भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

Devanagarihipublished544 पृष्ठ

पृष्ठ 387, कुल 544 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 387

( ३२८ )

सार—स्त्रीका दिल पत्थरसे बना है और उसमें विष भरा है ; इसीसे उसमें वफ़ादारी नहीं, किन्तु निर्दयता, छल, कपट, दगाबाज़ी और फरेब प्रभृति दुर्गुण भरे हैं ।

82. There is sweetness in the speech of a woman and poison in her heart ; therefore, the lips are tasted and the breasts are pressed by the fist.

—✻—

एक स्त्रीकी परले सिरैकी वेवफ़ई ।

—◊◊◊—

अपूर्व विद्याचरित ।

प्राचीन कालमें, अमरावती नामकी एक नगरी बहुत ही उन्नत दशामें थी । चारों दिशाओंसे व्यापारी देश-देशोंका माल लेकर वहाँ आते थे और उस प्रान्तका माल दूर देशोंमें ले जाते थे । व्यापारकी वजहसे उस नगरकी समृद्धि दिनरात बढ़ती थी । उस नगरमें सैकड़ों करोड़पति थे । लखपतियोंकी तो गिन्ती ही न थी । शहरके सारे साहूकारोंमें रतनसेन नामका एक साहूकार सबसे अधिक धनी था । उसे कोई खरबपति और कोई खरबपति कहता था । उसका धन-वैभव देख्दर, धनेश-कुवेर लाजके मारे मुह छिपाकर, हिमाचलके एक अश्रुल्लमें जा छिपा था । आजकलके अमेरिकन धन-कुवेर रॉकफेलर,