भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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६२ सूर्य-सिद्धान्त सिद्ध हो सकती है, जो पीछे दी जायगी। इस जगह साधारण गणित के ही आधार पर कुछ विस्तार के साथ सिद्ध की जाती है । १ मान लो कि 'स' एक स्थिर बिन्दु है और किसी वस्तु का कोई कण स के चारों ओर घूमता हुआ क ख ग घ च बहुभुज क्षेत्र बना रहा है और क ख, ग घ, या घ च भुज समान काल में अथवा १ पल में चलता है । यह भी मान लो कि इन भुजों के मान भिन्न-भिन्न हैं और और जब तक कण किसी एक भुज पर रहता है तब तक उसकी गति एकरूप (uniform) रहती है । स क ख, स ख ग, स ग घ, स घ च त्रिभुजों के क्षेत्रफल भी समान समझ लेने चाहिये । अब यह प्रत्यक्ष है कि समान काल में वह कण स के चारों ओर घूमता हुआ समान क्षेत्रफल बनाता है । गति के पहले नियम के अनुसार जब तक कण बहुभुज चित्र २० १. यह युक्ति Heroes of Science : Astronomers के पृष्ठ १७३— १७५ के आधार पर है ।