भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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मध्यमाधिकार ७७ यह आधुनिक मत से बुध का भूकेन्द्रगत मध्यम विक्षेप है जो सिद्धान्त शिरोमणि के मध्यम विक्षेप से १०' अधिक है। सिद्धान्त दर्पण के मान आधुनिक मत से बहुत मिलते हैं। इसी प्रकार शुक्र का (रविकेन्द्रगत) मध्यम विक्षेप ३° २३' ३७" और सूर्य से मध्यम अंतर .७२३३ है जब कि पृथ्वी का १ है, इसलिए यदि चित्र १४ में ब, बा की जगह शु, शू रखकर शु शू को शुक्र की कक्षा मान ली जाय तो पहले की नांई सम्बन्ध यह होगा— ज्या < शुपर = (.७२३३ / १) × ज्या ३° २३' ३७" = .७२३३ × .०५६२ = .०४२८ ∴ <शुपर = २° ७' जो सिद्धान्त शिरोमणि के २° १६' से ११' अधिक और सिद्धान्त दर्पण के २° २८' से केवल १' कम है। इससे प्रकट है कि हमारे पुराने आचार्यों के अनुसार बुध, शुक्र के मध्यम विक्षेप आधुनिक मानों से केवल १० या ११ कला कम हैं जो उस समय की स्थिति को देखते हुए बहुत सूक्ष्म हैं। सूर्य सिद्धान्त के मध्यमाधिकार नामक प्रथम अध्याय का विज्ञान भाष्य समाप्त हुआ।