भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 105, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 105

८२ सूर्य सिद्धांत ग्रह है जो पृथ्वी की परिक्रमा करता हुआ प्रत्यक्ष देखा जाता है। मध्यम ग्रह की गति सदैव समान होती है; परन्तु स्पष्ट ग्रह की गति घटती बढ़ती रहती है। प्रतिदिन की स्पष्ट गतियों का औसत निकालने से जो कुछ आता है वही मध्यम गति है। इसलिए यह स्पष्ट है कि स्पष्ट गति मध्यम गति से कभी कम होती है और कभी अधिक । जब ग्रह अपने मन्दोच्च पर रहता है तब उसकी स्पष्ट गति अत्यन्त मन्द होती है। इस जगह मध्यम और स्पष्ट ग्रह एकसाथ होते हैं। परन्तु इसके आगे मध्यम ग्रह स्पष्ट ग्रह से तीव्र होने के कारण आगे बढ़ जाता है और स्पष्ट ग्रह पीछे रह जाता है। चित्र में म, मा मध्यम सूर्य के स्थान और स, सा स्पष्ट सूर्य के स्थान हैं। इसलिए स या सा का स्थान जानने के लिए म या मा के स्थान में से घटाने की आवश्यकता होती है। जब मध्यम सूर्य नी पर पहुँचता है अर्थात् मन्दोच्च से १८०° आगे हो जाता है तब स्पष्ट सूर्य भी नी पर देख पड़ता है। इस जगह स्पष्ट सूर्य की गति अत्यन्त अधिक होती है और वह मध्यम सूर्य से बहुत तीव्र होता है इसलिए नी से आगे चलकर स्पष्ट सूर्य ही मध्यम सूर्य से आगे बढ़ा रहता है। सि, सी स्पष्ट सूर्य के और मि, मी मध्यम सूर्य के स्थान हैं। यहाँ भी स्पष्ट सूर्य उच्च की ओर हटा हुआ देख पड़ता है और मध्यम सूर्य से आगे है, इसलिए इसका स्थान जानने के लिए मध्यम सूर्य के स्थान में जोड़ने की आवश्यकता होती है। सूर्य और चन्द्रमा के मध्यम और स्पष्ट स्थानों की भिन्नता का कारण तो इतनी ही कल्पना से समझाया जा सकता है परन्तु मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि इन पाँच ग्रहों के मध्यम और स्पष्ट स्थानों में और भी भिन्नता होती है। इसलिए मन्दोच्च की कल्पना के साथ शीघ्रोच्च की कल्पना भी की गयी । इसकी कल्पना कैसे हुई इसका अनुमान भास्कराचार्य जी के अनुसार यों है१ :— 'जब शनि, गुरु और मंगल इन तीन ग्रहों से सूर्य आगे रहता है तब स्पष्ट ग्रह मध्यम ग्रह से आगे होते हैं अर्थात् सूर्य की ओर बढ़े देख हुए पड़ते हैं। परन्तु जब इनसे सूर्य पीछे रहता है तब स्पष्ट ग्रह मध्यम ग्रह से पीछे रहते हैं अर्थात् सूर्य की ओर पिछड़े हुए देख पड़ते हैं।' इसलिए विद्वानों ने यह कल्पना की कि इन तीनों ग्रहों के शीघ्रोच्च सूर्य के साथ रहते हैं। इसलिए यह अनुमान करना स्वाभाविक है कि इन ग्रहों को इनके शीघ्रोच्च भी जो सूर्य के समान या साथ रहते हैं खींचते हैं। यदि इस कल्पना को और बढ़ा दिया जाता तो सूर्य को ही शीघ्रोच्च अथवा इन ग्रहों का आकर्षक मान लेने में न्यूटन का सिद्धान्त ज्ञात हो जाता । ऊपर मन्दोच्च और शीघ्रोच्च स्थानों की जो कल्पना की गयी है, उनकी ओर ग्रह कुछ खिंच जाते हैं यह जानकर यह अनुमान होता ही है कि यह स्थान कुछ १. सिद्धान्त शिरोमणि गणिताध्याय पृष्ठ २०