सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७६ सूर्य सिद्धान्त ऊपर की तालिका से देख पड़ेगा कि बुध और शुक्र के मध्य विक्षेपों के आधुनिक मानों और सिद्धान्तों में दिये हुए मानों में बहुत अंतर है । इसका कारण यह है कि आधुनिक विक्षेप-मान रविकेन्द्रगत (heliocentric) हैं अर्थात् वह हैं जो सूर्य के केन्द्र से देख पड़ते हैं और हमारे सिद्धान्तों के मान भूकेन्द्रगत (geocentric) हैं अर्थात् वह हैं जो पृथ्वी के केन्द्र से देखने पर जान पड़ते हैं । दर्शक के स्थानों की भिन्नता के कारण उन ग्रहों के विक्षेपों में बहुत अंतर नहीं पड़ता जो सूर्य से दूर हैं। परन्तु सूर्य के पास वाले ग्रह बुध और शुक्र के विक्षेपों में बहुत अंतर पड़ जाता है जो नीचे के उदाहरण से स्पष्ट हो जायगा :- चित्र-१४ दिये हुए चित्र १४ में र रवि का केन्द्र, प पृथ्वी का केन्द्र प र पा क्रान्तिवृत्त और ब र बा बुध कक्षा हैं । र से देखने पर बुध कक्षा क्रान्तिवृत्त से ब र प या बा र पा कोण बनाती है जो आधुनिक मत से ७°०′१०″ है । परन्तु पृथ्वी के केन्द्र प से देखने पर बुध कक्षा ब प र कोण बनाती हुई जान पड़ती है जिसका मान ब र प कोण से कहीं कम हैं क्योंकि प ब (बुध से पृथ्वी का माध्यम अंतर) यदि १ है तो ब र (सूर्य से बुध का माध्यम अंतर) केवल ·३८७१ है। त्रिकोणमिति से ब प र कोणका मान सहज ही निकल सकता है क्योंकि किसी त्रिभुज सामने के कोण की ज्या से भाग देने पर लब्धि समान होती है। इसलिए - ज्या ∠ बपर / ब र = ज्या ∠ बरप / प ब अथवा ज्या ∠ बपर = ब र / प ब × ज्या ∠ ब र प = ·३८७१ / १ × ज्या ७°०′१०″ = .३८७१ × .१२१६ = ०.०४७२ ∴ ∠ बपर = २°४१′