्किंकिणीनुपुराढ्यम् ।५४ सात्विकं ध्यानमाख्यात मयमृत्यु निवारणम् । आयुरारोग्यजनन मपवर्ग फलप्रदम् ।५५ अब क्रम से तीनों ध्यानों को बतलाया जाता है - स्फटिक के सदृश-केशों से शोभित मुख वाले नौरत्नों से परिपूर्ण दिव्य आभ- रणों से और किंकणी नूपुर आदि से भूषित-दीप्त आकार वाले- स्वच्छ एवं विशाल वस्त्रो से संयुक्त-परम प्रसन्न-तीन नेत्रों से युक्त कर कमलों के द्वारा शूल और दण्ड को धारण करने वाले वटुक की निरन्तर वन्दना करता हूं ।५२। उदीयमान भुवन भास्कर के समान प्रभा से समन्वित-तीन नेत्रों से युक्त-रक्त अंगराग और माला धारण करने वाले-हास्य युक्त मुख से अन्वित-वरदान दाता करों द्वारा कपाल-अभयदान और शूल को धारण करने वाले - नील ग्रीवा से युक्त-उत्तम सैकड़ों भूषणों से विभूषित-चन्द्र से समुज्ज्वल चूड़ा वाले-बन्धूक पुष्प के तुल्य अरुण वस्त्रों को पहिने हुये- भयके हरने वाले देवकी सदा भावना करता हूँ ।५३। नीलगिरिके समान कान्त चन्द्र के खण्ड को धारण करने वाले-मुण्डों की माला पहिने हुये-दिशाओं के वस्त्र वाले-पिङ्ग वर्ण के केशों से अन्वित-कर कमलों के द्वारा डमरू-शृणि खड्ग-पाश् अभयदान-नाग-घण्टा- कपाल को धारण करने वाले भीषण दाढोंसे युक्त-सर्पोंके भूषणों से भूषि-तीन नेत्रों से युक्त मणियों से पूर्ण एवं शोभित किंकिणी ओर नूपुरों से आढ्य महेश का ध्यान करना चाहिये ।५४। यह सात्विक ध्यान अपमृत्यु का निवारक कहा है और आयु तथा आरोग्य का जनम ओर अपवर्गके फल का होता है ।५५।