भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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६० सूर्य सिद्धान्त = स का कोणीय वेग × (स का कर्ण)² / सा का कोणीय वेग × (सा का कर्ण)² = [ अ × {१ / (स का कर्ण)²} × (स का कर्ण)² ] / [ अ × {१ / (सा का कर्ण)²} × (सा का कर्ण)² ] = १ इससे सिद्ध हुआ कि स पा स और सा प सी दोनों वृत्त खंड समान हैं। यही केपलर का दूसरा नियम है। केपलर के तीसरे नियम से सूर्य से सब ग्रहों की दूरियों का सम्बन्ध जाना जा सकता है। जैसे शुक्र और पृथ्वी के भगण काल क्रमशः २२४·७ दिन और ३६५·३ दिन हैं, इसलिए इनके भगण कालों के वर्गों का सम्बन्ध = (३६५.३)² / (२२४.७)² = २.६४५ परन्तु केपलर के तीसरे नियम के अनुसार (सूर्य से पृथ्वी की दूरी)³ / (सूर्य से शुक्र की दूरी)³ = (३६५.३)² / (२२४.७)² = २.६४५ यदि सूर्य से पृथ्वी की दूरी १ मान ली जाय तो सूर्य से शुक्र की दूरी = ( १ / २.६४५ )^(१/३) = (•३७८)^(१/३) = ( ३७८ / १००० )^(१/३) = १/१० (३७८)^(१/३) = १/१० × (७³ + ३५)^(१/३) = १/१० × ७ ( १ + ५ / ७² )^(१/३) = ७/१० (१ + •१०२)^(१/३) = ७/१० {१ + १/३ × (•१०२) + १/२ × १/३ (१/३ - १) (•१०२)²

  • १/६ × १/३ × (१/३ - १) (१/३ - २) (•१०२)³ + ⋯ } = ७/१० (१ + .०३४ - .००११६ + .००००६६
  • एक बहुत सूक्ष्म संख्या) = ७/१० × १.०३२६ = ७.२३०३ / १० = .७२३