भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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८६ सूर्य सिद्धान्त {|l|l|l|l|l|l|l|} \hline ग्रहों के नाम & \multicolumn{3}{c|}{विषुवद्वृत्तीय X अर्द्धव्यास} & मात्रा (mass) जब कि पृथ्वी का १ माना जाय & मध्यम घनत्व जब पानी का १ माना जाय & गुरुत्वाकर्षण पृष्ठ पर जब कि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण १ माना जाय

& कोणात्मक † & मीलों में & जब कि पृथ्वी का १ माना जाय & & &

\hline सूर्य & १६' १".१९ & ४,३२,८६० & १०६.२ & ३,२६,३६० & १.४० & २७.६१

बुध & ३".३४ & १,५०४ & ०.३८० & ०.०५५? & ५.५६? & ०.३८

शुक्र & ८".४० & ३,७८३ & ०.६५५ & ०.८०७ & ५.१४ & ०.८६

पृथ्वी & ८".८० & ३,९६३ & १.००० & १.००० & ५.५६ & १.००

मंगल & ४".६८ & २,१०८ & ०.५३२ & ०.१०८ & ३.६२ & ०.३८

गुरु & १' ३७".३६ & ४३,८५० & ११.०६ & ३१४.५० & १.३७ & २.५७

शनि & १' २४".७५ & ३८,१७० & ६.६३ & ६४.०७ & ०.६४ & १.०१

वरुण* & ३४".२८ & १५,४४० & ३.६० & १४.४० & १.३५ & ०.६५

& & & & & &

इन्द्र * & ३६".५६ & १६,४७० & ४.१५ & १६.७२ & १.२८ & ०.६७

\hline

† कोणात्मक. अर्द्ध व्यास ग्रह के बिम्बार्ध का कोणात्मक मान है जब कि द्रष्टा ग्रह से उतनी दूरी पर हो जो सूर्य से पृथ्वी की मध्यम दूरी है ।

  • यह नामकरण केतकरकी ज्योतिर्गणित के अनुसार है । ? जिस संख्या के सामने यह चिन्ह है उसका ठीक ठीक निश्चय अभी तक नहीं हो सका है । X ग्रहों के आकार भी पूर्ण गोल नहीं हैं उनमें भी ध्रुवों पर कुछ चपटा है जैसी हमारी पृथ्वी है इसलिए उनमें भी विषुववृत्त होते हैं ।
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