सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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७० ] ॥ सुन्दर विलास ॥ जा दिन गर्भ सयोग भयौ जब, ता दिन वून्द छिपाहुति ताँही । द्वादस मास अधो मुख झूलत, वूडि रह्यौ पुनि वा रस माहि ॥ ता रज बीरज की यह देह सु, तू अब चालत देखत छाही । सुन्दर गर्व गुमान कहा शठ, आपुनि आदि बिचारत नाही ॥५॥ ॥ इति देह मलिनता गर्व प्रहार को अङ्ग सम्पूर्ण ॥ (५) बीरज-वीर्य।