सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 104, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार ८१ जिस समय ग्रह मन्दोच्च से १८०° पर पहुँचता है उस समय उसकी गति अत्यन्त अधिक होती है । यही ग्रह का नीच स्थान है । इस विन्दु से जब ग्रह आगे बढ़ता है तब उसकी दैनिक स्पष्ट गति मध्यम गति से अधिक रहती है, इसलिए उसको मध्यम गति से जहाँ पहुँचना चाहिये उससे भी आगे बढ़ जाता है और प्रति दिन आगे बढ़ता जाता है । इसलिए ग्रह के मध्यम स्थान में धन संस्कार करने से स्पष्ट स्थान ज्ञात होता है । जब ग्रह मन्दोच्च से १८०° से आगे हो जाता है तब मन्दोच्च ग्रह से १८०° के भीतर पूर्व की ओर होता है । इसलिए यहाँ भी ग्रह मन्दोच्च की ओर खिंचा हुआ जान पड़ता है । इसी कारण यह कल्पना निश्चय हो गयी कि ग्रह को मन्दोच्च अपनी ओर अर्थात् पूरब में हुआ तो पूरब की ओर और पच्छिम में हुआ तो पच्छिम की ओर खींच लेता है । चित्र १५ दिये हुए चित्र १५ में उ म नी मी सूर्य का मार्ग है । प पृथ्वी का केन्द्र है जो सूर्य मार्ग के केन्द्र पर नहीं है । सुविधा के लिए किसी ग्रह को हम दो नामों से पुकारेंगे मध्यम ग्रह और स्पष्ट ग्रह, जिनका अंतर यह है—मध्यम ग्रह वह काल्पनिक ग्रह है जो मध्यम गति से राशि चक्र पर पृथ्वी-की परिक्रमा करता हुआ माना गया है और स्पष्ट ग्रह वह ६