श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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234 श्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला 7/168-169 ] भट्टसे मिलनका वर्णन किया, जिसके श्रवणसे गौरप्रेमरूपी अनुवाद—श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी धनकी प्राप्ति होती है॥ 168 ॥ कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका वर्णन कर रहा है॥ 169 ॥ श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास ॥ 169 ॥ इति श्रीचैतन्यचरितामृते अन्त्यखण्डे वल्लभभट्टमिलनं नाम श्रीचैतन्यचरितामृतके अन्त्यखण्डमें वल्लभभट्टमिलन नामक सप्तमः परिच्छेदः। सातवें अध्यायका अनुवाद समाप्त।