शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
पृष्ठ 89, कुल 544 में से
संदर्भ में पढ़ें( ७२ )
18. O learned men, tell us without any jealousy and with fair consideration whether it is desirable to dwell on and enjoy the middle part of a mountain or to enjoy the hips or charming buttocks of an amorous woman smiling with the excess of passion.
—*
संसारेऽस्मिन्नसारे परिणितिरले द्वे गतीं पण्डितानां तत्त्वज्ञानामृताम्भः कृतललितधियां यातु कालः कदाचित् ॥ नो चैन्मुग्धाङ्गनानां स्तनजवनभराभोगसंभोगिनानां स्थूलोपस्थस्थलीषु स्थगितकरतलस्पर्शलोलेयतानाम् ॥१६॥
इस असार संसारमें, जिसकी अन्तिम अवस्था अतीव चञ्चल है, उन्हीं बुद्धिमानोंका समय अच्छी तरह कटता है, जिनकी बुद्धि तत्त्वज्ञान रूपी अमृत-सरोवरमें बारम्बार गोते लगानेसे निर्मल हो गई है अथवा उन्हींका समय अच्छी तरह अतिवाहित होता है, जो नवयौवनाओंके कठोर और स्थूल कुचों एवं सवन जङ्घाओंको सकाम स्पर्श कर, कामदेवका सुख उपभोग करते हैं ॥१६॥
खुलासा—इस मिथ्या और चञ्चल संसारमें या तो उन्हींके दिन अच्छी तरह व्यतीत होते हैं, जो ब्रह्म-विचारमें लीन रहते हैं अथवा उन्हींके दिन अच्छी तरह कटते हैं, जो सख्त् और मोटे-कुचों तथा गुदगुदी जङ्घाओंवाली नवयुवतियोंको अपने शरीर से चिपटाये, काम की उमङ्गसे मस्त होकर, उनके भोग-विलास का आनन्द लूटते हैं।