भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 1047, कुल 1406 में से

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पृष्ठ 1047
१०१८* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

नरकोंकी आगमें तपाओ और इन्हें पापोंसे शुद्ध करो।' तब वे दूत शीघ्र उठकर उन राजाओंके पाँव पकड़ लेते हैं और वेगपूर्वक घुमाते हुए उन्हें खूब तपी हुई भूमिपर फेंक देते हैं और लोहेके वृक्षोंपर भी पटक देते हैं। उन प्रहारोंसे जर्जर होकर वे राजा अचेत और निश्चेष्ट हो जाते हैं। फिर वायुका स्पर्श होनेपर वे धीरे-धीरे सचेत होते हैं। तब उन्हें पापसे शुद्ध करनेके लिये यमदूत नरकके समुद्रमें डाल देते हैं। नरकोंकी अट्ठाईस श्रेणियाँ हैं, जो सातवें पातालके अन्तमें घोर अन्धकारके भीतर स्थित हैं। (१) अतिघोरा, (२) रौद्रा, (३) घोरतमा, (४) अत्यन्त दुःखजननी, (५) घोररूपा, (६) तरणतारा, (७) भयानका, (८) कालरात्रि, (९) घटोत्कटा, (१०) चण्डा, (११) महाचण्डा, (१२) चण्डकोलाहला, (१३) प्रचण्डा, (१४) वराग्निका, (१५) जघन्या, (१६) अवरालोमा, (१७) भीषणी, (१८) नायिका, (१९) कराला, (२०) विकराला, (२१) वज्रविंशति, (२२) अस्ता, (२३) पंचकोणा, (२४) सुदीर्घा, (२५) परिवर्तुला, (२६) सप्तभौमा, (२७) अष्टभौमा और (२८) दीर्घमाया—ये ही नरकोंकी अट्ठाईस कोटियाँ हैं। इन सबके क्रमशः पाँच-पाँच नायक होते हैं। इनमें पहला रौरव है, क्योंकि उसमें पड़े हुए प्राणी रोते रहते हैं। दूसरा महारौरव है, जिसकी दुःसह पीड़ाओंसे महान् साहसी भी रो देते हैं। तीसरा तम, चौथा शीत और पाँचवाँ उष्ण है—इस प्रकार पहली कोटिके ये पाँच नायक माने गये हैं। दूसरी कोटिके १ अघोर, २ तीक्ष्ण, ३ पद्म, ४ संजीवन और ५ शठ—ये पाँच नायक हैं। तीसरी कोटिके नायक हैं—१ महामाय, २ विलोम, ३ कण्टक, ४ कटक और ५ तीव्र। चौथी कोटिके नायक १ वाम, २ कराल, ३ किंकरल, ४ प्रकम्पन और ५ महाचक्र हैं। पाँचवी कोटिके नायक १ सुपद्म, २ कालसूत्र, ३ प्रगर्जन, ४ सूचीमुख और ५ सुनेमि हैं। छठी कोटिके नायक १ खादक, २ सुप्रपीडित, ३ कुम्भीपाक, ४ सुपाक और ५ क्रकच हैं। सातवीं कोटिके नायक १ सुदारुण, २ अंगाररात्रि, ३ पचन, ४ असृक्पूयभव तथा ५ सुतीक्ष्ण हैं। आठवीं कोटिके १ शुण्ड, २ शकुनि, ३ महासंवर्तक, ४ ऋतु और ५ तप्तजन्तु—ये पाँच नायक हैं। नवीं कोटिके नायक १ पंकलेप, २ पूतिमान्, ३ हृद, ४ त्रपु और ५ उच्छ्वास हैं। दसवीं कोटिके नायक १ निरुच्छ्वास, २ सुदीर्घ, ३ क्रूर, ४ शाल्मलि और ५ उष्ट्रित हैं। ग्यारहवीं कोटिके नायक १ महानाद, २ प्रवाह, ३ सुप्रवाहन, ४ वृषाश्रय तथा ५ वृषश्व हैं। बारहवीं कोटिके १ सिंहानन, २ व्याघ्रानन, ३ गजानन, ४ श्वानन और ५ सूकरानन—ये पाँच नायक हैं। तेरहवीं कोटिके नायक १ अजानन, २ महिषानन, ३ मेषानन, ४ मूषकानन तथा ५ खरानन हैं। चौदहवीं कोटिके १ ग्राहानन, २ कुम्भीरानन, ३ नक्रानन, ४ महाघोर और ५ भयानक—ये पाँच नायक हैं। पंद्रहवीं कोटिके नायक १ सर्वभक्ष, २ स्वभक्ष, ३ सर्वकर्मा, ४ अश्व तथा ५ वायस हैं। सोलहवीं कोटिके नायक १ गृध्रोलूक, २ उलूक, ३ शार्दूल, ४ कपि और ५ कच्छुर हैं। सत्रहवीं कोटिके १ गण्डक, २ पूतिवक्त्र्य, ३ रक्तास्य, ४ पूतिमूत्रिक और ५ कणधूम्र—ये पाँच नायक हैं। अठारहवीं कोटिके नायक १ तुषाराग्नि, २ कृत्रिमान्, ३ निरय, ४ आतोद्य और ५ प्रतोद्य हैं। उन्नीसवीं कोटिके नायक १ रुधिरोध, २ भोजन, ३ कालात्मग, ४ अनुभक्ष और ५ सर्वभक्षक हैं। बीसवीं कोटिके १ सुदारुण, २ कर्कट, ३ विशाल, ४ विकट और ५ कटपूतन—ये पाँच नायक हैं। इक्कीसवीं कोटिके नायक १ अम्बरीष, २ कटाह, ३ कष्टदायिनी वैतरणी, ४ सुतप्त तथा ५ लोहशंकु हैं। बाईसवीं कोटिके नायक १ एकपाद, २ अश्रुपूरण, ३ घोर असिपत्रवन, ४ प्रतिष्ठित अस्थिलिंग और ५ तिलयन्त्र हैं। तेईसवीं कोटिके १ अतसीयन्त्र, २ इक्षुयन्त्र, ३ कूट, ४ पाप तथा ५ प्रमर्दन—ये पाँच नायक हैं। चौबीसवीं कोटिके नायक १ महाचुल्ली, २ विचुल्ली, ३ तप्त लोहमयी शिला, ४ क्षुरधार

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