सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें: Wait, look above धं in "युक्तकलाधं": there is an anusvara dot, and maybe a tiny curve to the right? No, compare with "भागार्धं" in L11: 'र्धं' has a clear repha curve. In L6, it's just 'धं'. But wait, let's look closely: "युक्तकलाधं" or "युक्तकलार्धं"? It looks like "युक्तकलाधं" or maybe the repha didn't print. I will write "युक्तकलाधं" or "युक्तकल[र्]धं"? Let's write "युक्तकलाधं" as printed. Wait, let's look at L11: "भागार्धं" has a clear repha. In L6, it really looks like "युक्तकलाधं".
Line 7: स्युः । कलाविकलयोरन्तरं त्रियुक् । प्रथमाक्षरप्राधान्यत्रिषट्संख्या द्वितीयाक्षररेफस्त्वि-
Line 8: कारवदप्रयोजकः । तत्संख्याया अग्रहात् । आर्यभटेन स्वग्रन्थे द्वितीयसंयुक्तअक्षरसंख्याया Wait! Look at "द्वितीयसंयुक्तअक्षरसंख्याया": Is it "द्वितीयसंयुक्तअक्षरसंख्याया" or "द्वितीयसंयुक्ताक्षरसंख्याया"? Letters: द्वि ती य सं यु क्त ा क्ष र सं ख्या या -> "द्वितीयसंयुक्ताक्षरसंख्याया" (with an 'aa' matra