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श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
Shrimad Valmiki Ramayana
महर्षि वाल्मीकि द्वारा
DevanagariHindipublished2,621 पृष्ठ
पृष्ठ 2621स्थायी लिंक
जो रामायणकाव्यके श्लोकके एक चरण या एक पदका भक्तिभावसे श्रवण करता है, वह ब्रह्माजीके धाममें जाता है और सदा उनके द्वारा पूजित होता है॥ २४ ॥
इस प्रकार इस पुरातन आख्यानका आपलोग विश्वासपूर्वक पाठ करें। आपका कल्याण हो और भगवान् विष्णुके बलकी जय हो॥ २५ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें एक सौ ग्यारहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १११ ॥