भारतकोश
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण

Shrimad Valmiki Ramayana

महर्षि वाल्मीकि द्वारा

DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ

पृष्ठ 44, कुल 2621 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 44

५७- हनुमान्जीका समुद्रको लाँघकर जाम्बवान् और अङ्गद आदि सुहृदोंसे मिलना ५८- जाम्बवान्के पूछनेपर हनुमान्जीका अपनी लङ्कायात्राका सारा वृत्तान्त सुनाना ५९- हनुमान्जीका सीताकी दुरवस्था बताकर वानरोंको लङ्कापर आक्रमण करनेके लिये उत्तेजित करना ६०- अङ्गदका लङ्काको जीतकर सीताको ले आनेका उत्साहपूर्ण विचार और जाम्बवान्के द्वारा उसका निवारण ६१- वानरोंका मधुवनमें जाकर वहाँके मधु एवं फलोंका मनमाना उपभोग करना और वनरक्षकको घसीटना ६२- वानरोंद्वारा मधुवनके रक्षकों और दधिमुखका पराभव तथा सेवकोंसहित दधिमुखका सुग्रीवके पास जाना ६३- दधिमुखसे मधुवनके विध्वंसका समाचार सुनकर सुग्रीवका हनुमान् आदि वानरोंकी सफलताके विषयमें अनुमान ६४- दधिमुखसे सुग्रीवका संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरोंका किष्किन्धामें पहुँचना और हनुमान्जीका श्रीरामको प्रणाम करके सीता देवीके दर्शनका समाचार बताना ६५- हनुमान्जीका श्रीरामको सीताका समाचार सुनाना ६६- चूड़ामणिको देखकर और सीताका समाचार पाकर श्रीरामका उनके लिये विलाप ६७- हनुमान्जीका भगवान् श्रीरामको सीताका संदेश सुनाना ६८- हनुमान्जीका सीताके संदेह और अपने द्वारा उनके निवारणका वृत्तान्त बताना

(युद्धकाण्ड)

१- हनुमान्जीकी प्रशंसा करके श्रीरामका उन्हें हृदयसे लगाना और समुद्रको पार करनेके लिये चिन्तित होना २- सुग्रीवका श्रीरामको उत्साह प्रदान करना ३- हनुमान्जीका लङ्काके दुर्ग, फाटक, सेनाविभाग और संक्रम आदिका वर्णन करके भगवान् श्रीरामसे सेनाको कूच करनेकी आज्ञा देनेके लिये प्रार्थना करना ४- श्रीराम आदिके साथ वानर-सेनाका प्रस्थान और समुद्र-तटपर उसका पड़ाव ५- श्रीरामका सीताके लिये शोक और विलाप ६- रावणका कर्तव्य-निर्णयके लिये अपने मन्त्रियोंसे समुचित सलाह देनेका अनुरोध करना