शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन
Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan
श्रीमती हिमांशु द्विवेदी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतब भूत छोड़कर चला गया। यह भूत से मुक्त हो गयी ऐसा कह कर राजा ने ब्राह्मण को कन्या और आधा राज्य दे दिया। ब्राह्मण भी पूर्णमनोरथ होकर (अपने घर) गया।
कथा- 47
"करगरानाथ की कथा"
करगरा का पति राजकन्या के साथ राजलक्ष्मी का उपभोग करने लगा। इसी समय भूत ने 'कर्णावती' नगर पहुँचकर वहाँ के राजा की भार्या सुलोचना, जो मृगावती नगर के राजा मदन की बुआ थी, को पकड़ लिया। शत्रुघ्न राजा की भार्या सुलोचना ने अपनी पीहर के केशव मान्त्रिक को बुलाया। अनिच्छुक केशव को विनय पूर्वक लाने के लिए राजा मदन ने अपने दूतों को भेजा। तब वह करगरापति भार्या के अनुरोध पर गया। वहाँ पहुँचने पर शत्रुघ्न राजा से सम्मानित हो सुलोचना के महल गया। भूत ने कठोर वाक्यों में ब्राह्मण से कहा- मैंने अपना वचन निभाया अब तुम अपनी रक्षा करो। तुम मन्त्र-तन्त्र कुछ नहीं जानते।
ब्राह्मण ने भूत से कहा मैं करगरा पति हूँ, करगरा भी यहाँ आयी है। यह सुनकर भूत चला गया। सुलोचना के स्वस्थ होने पर ब्राह्मण मृगावती नगर को चला गया।
कथा- 48
"मन्त्री शकटाल व दो घोड़ियों की कथा"
पाटलिपुर नगर में नन्द नाम का चक्रवर्ती राजा था, शकटाल उसक मुख्य सचिव था। उसने राजा को धर्म का विनाश तथा पृथिवी को द्रव्यहीन करने से रोका जिसके कारण उस मूर्ख राजा ने उस मन्त्री को पुत्रों समेत अन्धकूप में डलवा दिया।
तब बंगाल के राजा ने, शकटाल की मृत्यु हुई या नहीं इसका पता लगाने के लिए अपने सेवकों को दो घोड़ियाँ देकर नन्द के पास भेजा और उन्हें आदेश दिया
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