भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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२०२ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ जोध नाम तब जब मन कौ निरोध होई, वौध कौ बिचार शौव आतमा कौ करिये । सुन्दर कहत ऐसे जीवत ही मुक्त होइ, मूये तै मुकति कहै तिनकौ परिहरिये ॥२०॥ योगी जागै योग साधि भोगी जागै भोग रत, रोगी जागै दुख माहि रोग की उपाधि मैं । चोर जागै चोरी कौ पहरू जागै राखिवे कौ, निरधन जागै धन पाइबे की ब्याधि मैं ॥ दिवालो की राति जगै मन्त्रवादी मन्त्र जपि, क्यौ ही मेरौ मन्त्र फुरै देखौ मन्त्र साधि मै । बिबिध उपाइ करि जागत जगत सब, सोवै सुख सुन्दर सहज की समाधि मैं ॥२१॥ योगी तू कहावै तौ तू याही योग कौ बिचारि, आतमा कौ जोरि परमातमा ही जानिये । सन्यासी कहावै तौ तू देह कौ सन्यास करि, बाहिर भीतरि एक ब्रह्म पहिचानिये ॥ जगम कहावै तौ तू एक शिव ही कौ देखि, थावर जगम सब द्वैत भ्रम भानिये । जैनी तू कहावै तौ तू दोष बुद्धि दूर करि, सुन्दर कहत जिनराज उर आनिये ॥२२॥