भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( २१० )

दधि श्रुत श्रोदन दूध, मधुर पक्वान मलाई । नित प्रति सेवन करे, रहे बहु मोद बढाई ॥ बहु बिधि ज्ञानी नर जग भए, वे नहि मन कर सके बस । यदि होवहिं तो गिरिबिन्द्य जनु, उदधि मध्य उतराहि तस ॥६४॥

सार—जब विश्वामित्र और पराशर जैसे मुनि स्त्रियोंके माया-जालमें फँस गये, तब और कौन बच सकता है ?

65. Vishwamitra, Parashara and others who lived upon air, water and dry leaves only (they also) became captivated as soon as they saw the charming lotus-like faces of women. Surely then if those who live upon rice mixed with ghee, butter and milk, can be successful in controlling their passions, Vindhya mountains would float on the ocean.

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संसारेऽस्मिन्सारे कुतुपतिश्रुवनद्वारसेवावलम्ब- व्यासंगवस्तवैर्व कथममलवियो मानसं संनिद्धुः॥ यथेतः मोद्यदिन्दुयुतिनिचयश्रुतो न स्युरम्भोजनेत्राः प्रेक्षत्कांचीकलापाः स्तनभरविनमन्मध्यभागास्तस्ययः ॥६६॥

स्त्री-त्यागकी प्रशंसा ।

अगर इस असार संसारमें, पूर्ण चन्द्रमाकी सी कान्तिवाली, कमलकी सी आँखो वाली, कमरमें लटकती हुई कर्चनी पहने वाली,

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