भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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or an avagraha or a correction? Wait, look atइत्यपिthenमाthen(ना): Wait, is it इत्यपि मानं न ग्रहगणि-? No, there are parentheses: (and). Inside is ना! Wait, why मा(ना)? Wait, look at the text: इत्यपि मा (ना): Could it be इत्यपि मा(ना) ग्रहगणि-? Wait, look at line 6: तादावुपजीव्यत्वान्नाऽऽदृतमिति-> "गणितादावुपजीव्यत्वान्नाऽऽदृतमिति" =गणितादौ + उपजीव्यत्वात् + न + आदृतम् + इति. "न आदृतम्" -> "नाऽऽदृतम्"! So the "न" is already in "नाऽऽदृतम्"! Then what is "इत्यपि ..."? "इत्यपि मानं न ग्रहगणितादौ..." no, "इत्यपि मानाद् ग्रहगणितादौ..."? Wait, look at इत्यपि: After इत्यपि, the text is: माfollowed by? Wait, look at the glyph: +? No, it's