भारतकोश
सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

Subhashita Ratna Bhandagara

पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा

स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)

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२८सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां
गौरव प्राप्यते दा (सूक्ति.१८६.३) ६९।७घनैर्विलोक्य (कुमार १४ ३५) १२८।३९चण्डीजङ्घाकाण्ड ११।८
गौराङ्ग्या भुजला २६४।२३६घनोद्यमे गाढतमेऽ ३४०।१८चण्डीशचूडाम(सा द ७ १२) २८२।१४४
गौरीक्षण भूवरजा १९०।६९घनोऽय चेदभ्रेदुपरि २७६।३५चतुर सृजत (शा प १४९३) ३४८।१०
गौरी चम्पककलि(शा प ८१६) २२३।४८घर्मार्ति न तथा सु (हि १.९७) ५३।२६१चतुरङ्गबलो राजा ४४।१
गौरीचुम्बनचञ्चल (लटक १ १) ७।८८घासग्रास गृहाण (शा प ९२८) २३३।९७चतुर्थैऽहि ह्ला (शा प ३७५८) ३५१।३३
गौरीतनुर्नयनमायत ३६५।४४घूर्णन्ते तूर्णमेतत्कु १२६।२४चतुर्मुखो न च ब्रह्मा १८५।२४
गौरीनखरसादृश्य(शा प ५३५) १९४।१८घृतकुम्भसमा (पञ्च सू ५४) १६२।४०८चतुर्ष्वपि समुद्रे (शा प ४०२४) ३६२।३
गौरीपतेर्गरीयो गरल ४७।१५घृत न श्रूयते कर्णे १८१।१४चत्वार प्रथयन्तु (प्र राघव १ १)१५।३२
गौरीव पत्या सु(नैषध ७ ८३)२६५।३४९घृतलवणतेलतण्डुल (सु ३१८८) ६६।३९चत्वारो धनदा(भर्तृ स ४९०)१५६।१६४
गौर्गौ कामदुघा १६६।६०८घृष्टं घृष्टं पुनरपि पु ५१।२२९चत्वारो वयम् (वेणी १.२५) ३६१।४४
ग्रन्थिमुद्ग्रथयि (शिशु १० ६३) ३१५।२४घ्रात तालफला(सूक्ति ९७ ७२)१३२।३५चत्वार्याहु (भा २ २२७०) ३८०।१४५
ग्रसति कोऽपि विमो २७८।३५घ्रात्वा श्रोणीम (शा प ५८६) २०७।१८चन्दन शीतलं लोके ८६।६
ग्रसमानमिवौजसा (किरात ११ ५३) ७७।४चन्दन स्तनतटे (शा प ३७३९) ३२८।७
ग्रामतरुण तरु (काव्याल ७ ३९)३५१।२०चकितहरिणलो(का प्र १० ८७)३५०।४२चन्दने विषधरा (भल्लट ३२) २४२।१६५
ग्रामाणासुपशल्य (शा प ९१३) २३०।४२चकोरनेत्रेण दृगु (नैषध ७ ३२) २५९।८६चन्द्र समाश्रयति २१०।२९
ग्रामेऽस्मिन्पथि (अमरु १३१) ३७३।९२चकोराणा चन्द्र १०६।१५५चन्द्र चन्दनकर्द (सूक्ति.४४ ९) २९०।८२
ग्रामेस्मिन्प्रस्तर (कुव.१४९) ३५४।६७चक्रे सेव्यं नृ (शा प १३७८) १४६।१६१चन्द्रं चन्द्रार्धचूड ११४।२८
ग्रावाणो मणयो (भल्लट ५०) २१६।२६चक्र पप्रच्छ पा (शा प १२६१)११४।२६चन्द्रं कलङ्करहित २६२।१८६
ग्रासादर्थमपि ग्रास (पञ्च २.७३) ६९।६चक्रवरोऽपि सुरत्व ७६।३२चन्द्र क्षयी प्रकृति(विक्रम ९३) ५०।१९४
ग्रासाद्गलितसि (शा प १२०८) २३१।५७चक्र ब्रूहि विभो गदे १५।३८चन्द्रकान्तगलदम्बुना ३२३।७
ग्रीवाद्धतैर्वावड(नैषध ७ ६६) २६६।३०६चक्राङ्गो विरही (शा.प ३५९५) २९६।१०चन्द्रपादजनित (कुमार ८ ६७) २९९।३०
ग्रीवाभङ्गाभिराम (अ शा १ ७) २०७।७चक्रीकृतभुजलता २६९।४२६चन्द्रबिम्बरविविम्ब ३४०।३
ग्रीवास्तम्भभृत (शा प २०७) ४१।६५चक्री चकारपङ्क्तिं (सूर्यशतक.७१)२७।१४चन्द्रखण्डकरायते (शृङ्गारति १६) २७४।८
ग्रीष्मादित्यकरप्र (शा प ५८८) २०८।२७चक्री त्रिशूली न हरो १८५।३५चन्द्रश्चन्दनमिन्दुरि १३७।५९
ग्रीष्मे ग्रीष्मतरै २९१।४२चकुरेव लल (शिशु १० ६६) ३१७।२७चन्द्रादित्योरिनेत्र १७।१३
ग्रीष्मोष्मप्लोष(श प ३८५५) ३४०।१२९चक्रे चण्डरुचा समं ३४६।३२चन्द्राद्भूत्यकमण्डलो १३७।६०
ग्लानिच्छेदि क्षुत्प्र १३०।१०६चक्रेण विश्व यु(नैषध ७ ८९) २६८।३७८चन्द्राधिकैतन्मु(नैषध ७ ४४)२६१।१५६
चक्षु पूत न्य (शा प ४५५१)१५६।१४१चन्द्राननार्यदेहाय ३।४
घट भिन्यात्पट(शा प १४६८) १५४।५०चक्षु प्रीत्या (सूक्ति ७५ १०) २९५।१२२चन्द्रायते शुक्(काव्याल ८ २८)३४४।१६
घटन विघटनमयवा (सु २३९७)७०।२८चक्षुर्जाड्यमपैतु ३०७।५८चन्द्रे शीतलवल्यली ३४६।२०
घटमानकोककुचमाम् ३२७।६चक्षुर्मेचकसम्बुज २७२।५७चन्द्रो जड कदलि २५३।२२
घटितमिवाञ्जन (सा द १० ४५) २९७।६चक्षुर्लुप्तमपीकणं (सूक्ति ५८.७) ३११।२५चन्द्रोदये चन्दनमङ्ग २९८।११
घटीयन्त्रायते हारी २६६।३००चञ्चच्चन्दनखाग्रभेदवि १९।५०चन्द्रो द्वादश भास्कर २९२।३५
घटो जन्मस्थानं (शा प ५०५) ५२।२५४चञ्चच्चन्द्रिकचन्द्रचारु ६।७४चन्द्रोऽनेन कलङ्कि १२२।१७४
घण्टानादो नि (शिशु १८ १०) १२९।५७चञ्च्चेलाव्रला (शा प ३९२६) ३४७।४२चपलतस्तरङ्गै (शा प १०९२) २१६।२१
घण्टारवै रौद्रत(कुमार १४ ४७)१२९।४८चञ्चत्कर्पूरचौरा(शा प.३८१२) ३२७।३९चपलबृदये कि (अमरु ५६) ३०८।११
घनघनमपि दृष्ट्वा (शा.प ३५७३)३०९।१चञ्चत्काञ्चनशैलाव २६५।२७०चरणकमलदासस्त्वे ३०६।३४
घनघनाघनकान्ति १९५।०४चञ्चद्देवेन्द्रकुञ्जरथलि १०।१६०चरणकमल तदीय २६९।४०९
घनतरघनवृन्दच्छादिते ३४१।५०चञ्चद्रादशमील (शा प ५३२) १९१।८६चरणपतनप्रत्याख्या(अमरु ५०) ३५०।५०
घनतरघनवृन्दच्छा ३४१।५१चञ्चद्धुजभ्रमितच (वेणी १ २१) ३६७।३चरमगिरिकुरङ्गी (सूक्ति ८२ २५) ३२२।७
घनतरतिमिरघुणो(सूक्ति ६१ १३) २९९।१चञ्चरीक चतुरोऽसि २२३।६७चरमगिरिनिकुञ्जमु २९७।२२
घनसन्तमसमली (भल्लट. १८) २२९।२३५चञ्चल वसु (किरात १३ ५३) १५१।३९३चराचरजगत्स्फार (रसगङ्गाधर) १।८
घनसमयमहीभृत्प ३४१।४९चटचटिति चर्म (शा प.१२६) १९।४८चरेद्धीमानकण्टको १५०।३३८
घनसमये शिखिषु २००।४२चण्डचाणूरदोर्द (सु ३३) २२।१०५चर्मखण्ड द्विधा(भर्तृ.३ १७) ३७१।१२३