श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ 9/68-74 नौवाँ अध्याय 259 कामनमयी चित्तवृत्तिसे विष्णु अथवा वैष्णवोंसे सहायताकी प्रार्थना करते हैं। सप्तशती-ग्रन्थमें देवीकी उपासनाके उद्देश्यसे वैसे भक्तिहीन चित्तसे युक्त लोगोंके लिये अनेक प्रकारकी व्यवहारिक कामसिद्धि ही फलके रूपमें कही गयी है। ये समस्त सकाम चेष्टाएँ- ज्ञानचक्षुरहित निर्बोध व्यक्तिका प्रयास मात्र है। विषयी लोग ईश्वरकी निर्मल उपासना करनेपर भी धर्म-अर्थ- काम-मोक्षरूपी अपने लौकिक-स्वार्थके द्वारा चलायमान होकर ब्रह्मज्ञानसे प्राप्त होनेवाली 'मुक्ति', स्वर्ग आदि भोग अथवा व्यवहारिक संघर्षसे छुटकारेकी आशा करके कृष्ण और कृष्णभक्तोंकी शुद्धसेवासे विमुख हो जाते हैं॥ 68 ॥ तोमार भजन-फले तोमाते 'प्रेमधन'। विषय लागि' तोमाय भजे, सेइ मूर्ख जन॥ 69 ॥ अनुवाद- केवल आपको सन्तुष्ट करनेके उद्देश्यसे आपके भजनके फलसे भक्तको आपका प्रेमधन प्राप्त होता है। किन्तु जो विषयोंको पानेकी लालसासे आपका भजन करता है, वह व्यक्ति मूर्ख है॥ 69 ॥ अनुभाष्य- आजकल स्त्री-पुत्रोंके पालन, अपने पेटको भरने, अपने स्त्री-पुत्रोंके वस्त्र-आभूषण आदिको संग्रह करनेके लिये मन्त्रका व्यवसाय करनेवाले और धार्मिक वेश लेकर जीवन पालन करनेवाले विषयी व्यक्तियोंने नामप्रचारके द्वारा लोगोंको छलनेका आश्रय किया है। वे श्रीवृन्दावन और नवद्वीपमें वास, ग्रन्थोंके विक्रयके द्वारा अपने भोजन और वस्त्र तथा स्त्री-पुत्रोंका पालन, शास्त्र-पाठको व्यवसाय बनाकर लोकरञ्जनके लिये प्रवचन, श्रीविग्रह-सेवा, दीक्षादान, भिक्षाकरण, आत्मीय लोगोंके रोगको दूर करना, वैरागी-वेश धारण, दरिद्रपूजा, सामाजिक उन्नति साधन आदि अनेक प्रकारके छल-कार्योंका विस्तार करके भक्तितत्त्वज्ञान-हीन मूर्ख लोगोंको ठगकर धनादिके अर्जनके द्वारा विषयोंका ही भजन कर रहे हैं। किन्तु आपके शुद्ध अहैतुक छलरहित भजनके फलसे ही आपके प्रति ब्रह्मादिके लिये भी दुर्लभ प्रेमधनकी प्राप्ति होती है-वे इसे समझ नहीं पाते॥ 69 ॥ महाप्रभुकी प्रीतिकी कामना करनेवाले निष्किञ्चन शुद्धभक्तगण :- तोमा लागि' रामानन्द राज्य त्याग कैला। तोमा लागि' सनातन 'विषय' छाड़िला॥ 70 ॥ अनुवाद- आपकी प्रसन्नताके लिये श्रीरामानन्द रायने राजकार्यका त्याग किया है और आपके लिये ही श्रीसनातनने समस्त विषयोंको [प्रधानमन्त्री पद आदिको] छोड़ दिया है॥ 70 ॥ तोमा लागि' रघुनाथ सकल छाड़िल। हेथाय ताहार पिता विषय पाठाइल॥ 71 ॥ तोमार चरण-कृपा हञाछे ताहारे। छत्रे मागि' खाय, 'विषय' स्पर्श नाहि करे॥ 72 ॥ अनुवाद- आपके लिये ही श्रीरघुनाथने घर-परिवार- धनादि सब कुछ छोड़ दिया। उनके पिताने उनके लिये धन-सेवकादिको भेजा, किन्तु उनपर आपके चरणकमलोंकी कृपा होनेके कारण वे उस धनको स्पर्श तक भी नहीं करते। अपितु वे छत्रमें माँगकर खाते हैं॥ 71-72 ॥ श्रीरामानन्दके अनुज गोपीनाथ सकाम व्यापारी नहीं :- रामानन्देर भाइ गोपीनाथ-महाशय। तोमा हैते विषय-वाञ्छा, तार इच्छा नय॥ 73 ॥ अनुवाद- श्रीरामानन्द रायका भाई श्रीगोपीनाथ सज्जन व्यक्ति है। उसकी आपसे किसी प्रकारके विषयको पानेकी इच्छा नहीं है॥ 73 ॥ महाप्रभुके एकान्त शरणागत गोपीनाथको प्राण-दण्ड दिये जानेके प्रयत्नको देखकर उनके हितैषी लोगोंके द्वारा महाप्रभुकी कृपाकी याचना :- तार दुःख देखि' तार सेवकादिगण। तोमारे जानाइल, -याते 'अनन्यशरण' ॥ 74 ॥ अनुवाद- गोपीनाथके दुःखको देखकर उसके कहे