सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें" -> Wait, look at line 26: "च भूगोल उपरितनभाग एवैष संनिवेश इति नापि तु गोलपृष्ठेऽभितस्तेषां यथायोग्यं संनिवेश" Wait, does it say "भूगोल उपरितनभाग" or "भूगोलोपरितनभाग"? Look at line 26: 'च' space 'भू' 'गो' 'ल' space 'उ' 'प' 'रि' 'त' 'न' 'भा' 'ग' Yes, "भूगोल उपरितनभाग".
Let's check line 29: "धारिणीतिश्रुतेर्भगोलान्तः-" Yes, "धारिणीतिश्रुतेर्भगोलान्तः-".
Let's check line 31:
"नात्पृथिवीद्वयसत्त्वेन भचक्रचलनासंभवाच्च न स्वाश्रयीभूतभूमिभिन्नो गोलान्तर्भू मिगोल"
Wait, "गोलान्तर्भू मिगोल" has a space between 'भू' and 'मि'.
Let's transcribe it faithfully as गोलान्तर्भू मिगोल or गोलान्तर्भूमिगोल?
In original, there's a slight space, but it's one word: गोलान्तर्भूमिगोल or गोलान्तर्भू मिगोल. Let's write गोलान्तर्भू मिगोल.
Let's check the header:
३० on the left, `गोला