भारतकोश
सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary

कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा

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१२४ सुर्जनचरितमहाकाव्यम् ज्ञात्वा रणस्तम्भपुरं तदानीं विप्रोषितस्वामिकमृद्धवैरः । सहाऽश्ववारैरतिदुर्निवारैरलावुदीनस्त्वरितं प्रतस्थे ॥६४॥ उस समय हम्मीरदेव को रणस्तम्भपुर से बाहर गया हुआ जानकर प्रवृद्ध वैर वाला अला- उद्दीन शीघ्र दुर्निवार घुड़सवारों के साथ रणस्तम्भपुर की ओर रवाना हुआ ॥६४॥ पञ्चाशद्भिः सैन्धवानां सहस्रैरग्रस्कन्धे गन्धवाहस्यदानाम् । उलूग्खानः प्राणतुल्यो नृपस्य भ्राता भीमः शात्रवाणाञ्चचाल ॥६५॥ आगे-आगे पचास हज़ार वायु के समान वेग वाले घोड़ों के साथ अलाउद्दीन का प्राणप्रिय भाई उलूगखाँ, जो शत्रुओं के लिये भयंकर था, रवाना हुआ ॥६५॥ हम्मीरदेवनृपतेरपि मन्त्रिमुख्या विद्याभटप्रभृतयः सुचिरं विचार्य । माद्यन्मतङ्गजतुरंगमसङ्कुलानि निन्युः सपत्नपृतनाभिमुखं बलानि ॥६६