श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६१० गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र संजय उवाच । § § दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा । आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥ २ ॥ पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् । व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥ ३ ॥ अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि । युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥ ४ ॥ धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् । पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुंगवः ॥ ५ ॥ युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् । सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ॥ ६ ॥ । पूर्वज कुरु नामका राजा इस मैदानको हलसे बड़े कष्टपूर्वक जोता करता था, । अतएव उसको क्षेत्र ( या खेत ) कहते हैं। जब इंद्रने कुरुको यह वरदान दिया, । कि इस क्षेत्रमें जो लोग तप करते करते या युद्धमें मर जावेंगे, उन्हें स्वर्गकी । प्राप्ति होगी; तब उसने इस क्षेत्रमें हल चलाना छोड़ दिया ( मभा. शल्य. । ५३ ) । इंद्रके इस वरदानके कारणही यह क्षेत्र धर्मक्षेत्र या पुण्यक्षेत्र कहलाने । लगा । इस मैदानके विषयमें यह कथा प्रचलित है, कि यहींपर परशुरामने । एकीस बार सारी पृथ्वीको निःक्षत्रिय करके पितृतर्पण किया था; और अर्वाचीन । कालमेंभी इसी क्षेत्रपर बड़ी बड़ी लड़ाइयाँ हो चुकी हैं । ] संजयने कहा - ( २ ) उस समय पांडवोंकी सेनाको व्यूह रचकर ( खड़ी ) देख, राजा दुर्योधन ( द्रोण ) आचार्यके पास गया; और उनसे कहा लगा, कि - । [ महाभारत ( मभा. भी. १९. ४-७; मनु. ७. १९१ ) के उन अध्यायोंमें, । कि जो गीतासे पहले लिखे गये हैं, यह वर्णन है, कि जब कौरवोंकी सेनाका । भीष्मद्वारा रचा हुआ व्यूह पांडवोंने देखा; और जब उनको अपनी सेना । कौरवोंकी सेनासे कम दीख पड़ी, तब उन्होंने युद्धविद्याके अनुसार वज्र नामक । व्यूह रचकर अपनी सेना खड़ी की । युद्धमें प्रतिदिन ये व्यूह बदला करते थे । ] ( ३ ) हे आचार्य ! पांडुपुत्रोंकी इस बड़ी सेनाको देखिये, कि जिसकी व्यूहरचना तुम्हारे बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्रने ( धृष्टद्युम्न ) की है। ( ४ ) इसमें शूर, महाधनुर्धर, और युद्धमें भीम तथा अर्जुनसरीखे युयुधान ( सात्यकि ) , विराट और महारथी द्रुपद, ( ५ ) धृष्टकेतु, चेकितान और वीर्यवान् काशिराज, पुरुजित् कुंतिभोज, और नरश्रेष्ठ शैब्य, ( ६ ) इसी प्रकार पराक्रमी युधामन्यु और वीर्यशाली उत्तमौजा